भारत के इस राज्य में दिवाली के दिन कराते हैं फसलों की शादी, जानें क्यों
punjabkesari.in Thursday, Oct 16, 2025 - 01:56 AM (IST)
नेशनल डेस्क: देशभर में दिवाली की रौनक दिख रही है- कहीं घर सज रहे हैं, कहीं बाजारों में दीपों की जगमगाहट है। लेकिन छत्तीसगढ़ के बस्तर में दिवाली कुछ अलग ही अंदाज में मनाई जाती है। यहां इस त्योहार को ‘दियारी पर्व’ कहा जाता है, जो तीन दिन तक चलता है। इसकी सबसे खास और अनोखी रस्म है- फसलों की शादी।
बस्तर के आदिवासी मान्यता के अनुसार, फसल को देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। दिवाली के दिन खेतों में खड़ी फसल की पूजा की जाती है और उसकी कलियों की भगवान नारायण से प्रतीकात्मक शादी कराई जाती है। माना जाता है कि इससे घर और गांव में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है।
कैसे होती है फसल की शादी?
दियारी पर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है। गांव के मुखिया और पुजारी की अनुमति से तारीख तय की जाती है, फिर खेतों में जाकर फसल और नारायण राजा की शादी की रस्में निभाई जाती हैं। इस दिन चरवाहों का विशेष सम्मान किया जाता है- उन्हें सल्फी और शराब पिलाई जाती है, जो सम्मान और आभार का प्रतीक है।
दूसरे दिन पशुओं के नाम दावत
अगले दिन पशुओं को मूंग-उड़द की खिचड़ी खिलाई जाती है, उनके माथे पर लाल टीका लगाया जाता है और फूलों की माला पहनाई जाती है। शाम को चरवाहे और पशु मालिक स्थानीय नृत्य और गीतों में शामिल होते हैं।
तीसरे दिन होती है ‘गोठन पूजा’
अंतिम दिन गोठान (जहां मवेशी आराम करते हैं) में पूजा होती है। महिलाएं सूप में धान लेकर वहां इकट्ठा होती हैं — यह चरवाहों की सालभर की मेहनत का प्रतीक माना जाता है।
