'हम वापस आएंगे, यहीं मरेंगे...यहीं दिल लगाएंगे' रूला देगी कश्मीरी पंडितों के दर्द की दास्तां

2020-01-18T16:32:55.273

नेशनल डेस्क: जम्मू-कश्मीर से कश्मीरी पंडितों के विस्थापन को 30 साल हो चुके हैं। 19 जनवरी 1990 के दिन कश्मीर में एक ऐसी त्रासदी आई थी जिसने पल भर में सब कुछ तबाह कर दिया था। रातों-रात अपना सबकुछ छोड़कर भागे पंडित कभी वापस अपने घरों में लौट के नहीं जा सके। आज की पीढ़ी ने भले ही उस भयानक मंजर को ना देखा हो लेकिन उन्हें इस दर्द का अहसास है। 

 

आज 30 साल बाद उस दर्द भरी कहानी को बयां कर रहा है सोशल मीडिया। यहां हर कश्मीरी पंडित एक ही सुर में बोल रहा है कि ‘हम आएंगे अपने वतन, यहीं पे दिल लगाएंगे, यहीं मरेंगे और  यहीं मरेंगे और यहीं के पानी में हमारी राख बहाई जाएगी। दरअसल थिएटर अभिनेता चंदन साधु ने  वीडियो जारी कर कहा कि इस सप्ताह के अंत में कश्मीरी पंडितों के निर्वासन के 30 साल पूरे हो गए हैं। न्याय के लिए हमारे आसुंओं पर ध्यान दिया जाना चाहिए। हम आएंगे, अपने वतन, यहीं पे दिल लगाएंगे, यहीं मरेंगे और यहीं के पानी में हमारी राख बहाई जाएगी। लोगों ने  इस पहल का समर्थन किया देखते ही देखते ट्विटर पर #HumWapasAayenge टेंड करने लगा और दिल खोलकर अना दर्द बयां कर रहे हैं। 

 

दरअसल ये डायलॉग है अपकमिंग फिल्म शिकारा का। इस फिल्म में 19 जनवरी 1990 में हुई एक समुदाय के साथ बर्बरता की कहानी को दिखाय गया है। जब लाखों लोग बेघर हो गए थे। फिल्म में यह बताने की कोशिश की गई है कि बताया गया कि कैसे  कैसे स्वतंत्र भारत में एक समुदाय का जबरन पलायन हुआ था। 

 

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