HPV Test Cost : कैंसर की समय रहते पहचान अब और आसान, भारतीय HPV टेस्ट ने रचा नया इतिहास
punjabkesari.in Tuesday, Jun 16, 2026 - 02:53 PM (IST)
HPV TEST STUDY: सर्वाइकल कैंसर की समय रहते पहचान अब पहले से कहीं अधिक आसान और सस्ती हो सकती है। भारत में विकसित Truenat HR-HPV-Plus नामक स्वदेशी HPV टेस्ट ने अंतरराष्ट्रीय वैधीकरण मानकों को सफलतापूर्वक पूरा कर नया इतिहास रच दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि कम लागत, तेज परिणाम और उच्च सटीकता वाला यह परीक्षण देश में लाखों महिलाओं तक कैंसर स्क्रीनिंग की पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
एक स्वदेशी पॉइंट-ऑफ-केयर HPV (ह्यूमन पैपिलोमावायरस) टेस्ट सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग के लिए कम लागत वाले प्रभावी उपकरण के रूप में उभरकर सामने आया है। एक बहुराष्ट्रीय वैधीकरण (वैलिडेशन) अध्ययन में पाया गया कि यह अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन मानकों पर खरा उतरता है और संसाधन-सीमित क्षेत्रों में शुरुआती जांच की पहुंच को काफी बढ़ा सकता है।
जून में इंटरनेशनल जर्नल ऑफ कैंसर में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, Truenat HR-HPV-Plus ने इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) के सभी ‘रिड्यूस्ड-वैलेंसी’ और ‘नॉन-इन्फीरियरिटी’ वैलिडेशन मानदंडों को पूरा किया। यह सात से आठ उच्च-जोखिम वाले HPV प्रकारों को लक्षित करने वाला पहला औपचारिक रूप से मान्य रिड्यूस्ड-वैलेंसी HPV परीक्षण बन गया है।
शोधकर्ताओं ने बताया कि इस परीक्षण ने सर्वाइकल इंट्राएपिथीलियल नियोप्लासिया ग्रेड-2 या उससे अधिक गंभीर अवस्था (CIN2+), जो Cervical cancer की एक प्रमुख पूर्ववर्ती स्थिति है, का पता लगाने में 80.4 प्रतिशत संवेदनशीलता (सेंसिटिविटी) और 91.5 प्रतिशत विशिष्टता (स्पेसिफिसिटी) प्रदर्शित की। परीक्षण में विभिन्न प्रयोगशालाओं के बीच 93.3 प्रतिशत की उच्च सहमति (इंटर-लेबोरेटरी एग्रीमेंट) भी दर्ज की गई।
STUDY की प्रमुख लेखिका और एम्स, झज्जर स्थित राष्ट्रीय कैंसर संस्थान की प्रोफेसर एमेरिटस डॉ. नीरजा भाटला ने कहा, “Cervical cancer उन कुछ कैंसरों में से है जिनके कारण ज्ञात हैं, जिनकी रोकथाम के साधन उपलब्ध हैं और जिनमें जोखिम का समय रहते पता लगाया जा सकता है। फिर भी भारत में हजारों महिलाओं का निदान देर से होता है क्योंकि स्क्रीनिंग सही समय और सही स्थान तक नहीं पहुंच पाती।”
AIIMS Delhi के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की पूर्व प्रमुख डॉ. भाटला ने कहा कि 30 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं के लिए स्क्रीनिंग, सर्वाइकल कैंसर के जोखिम को कम करने की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतियों में से एक है। उन्होंने कहा, “हमें ऐसी मजबूत स्क्रीनिंग व्यवस्था की जरूरत है जो कैंसर विकसित होने से पहले जोखिम वाली महिलाओं की पहचान कर सके। HPV डीएनए परीक्षण इस रणनीति का केंद्रीय हिस्सा है।”
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) Cervical cancer स्क्रीनिंग के लिए HPV DNA testing को प्राथमिक विधि मानता है, क्योंकि यह साइटोलॉजी (पैप स्मीयर) की तुलना में कैंसर-पूर्व अवस्था और कैंसर के जोखिम वाली महिलाओं की पहचान अधिक प्रभावी ढंग से कर सकता है। हालांकि, कम और मध्यम आय वाले देशों में इसकी लागत, प्रयोगशाला अवसंरचना की आवश्यकता, रिपोर्ट मिलने में लगने वाला समय तथा फॉलो-अप सुनिश्चित करने की चुनौतियों के कारण इसका उपयोग सीमित रहा है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, इस परीक्षण की अधिक विशिष्टता अनावश्यक रेफरल और अतिरिक्त जांच प्रक्रियाओं को कम कर सकती है, जिससे यह भारत और अन्य निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों में सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग के लिए विश्वसनीय, किफायती और व्यापक स्तर पर लागू किया जा सकने वाला विकल्प बन सकता है।
यह वैधीकरण अध्ययन लैटिन अमेरिका में संचालित ESTAMPA नामक बहु-केंद्रित सर्वाइकल कैंसर स्क्रीनिंग कार्यक्रम के नमूनों पर आधारित था, जिसमें 2012 से 2022 के बीच 30 से 64 वर्ष आयु वर्ग की 44,135 महिलाओं की जांच की गई थी। अध्ययन के लिए नमूने IARC बायोरिपॉजिटरी से लिए गए और कोस्टा रिका के सैन जोस तथा अर्जेंटीना के ब्यूनस आयर्स स्थित केंद्रों से प्राप्त किए गए।
इस अध्ययन में एम्स दिल्ली, आईसीएमआर-राष्ट्रीय कैंसर रोकथाम एवं अनुसंधान संस्थान (NICPR), नोएडा, आईसीएमआर-राष्ट्रीय महिला स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान (NIRWoH), मुंबई; DBT-BIRAC; IARC/WHO; यूनिवर्सिटी ऑफ एंटवर्प; अर्जेंटीना के ANLIS मालब्रान तथा कोस्टा रिका की काजा कोस्टारिसेन्से डे सेगुरो सोशल सहित कई संस्थानों ने सहयोग किया।
भारत में सर्वाइकल कैंसर अब भी एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। हर वर्ष इसके लगभग 1.27 लाख नए मामले सामने आते हैं और करीब 80,000 महिलाओं की इससे मृत्यु हो जाती है। डॉ. भाटला ने कहा कि यह अध्ययन उन शुरुआती अध्ययनों में से एक है जिसमें भारतीय स्तर पर विकसित रिड्यूस्ड-वैलेंसी HPV परीक्षणों का मूल्यांकन WHO के टारगेट प्रोडक्ट प्रोफाइल और IARC वैधीकरण मानदंडों के आधार पर किया गया।
उन्होंने कहा, “यह अध्ययन दर्शाता है कि स्वदेशी प्लेटफॉर्म भी वैश्विक मानक परीक्षणों के बराबर क्लिनिकल वैधीकरण, गुणवत्ता और सटीकता हासिल कर सकते हैं। यह भारत में सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम और शुरुआती पहचान के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकता है।” आईसीएमआर-एनआईसीपीआर की निदेशक डॉ. शालिनी सिंह ने कहा कि WHO के सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन लक्ष्यों को हासिल करने और स्क्रीनिंग कवरेज बढ़ाने के लिए किफायती स्वदेशी HPV परीक्षण समाधान बेहद महत्वपूर्ण हैं।
अध्ययन के एक पत्राचार लेखक डॉ. शोकेट हुसैन ने कहा कि यह मान्यीकृत प्लेटफॉर्म स्क्रीनिंग कार्यक्रमों में आसानी से शामिल किया जा सकता है, क्योंकि जिला स्तर की स्वास्थ्य सुविधाओं में कार्यरत कर्मी पहले से ही इस तकनीक से परिचित हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में सेल्फ-सैंपलिंग और उच्च क्षमता वाले संस्करणों के विकास से इसकी पहुंच और बढ़ सकती है।
शोधकर्ताओं ने यह भी कहा कि HPV टीकाकरण भविष्य में बीमारी के बोझ को काफी कम कर सकता है, लेकिन 30 वर्ष से अधिक आयु की उन महिलाओं के लिए प्रभावी स्क्रीनिंग अभी भी आवश्यक रहेगी जो सर्वाइकल कैंसर के जोखिम में हैं। अध्ययन में यह भी पाया गया कि मूल्यांकन किए गए अन्य परीक्षण आवश्यक वैधीकरण मानकों पर खरे नहीं उतरे, जिससे Truenat HR-HPV-Plus की सफलता भारत-नेतृत्व वाले डायग्नोस्टिक नवाचार के लिए और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
