​​​​​​​Street Food Health Risk:​​​​​​​ बर्गर-चाउमीन-मोमो जैसे स्ट्रीट फूड बन रहे हैं ''साइलेंट किलर'' रिसर्च में हुआ ये बड़ा खुलासा

punjabkesari.in Wednesday, Jan 14, 2026 - 05:45 PM (IST)

Street Food Health Risk: बर्गर-चाउमीन-मोमो जैसे फास्ट फूड खाने वालों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। मद्रास डायबिटीज रिसर्च फाउंडेशन की एक हालिया स्टडी के अनुसार हमारे आसपास का 'फूड एनवायरनमेंट' हमें बीमार बनाने में सबसे बड़ी भूमिका निभा रहा है। इस स्टडी में सामने आए नतीजे काफी डराने वाले हैं। स्टडी में पाया गया है कि डायबिटीज़ से 43% लोग, मोटापे से  69.7% और डायबीसिटी (मोटापा और डायबिटीज दोनों एक साथ) से 32.5% लोग पीड़ित हैं।(यह स्टडी चेन्नई के इलाकों पर आधारित है)

घर के 400 मीटर के दायरे में 'खतरा'

रिसर्च में पाया गया कि औसतन किसी भी व्यक्ति के घर के 400 मीटर के दायरे में फल-सब्जियों की तुलना में फास्ट फूड और अनहेल्दी स्नैक्स की दुकानें दोगुनी संख्या में मौजूद हैं। डॉ. आर. एम. अंजना के अनुसार, ये दुकानें इस तरह से बनाई और सजाई जाती हैं कि अनहेल्दी खाना सबसे ज्यादा हाइलाइट हो और आसानी से मिल सके। इसी सुलभता के कारण लोग अनहेल्दी खाने की ओर खिंचे चले जाते हैं।

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अनहेल्दी दुकानों का दबदबा

सेहत बिगड़ने की दूसरी बड़ी वजह बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। रिसर्च के मुताबिक डायबीसिटी से पीड़ित 56% लोग ऐसे इलाकों में रहते हैं जहाँ पार्क या जिम उनके घर से 1.1 किलोमीटर से भी ज्यादा दूर हैं। वहीं अनहेल्दी दुकानों का दबदबा (Retail Food Environment Index) इतना ज्यादा है कि हर एक हेल्दी दुकान के मुकाबले दो अनहेल्दी दुकानें मौजूद हैं।

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बचाव के लिए क्या हैं सुझाव?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि केवल व्यक्तिगत इच्छाशक्ति से काम नहीं चलेगा, इसके लिए नीतिगत बदलाव जरूरी हैं:

1.      स्कूलों के पास फास्ट-फूड की दुकानों की संख्या सीमित की जाए।

2.      मोहल्लों में फल-सब्जी विक्रेताओं को प्रोत्साहित किया जाए।

3.      हर सोसाइटी में पार्क और फिजिकल एक्टिविटी के लिए जगह सुनिश्चित हो।

 


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News Editor

Radhika

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