Holashtak 2026: 24 फरवरी से लगेगा होलाष्टक, 8 दिन बंद रहेंगे मांगलिक कार्य! जानें क्या करें और क्या नहीं

punjabkesari.in Monday, Feb 23, 2026 - 06:39 PM (IST)

नेशनल डेस्क: होली से ठीक पहले आने वाला आठ दिनों का विशेष काल होलाष्टक कहलाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से शुरू होता है। वर्ष 2026 में होलाष्टक की शुरुआत 24 फरवरी (मंगलवार) से हो रही है और इसका समापन 3 मार्च 2026 को होलिका दहन के साथ होगा। इन आठ दिनों को पारंपरिक रूप से शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना जाता है।

होलाष्टक क्या है? क्यों माना जाता है अशुभ काल?

ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, होलाष्टक के दौरान प्रमुख ग्रहों की स्थिति उग्र या असंतुलित मानी जाती है। इस कारण नए कार्यों में बाधा, देरी या मानसिक तनाव की आशंका रहती है। पौराणिक कथा के अनुसार, इसी अवधि में भक्त प्रह्लाद को अत्याचार सहने पड़े थे और अंततः होलिका दहन के बाद ही सकारात्मकता की जीत हुई। इसलिए होलिका दहन को नकारात्मक ऊर्जा के अंत और शुभ शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

होलाष्टक में किन कामों से बचें?

होलाष्टक के दौरान निम्नलिखित कार्य न करने की सलाह दी जाती है:

  • विवाह, सगाई, गृह प्रवेश, नामकरण, मुंडन जैसे मांगलिक संस्कार
  • नया व्यापार शुरू करना
  • जमीन-जायदाद की खरीद-बिक्री
  • बड़े निवेश या शुभ मुहूर्त वाले आयोजन

इन कार्यों को 4 मार्च 2026 के बाद करना शुभ माना जाएगा।

होलाष्टक में क्या करना फलदायी माना गया है?

यह समय आध्यात्मिक साधना और आत्मचिंतन के लिए उत्तम माना जाता है। भगवान विष्णु या अपने इष्ट देव की पूजा-अर्चना, मंत्र जाप, ध्यान और भक्ति,दान-पुण्य और सात्विक आहार और परिवार के साथ होली की तैयारियां (रंग, सजावट आदि)। ऐसा करने से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

Holi 2026 की मुख्य तिथियां

  • होलिका दहन: 3 मार्च 2026 (मंगलवार)
  • पूर्णिमा तिथि: 2 मार्च शाम से 3 मार्च शाम तक
  • भद्रा समाप्ति के बाद होलिका दहन का शुभ मुहूर्त
  • अनुमानित समय: शाम 6:23 से रात 8:51 तक
  • रंग वाली होली (धुलेंडी): 4 मार्च 2026 (बुधवार)
     

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Ramanjot

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