सरकार की मंजूरी, अब E100 ईंधन से चलेंगी फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियां
punjabkesari.in Monday, Oct 26, 2026 - 07:58 PM (IST)
नई दिल्ली: सड़क परिवहन मंत्रालय ने सोमवार को 'केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989' में बदलावों की अधिसूचना जारी की। इसके तहत ऐसे फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को अनुमति दी गई है, जो E100 (लगभग शुद्ध इथेनॉल) तक के ईंधन पर चल सकते हैं। सड़क परिवहन मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि E20 (20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) से लेकर E100 तक का ईंधन केवल उन्हीं वाहनों के लिए है, जिन्हें इसके इस्तेमाल के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन और प्रमाणित किया गया है। यह अन्य वाहनों पर लागू नहीं होगा। जो वाहन E20 या सामान्य ईंधन का उपयोग करते हैं, वे E85 या E100 ईंधन का इस्तेमाल नहीं कर सकते।
बायोडीजल से जुड़े नियमों को भी किया गया अपडेट
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने एक बयान में कहा कि इन संशोधनों के जरिए उत्सर्जन प्रमाणन (emission certification) के नियमों को अपडेट किया गया है, जिसमें E85 के साथ-साथ E100 को भी स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। मंत्रालय ने आगे कहा, "इन ईंधनों के लिए प्रमाणित वाहनों को अपनी श्रेणी पर लागू होने वाले उत्सर्जन और सुरक्षा मानकों को पूरा करना होगा। इस अधिसूचना में बायोडीजल से जुड़े नियमों को भी अपडेट किया गया है और कुछ तकनीकी सुधार किए गए हैं। इसके अलावा, सरकार ने इन बदलावों के दायरे में आने वाले हल्के पेट्रोल और डीजल वाहनों के लिए वजन की सीमा को 3,000 किलोग्राम से बढ़ाकर 3,500 किलोग्राम कर दिया है।
कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने की रणनीति
इस साल जून में, मारुति सुजुकी इंडिया ने भारत का पहला फ्लेक्स-फ्यूल पैसेंजर वाहन पेश किया। कंपनी ने 'वैगन आर फ्लेक्स फ्यूल' लॉन्च किया, जो E20 से लेकर E100 तक के इथेनॉल-पेट्रोल मिश्रण पर चलने में सक्षम है। सरकार इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल को बढ़ावा दे रही है। यह आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने की रणनीति का हिस्सा है, जो देश के 'करंट अकाउंट डेफिसिट' (चालू खाता घाटे) के मुख्य कारणों में से एक है।
देश में पहले ही E20 ईंधन पेश किया
देश में पहले ही E20 ईंधन पेश किया जा चुका है, जिसमें 20 प्रतिशत इथेनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल होता है। फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को E85 (85 प्रतिशत इथेनॉल, 15 प्रतिशत पेट्रोल) और E100 (लगभग 100 प्रतिशत इथेनॉल) जैसे उच्च इथेनॉल मिश्रणों पर चलने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह उन पारंपरिक पेट्रोल वाहनों से अलग है, जो वर्तमान में केवल कम इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के लिए स्वीकृत हैं।
पश्चिम एशिया के संघर्ष ने देशों को ऊर्जा संकट के प्रति संवेदनशील बना दिया
टोयोटा मोटर कॉर्पोरेशन, टाटा मोटर्स और हुंडई मोटर कंपनी जैसी प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियां भारतीय बाजार के लिए फ्लेक्स-फ्यूल वाहन विकसित कर रही हैं। ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि नीति-निर्माता देश के जीवाश्म ईंधन (fossil fuel) आयात बिल को कम करने पर जोर दे रहे हैं। मौजूदा हालात में, जब पश्चिम एशिया के संघर्ष ने भारत सहित कई देशों को ऊर्जा संकट के प्रति संवेदनशील बना दिया है, तब फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का महत्व और भी बढ़ जाता है।
शुद्ध बायोफ्यूल वाहनों के लिए रास्ता साफ
इससे पहले, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने वाहन उत्सर्जन नियमों में बदलाव का प्रस्ताव दिया था, ताकि उच्च इथेनॉल मिश्रण और वैकल्पिक ईंधनों के इस्तेमाल का दायरा बढ़ाया जा सके। इससे सभी श्रेणियों के वाहनों में फ्लेक्स-फ्यूल और शुद्ध बायोफ्यूल वाहनों के लिए रास्ता साफ हो गया है। 'केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989' (Central Motor Vehicles Rules, 1989) में प्रस्तावित इन बदलावों का उद्देश्य E85 और E100 जैसे ईंधनों के साथ-साथ B100 बायोडीजल और हाइड्रोजन-CNG मिश्रणों के व्यापक उपयोग को संभव बनाना है।
E85 या E100 तक के मिश्रण का वाहन के डिज़ाइन पर होगा उपयोग
ब्राजील और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों में फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक का इस्तेमाल पहले से ही हो रहा है। इन वाहनों को इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि ये एक ही फ्यूल टैंक का उपयोग करके इथेनॉल और पेट्रोल के अलग-अलग मिश्रणों पर चल सकें। वाहन के डिज़ाइन और सर्टिफिकेशन के आधार पर, इसमें E85 या E100 तक के मिश्रण का उपयोग किया जा सकता है, जिनमें मुख्य रूप से इथेनॉल होता है। स्वीकृत मिश्रणों के हिसाब से ही फ्यूल सिस्टम के पुर्जे और सामग्री चुनी जाती है, और इंजन कंट्रोल सिस्टम ईंधन की संरचना के अनुसार अपने कामकाज को अपने आप एडजस्ट कर लेता है। इससे उपयोगकर्ताओं को यह सुविधा मिलती है कि वे निर्माता द्वारा प्रमाणित और घोषित रेंज के भीतर अपनी पसंद का ईंधन चुन सकें।
