gold-silver ETF: सोने में इतनी बड़ी तेजी क्यों आई, जानें ये तीन बड़े कारण, अभी और बढ़ेगा Gold Price!
punjabkesari.in Wednesday, Feb 11, 2026 - 05:43 PM (IST)
नेशनल डेस्क: बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में बड़े उतार-चढ़ाव का दौर जारी है। हाल ही में भारी गिरावट (क्रैश) के बाद कीमतों में जो उछाल आया था, वह मंगलवार को फिर से सुस्त पड़ता दिखाई दिया। इस अस्थिरता ने निवेशकों को उलझन में डाल दिया है कि क्या अब निवेश का सही समय है या कीमतें और गिरेंगी।
हाल ही में आई जियोजित इन्वेस्टमेंट्स की रिपोर्ट के अनुसार, सोने का भविष्य अभी भी चमकता हुआ नजर आ रहा है। भले ही कीमतों में अभी नरमी दिखी हो, लेकिन लंबी अवधि में इसमें बड़ी तेजी के संकेत हैं। इसके पीछे सबसे बड़ा हाथ चीन और दुनिया के अन्य केंद्रीय बैंकों का बताया जा रहा है।
जनवरी में बना था ऐतिहासिक रिकॉर्ड
सोने के लिए साल की शुरुआत बेहद धमाकेदार रही थी। 29 जनवरी 2026 को भारतीय बाजार (MCX) में सोना 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया था। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसने पहली बार 5,000 डॉलर प्रति औंस का आंकड़ा पार किया था। हालांकि, इसके बाद कीमतों में कुछ गिरावट आई, जिसे जानकार एक सामान्य सुधार मान रहे हैं।
भारी बिकवाली के बावजूद सोना मजबूत क्यों?
फरवरी की नई रिपोर्ट बताती है कि जनवरी में आई भारी अस्थिरता ने सोने की बढ़त को आधा जरूर कर दिया, लेकिन यह अभी भी 5,000 डॉलर के महत्वपूर्ण स्तर के ऊपर टिका हुआ है। लंदन मार्केट में तो कीमतें 5,594 डॉलर तक चली गई थीं। कीमतों में हालिया गिरावट का मुख्य कारण दुनिया में चल रहे तनाव (Geopolitical Tension) में थोड़ी कमी आना है। फिर भी, मासिक आधार पर सोने में 10% से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई है, जो इसकी जबरदस्त मांग को साबित करती है।
तेजी के पीछे के 3 बड़े कारण
1. सोने की बढ़ती ग्लोबल डिमांड: साल 2025 में दुनिया भर में सोने की मांग पहली बार 5,000 टन के पार निकल गई। इसकी बाजार वैल्यू करीब 555 अरब डॉलर रही, जो पिछले साल के मुकाबले 45% ज्यादा है। सुरक्षित निवेश के तौर पर लोग सोने के सिक्के और बिस्कुट खूब खरीद रहे हैं, जिसकी मांग 12 साल के उच्चतम स्तर पर है।
2. Gold ETF में रिकॉर्ड निवेश: निवेशक अब डिजिटल गोल्ड यानी ईटीएफ (ETF) पर बहुत भरोसा कर रहे हैं। जनवरी 2026 में इसमें 19 अरब डॉलर का रिकॉर्ड निवेश हुआ। कुल वैश्विक भंडार अब तक के सबसे ऊंचे स्तर 4,145 टन पर पहुँच गया है। लोग किसी भी वित्तीय संकट से बचने के लिए सोने को सबसे सुरक्षित रास्ता मान रहे हैं।
3. चीन और केंद्रीय बैंकों का 'गोल्ड प्रेम': सोने की कीमतों को असली ताकत केंद्रीय बैंकों की खरीदारी से मिल रही है। खास बात यह है कि चीन के केंद्रीय बैंक (PBOC) ने लगातार 15वें महीने सोने की खरीदारी जारी रखी है। जब सरकारी स्तर पर इतनी बड़ी खरीदारी होती है, तो कीमतों को नीचे गिरना मुश्किल हो जाता है।
भविष्य का अनुमान: अभी और बढ़ेगा सोना!
विशेषज्ञों का मानना है कि छोटी अवधि में सोने के दाम एक सीमित दायरे में ऊपर-नीचे हो सकते हैं। अगर दुनिया में शांति का माहौल बनता है, तो रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ सकती है। लेकिन मध्यम और लंबी अवधि के लिए संकेत पॉजिटिव हैं। जैसे ही मुनाफावसूली का यह दौर थमेगा, ईटीएफ निवेश और केंद्रीय बैंकों की मांग के दम पर सोना एक बार फिर नई ऊंचाइयों को छू सकता है।
