India- US Trade deal विवाद पर विदेश मंत्रालय का बड़ा बयान- पीएम मोदी और ट्रंप के बीच दोसताना संबंध
punjabkesari.in Friday, Jan 09, 2026 - 06:16 PM (IST)
नेशनल डेस्कः भारत ने अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक के उस दावे को खारिज किया है, जिसमें कहा गया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से व्यक्तिगत रूप से बात न करने के कारण भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अटक गया। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि दोनों नेताओं के बीच 2025 में अब तक आठ बार फोन पर बातचीत हो चुकी है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को कहा, "प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच दोस्ताना संबंध हैं। दोनों नेताओं ने हमेशा राजनयिक नियमों के अनुसार एक-दूसरे को सम्मान के साथ संबोधित किया है। यह कहना सही नहीं है कि बातचीत किसी व्यक्तिगत संवाद की कमी की वजह से रुकी है। दोनों पक्ष पिछले साल फरवरी से कई दौर की बातचीत कर चुके हैं और हम एक संतुलित समझौते के बेहद करीब हैं।"
हॉवर्ड लुटनिक ने एक इंटरव्यू में कहा
हॉवर्ड लुटनिक ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा था कि भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौता (BTA) इसलिए अटक गया क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी ने इसे अंतिम रूप देने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप को व्यक्तिगत रूप से फोन नहीं किया। लुटनिक ने कहा था, "सब कुछ तैयार था, बस प्रधानमंत्री मोदी को राष्ट्रपति को कॉल करना था। लेकिन वे ऐसा करने में असहज थे। इसलिए कॉल नहीं हुई।"
उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब राष्ट्रपति ट्रंप ने नई दिल्ली पर दबाव बढ़ाया था कि यदि भारत ने रूस से तेल आयात कम नहीं किया तो अमेरिकी टैरिफ और बढ़ाए जा सकते हैं। पिछले साल अगस्त में ट्रंप प्रशासन ने भारतीय आयात पर शुल्क बढ़ाकर 50% कर दिया था। इसमें रूस से तेल खरीद जारी रखने के जवाब में लगाया गया 25% अतिरिक्त शुल्क और 25% रेस्प्रोकल टैरिफ शामिल था।
महीनों की बातचीत के बावजूद अमेरिका-भारत व्यापार समझौते में बहुत कम प्रगति हुई है। शुरुआती अटकलें थीं कि भारत अपने कृषि क्षेत्र को खोलने में हिचक रहा है। हालांकि, अमेरिकी वाणिज्य मंत्री ने संकेत दिया कि वास्तविक चुनौती व्यक्तिगत कूटनीति रही। तनाव तब और बढ़ गया जब प्रधानमंत्री मोदी ने भारत-पाकिस्तान युद्धविराम में मध्यस्थता और ट्रंप की नोबेल शांति पुरस्कार दावेदारी का समर्थन नहीं किया। भारत की सरकार ने इस पूरे विवाद पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि वह दोनों पूरक अर्थव्यवस्थाओं के बीच संतुलित और पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौते के लिए प्रतिबद्ध है।
