बांग्लादेश के नए PM रहमान के सामने दोधारी तलवार ! US की सख्त शर्तें और चीन की खुली पेशकश, किसका थामेंगे हाथ?

punjabkesari.in Tuesday, Feb 24, 2026 - 06:51 PM (IST)

International Desk: तारिक रहमान  (Tarique Rahman) के नेतृत्व में बांग्लादेश को अमेरिका और चीन के बीच बेहद नाजुक संतुलन साधना पड़ रहा है। एशियाई आर्थिक रिपोर्ट के अनुसार, नई अमेरिकी व्यापार संधि की “कठोर शर्तों” ने ढाका की कूटनीतिक मुश्किलें बढ़ा दी हैं। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका बाजार तक पहुंच, सुरक्षा सहयोग और नियामकीय नियंत्रण के जरिए प्रभाव बढ़ाना चाहता है। हालांकि Donald Trump की पारस्परिक टैरिफ नीति को अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया, फिर भी नई डील की शर्तें साफ संकेत देती हैं कि वॉशिंगटन नहीं चाहता कि ढाका चीन की ओर झुके।

 

टैरिफ 19% से घटाए गए हैं, लेकिन शर्तें न मानने पर फिर से 37% तक बढ़ सकते हैं। बांग्लादेश को अमेरिकी निर्यात नियंत्रण और प्रतिबंधों में भी सहयोग करना होगा। भविष्य में यदि अमेरिका राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर नए व्यापार या सीमा नियम लाता है, तो ढाका को उनसे तालमेल बैठाना पड़ सकता है। बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था काफी हद तक अमेरिकी बाजार पर निर्भर है, खासकर रेडीमेड गारमेंट निर्यात में। दूसरी ओर, China बांग्लादेश को बुनियादी ढांचा, औद्योगिक एकीकरण और रक्षा आपूर्ति की पेशकश कर रहा है। चीन का एफडीआई स्टॉक लगभग 3 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। बीजिंग ने बांग्लादेश सहित कई अल्पविकसित देशों को शून्य-टैरिफ निर्यात पहुंच दी है। गारमेंट और विनिर्माण क्षेत्र में चीन से आयातित कच्चा माल और मशीनरी अहम भूमिका निभाते हैं।

 

रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर अमेरिका का दबाव व्यापार और सुरक्षा तक सीमित है, तो चीन की मौजूदगी बांग्लादेश की औद्योगिक व्यवस्था में गहराई से जुड़ी है।ढाका स्थित Bangladesh Enterprise Institute के वरिष्ठ शोध निदेशक फैज़ सोभान के अनुसार, मौजूदा ध्रुवीकृत वैश्विक माहौल में महाशक्तियों के बीच संतुलन बनाना संरचनात्मक रूप से और भी कठिन होगा। United States और चीन के बीच बढ़ती प्रतिद्वंद्विता में बांग्लादेश के लिए किसी एक खेमे में स्पष्ट झुकाव जोखिम भरा हो सकता है । अमेरिका से टकराव निर्यात पर भारी पड़ सकता है, जबकि चीन से दूरी औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकती है। तारिक रहमान के लिए यह सिर्फ व्यापारिक नहीं, बल्कि रणनीतिक परीक्षा है। एक ओर अमेरिका का दबाव और सुरक्षा सहयोग, दूसरी ओर चीन का निवेश और औद्योगिक


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Content Writer

Tanuja

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