Flipkart ने एक दिन में ही कर ली मोटी कमाई, T20 वर्ल्ड कप में करोड़ों रुपए... जानें आगे का खेल
punjabkesari.in Friday, Feb 13, 2026 - 09:12 PM (IST)
नेशनल डेस्क : यह कहानी बल्ले और गेंद की नहीं, बल्कि रणनीति और समझदारी की है। टी20 वर्ल्ड कप जैसे बड़े टूर्नामेंट में आमतौर पर कंपनियां भारतीय टीम की जर्सी पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने के लिए भारी-भरकम रकम खर्च करती हैं। करोड़ों रुपये के इन सौदों में ब्रांड्स के बीच कड़ी होड़ रहती है। लेकिन इस बार बेंगलुरु की ई-कॉमर्स दिग्गज Flipkart ने परंपरागत रास्ते से हटकर अलग रणनीति अपनाई, जिसने मार्केटिंग जगत का ध्यान खींच लिया।
टीम इंडिया नहीं, नामीबिया पर दांव
इस टी20 वर्ल्ड कप में Flipkart ने भारतीय टीम के बजाय Namibia national cricket team के साथ करार किया। पहली नजर में यह फैसला चौंकाने वाला लग सकता है, लेकिन इसके पीछे ठोस गणित और स्पष्ट सोच काम कर रही थी। जहां भारतीय टीम के प्रमुख प्रायोजन के लिए Apollo Tyres जैसी कंपनियों ने लगभग 579 करोड़ रुपये खर्च किए, वहीं फ्लिपकार्ट ने करीब 1 करोड़ रुपये में नामीबिया टीम का टाइटल स्पॉन्सर बनकर सौदा पक्का कर लिया। यानी लागत बेहद कम और संभावित दृश्यता बेहद बड़ी।
ग्रुप-ए का फायदा
रणनीति का अहम हिस्सा यह था कि नामीबिया उसी ग्रुप में थी, जिसमें भारत और पाकिस्तान जैसी लोकप्रिय टीमें शामिल थीं। स्वाभाविक है कि इन मुकाबलों के दौरान दर्शकों की संख्या करोड़ों में पहुंचती है। ऐसे में नामीबिया की जर्सी पर दिखता फ्लिपकार्ट का लोगो भी बड़े पैमाने पर स्क्रीन टाइम हासिल करता रहा।
कंपनी के ग्रोथ और मार्केटिंग प्रमुख प्रतीक अरुण शेट्टी के मुताबिक, उद्देश्य टूर्नामेंट में सबसे चर्चित ब्रांड बनना था- और यह लक्ष्य काफी हद तक हासिल भी हुआ। सोशल मीडिया पर इस अभियान को 25 करोड़ से अधिक व्यूज मिले, जबकि हजारों क्रिएटर्स और मीम पेजों ने स्वेच्छा से इसे चर्चा का विषय बनाया।
कम खर्च, ज्यादा असर
ब्रांड विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम पारंपरिक विज्ञापन मॉडल से हटकर एक “स्मार्ट बाय” का उदाहरण है। कम निवेश में वही राष्ट्रीय प्रसारण और दर्शक पहुंच हासिल करना, जिसके लिए आमतौर पर कंपनियां भारी प्रीमियम चुकाती हैं- यही इस रणनीति की असली ताकत रही। मार्केटिंग विश्लेषकों के अनुसार, यह ठीक वैसा ही प्रयोग है जैसा कुछ समय पहले कर्नाटक के डेयरी ब्रांड Nandini ने यूरोपीय टीमों के साथ साझेदारी कर किया था।
ऑफ-सीजन में भी चर्चा
दिलचस्प बात यह है कि ई-कॉमर्स सेक्टर के लिए यह कोई बड़ा सेल सीजन नहीं था। ऐसे समय में भारी निवेश जोखिम भरा साबित हो सकता था। लेकिन फ्लिपकार्ट ने सीमित खर्च में अपनी मौजूदगी दर्ज कराकर चर्चा बटोरी। जब दर्शकों ने नामीबिया की जर्सी पर फ्लिपकार्ट का लोगो देखा, तो सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे- “आखिर यह साझेदारी क्यों?” यही जिज्ञासा कंपनी के लिए चर्चा और ब्रांड रिकॉल में बदल गई।
