तोपों और रॉकेटों की गड़गड़ाहट से थर्राया रेगिस्तान: भारतीय M777-धनुष और अमेरिकी M-LIDS ने दिखाया पराक्रम, दुश्मनों को कड़ा संदेश
punjabkesari.in Wednesday, Sep 23, 2026 - 08:20 AM (IST)
नई दिल्ली : 'युद्धाभ्यास 2026' के दौरान महाजन फील्ड फायरिंग रेंज आर्टिलरी की गड़गड़ाहट से गूंज उठी, क्योंकि भारतीय सेना और अमेरिकी सेना के सैनिकों ने कई तरह के हथियार सिस्टम पर एक साथ ट्रेनिंग की। इस संयुक्त ट्रेनिंग में M777 अल्ट्रा-लाइट होवित्ज़र, धनुष आर्टिलरी गन और पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर शामिल थे, जबकि प्रैक्टिस सेशन के दौरान L70 एयर-डिफेंस गन और M-LIDS सिस्टम भी एक्शन में दिखे।
इस ट्रेनिंग का मुख्य फोकस फायरिंग की प्लानिंग, तालमेल और उसे अंजाम देने में आपसी तालमेल (interoperability) विकसित करना था। विज्ञप्ति में कहा गया है कि दोनों सेनाओं की ऑब्जर्वेशन पोस्ट पार्टियों ने लैंडमार्क की पहचान, टारगेट की पहचान, एंगेजमेंट प्रोसेस, फायर ऑर्डर भेजने और फायर में सुधार करने जैसे कामों में एक साथ ट्रेनिंग की, जिससे उन्हें एक-दूसरे की गनरी तकनीकों और कम्युनिकेशन ड्रिल का सीधा अनुभव मिला।
ऑब्जर्वेशन पोस्ट पर टारगेट की पहचान करने से लेकर अलग-अलग फायरिंग प्लेटफॉर्म के ज़रिए उन पर हमला करने तक, इन इंटीग्रेटेड ड्रिल ने दोनों टुकड़ियों को युद्ध के मैदान में फायर सपोर्ट की पूरी चेन का अभ्यास करने में मदद की। ट्रेनिंग ने सटीकता, तेज़ी से प्रतिक्रिया देने की क्षमता और तालमेल को बेहतर बनाया, साथ ही प्रभावी संयुक्त ऑपरेशन के लिए ज़रूरी प्रोसेस की एक जैसी समझ विकसित की।
विज्ञप्ति के अनुसार, महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में संयुक्त फायरिंग और ऑब्जर्वेशन पोस्ट ट्रेनिंग 'युद्धाभ्यास' के व्यावहारिक फोकस को दर्शाती है, जिसमें दोनों सेनाओं के सैनिक ऑपरेशनल अनुभव का आदान-प्रदान करते हैं, आपसी तालमेल को बेहतर बनाते हैं और युद्ध के मैदान की मुश्किल स्थितियों में एक साथ काम करने की अपनी क्षमता को मज़बूत करते हैं।
'एक्सरसाइज़ युद्ध अभ्यास 2026' के तहत, भारतीय सेना और अमेरिकी सेना की टुकड़ियां अभी कई तरह के प्लेटफॉर्म और ऑपरेशनल हालात में ज़बरदस्त जॉइंट ट्रेनिंग कर रही हैं। भारत-अमेरिका के जॉइंट मिलिट्री अभ्यास का 22वाृं संस्करण, 'एक्सरसाइज़ युद्ध अभ्यास 2026', 15 सितंबर को शुरू हुआ।
अभ्यास का मकसद
चल रहे अभ्यास का मकसद अलग-अलग माहौल में दोनों सेनाओं के बीच कॉम्बैट टैक्टिक्स (लड़ाई की रणनीतियों) को बेहतर बनाना, जॉइंट ऑपरेशनल तैयारी को बढ़ाना और टैक्टिकल प्रक्रियाओं को और बेहतर करना है। इस सालाना अभ्यास में दोनों देशों के सैनिक अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर साथ मिलकर ट्रेनिंग करते हैं, ताकि टैक्टिक्स, तकनीकों और प्रक्रियाओं (TTPs) को बेहतर बनाया जा सके और ऑपरेशनल तौर-तरीकों का आदान-प्रदान किया जा सके।
