आर्थिक सर्वेक्षण 2026: पटरी पर इकोनॉमी, राजकोषीय घाटे में सुधार, पर फ्रीबीज के जाल में फंस रहे राज्य
punjabkesari.in Friday, Jan 30, 2026 - 11:37 AM (IST)
Economic Survey 2026 Highlights : बजट सत्र के दौरान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में 'आर्थिक सर्वेक्षण 2026' (Economic Survey 2026) पेश किया। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन द्वारा तैयार यह रिपोर्ट भारत की अर्थव्यवस्था की एक ऐसी तस्वीर पेश करती है जिसमें चमक भी है और भविष्य के लिए गंभीर चेतावनियां भी। सर्वेक्षण का सबसे बड़ा मंत्र है— "भारत को फर्राटा और मैराथन दौड़ एक साथ दौड़नी है।" यानी हमें तेज विकास के साथ-साथ लंबे समय तक टिके रहने वाली नीतियां बनानी होंगी।
विकास की रफ्तार: दुनिया सुस्त, भारत मस्त
वैश्विक तनाव और उथल-पुथल के बावजूद भारत की विकास दर दुनिया के लिए मिसाल बनी हुई है। वित्त वर्ष 2025-26 में विकास दर 7% से ऊपर रहने का अनुमान है। अगले साल यह 6.8% से 7.2% के बीच रह सकती है। भारत के पास 701.4 बिलियन डॉलर का मजबूत सुरक्षा कवच है जो 11 महीने के आयात के लिए काफी है। केंद्र का राजकोषीय घाटा जीडीपी का 4.8% रहा जिसे अगले साल 4.4% तक लाने का लक्ष्य है।
सर्वे की 5 बड़ी चिंताएं और सिफारिशें
1. जंक फूड पर डिजिटल प्रहार
सर्वे में बढ़ते मोटापे और डायबिटीज पर चिंता जताते हुए सिफारिश की गई है कि सुबह 6 से रात 11 बजे तक टीवी और सोशल मीडिया पर जंक फूड के विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगे। पैकेट के आगे 'पोषण चेतावनी लेबल' अनिवार्य हो।
2. सोशल मीडिया और बच्चे
बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर आयु सीमा तय करने का सुझाव दिया गया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को उम्र सत्यापन (Age Verification) और कंटेंट फिल्टर लागू करने को कहा गया है। बच्चों के लिए साधारण फोन या सिर्फ शिक्षा वाले टैबलेट को बढ़ावा देने की बात कही गई है।
3. खाद की समस्या और 'नकद सब्सिडी'
यूरिया की कीमतें 10 साल से नहीं बढ़ी हैं, जिससे इसका अंधाधुंध इस्तेमाल हो रहा है और मिट्टी खराब हो रही है। सर्वे का सुझाव है कि यूरिया के दाम बढ़ाए जाएं और किसानों को नुकसान से बचाने के लिए प्रति एकड़ के हिसाब से सीधे खाते में (DBT) नकद पैसे दिए जाएं।
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4. मुफ्त की रेवड़ी पर लगाम
राज्यों द्वारा बांटी जा रही 'फ्रीबीज' (Freebies) पर कड़ी चेतावनी दी गई है। सर्वे के अनुसार, लोकलुभावन योजनाओं के चक्कर में विकास कार्यों और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर खर्च कम हो रहा है जो भविष्य के लिए खतरनाक है।
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5. शेयर बाजार में सावधानी
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने निवेशकों को आगाह किया है कि शेयर बाजार काफी महंगा हो चुका है। कम ब्याज दरों के कारण कीमतें असली वैल्यू से ऊपर चली गई हैं इसलिए बाजार में किसी भी समय गिरावट का जोखिम है।
उजली तस्वीर: गरीबी और बेरोजगारी में गिरावट
| क्षेत्र | पुराना आंकड़ा (वर्ष) | नया आंकड़ा (2025-26) |
| बेरोजगारी दर | 5.6% (2017-18) | 3.2% |
| महिला रोजगार | 23.3% (2017-18) | 41.7% |
| गरीबी दर | 55.3% (2005-06) | 11.28% |
सोना-चांदी और रुपया
सर्वे के अनुसार वैश्विक अस्थिरता के कारण लोग करेंसी (डॉलर/यूरो) से ज्यादा सोने पर भरोसा कर रहे हैं इसलिए कीमतों में तेजी जारी रह सकती है। वहीं रुपया विदेशी दबाव के कारण कमजोर दिख रहा है जबकि भारत के आंतरिक आर्थिक हालात (Fundamentals) काफी मजबूत हैं।



