प्लास्टिक के कप में चाय पीना है बेहद खतरनाक, हो सकती है ये गंभीर बिमारियां

punjabkesari.in Tuesday, Feb 17, 2026 - 12:53 PM (IST)

नेशनल डेस्क : ऑफिस या बाजार में ठेले से मिलने वाली गरमा-गरम चाय कई लोगों की रोज़मर्रा की आदत है। अक्सर यह चाय पॉलिथीन की थैली या पतले प्लास्टिक कप में डालकर दी जाती है। भले ही यह सुविधा आसान और सस्ती लगे, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यह आदत लंबे समय में नुकसान पहुंचा सकती है।

गरम चाय और प्लास्टिक का खतरनाक मेल

विशेषज्ञों का कहना है कि जब 60 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान वाली चाय कम गुणवत्ता वाले प्लास्टिक या पॉलिथीन में डाली जाती है, तो उसमें मौजूद हानिकारक रसायन पेय में घुल सकते हैं। इनमें फ्थैलेट्स (Phthalates), बिस्फेनॉल ए (BPA) और स्टाइरीन (Styrene) जैसे केमिकल शामिल हो सकते हैं। ये रसायन शरीर के हार्मोन सिस्टम को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। खासतौर पर अगर कोई व्यक्ति दिन में कई बार ऐसे कप में चाय पीता है, तो कम मात्रा में भी लगातार संपर्क शरीर पर असर डाल सकता है।

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हार्मोन असंतुलन का खतरा

डॉक्टरों के अनुसार ये रसायन “एंडोक्राइन डिसरप्टर्स” की तरह काम करते हैं। यानी ये शरीर के एस्ट्रोजन, टेस्टोस्टेरोन, इंसुलिन और थायरॉइड जैसे महत्वपूर्ण हार्मोन के संतुलन को बिगाड़ सकते हैं।

लंबे समय में इसके कारण :

  • हार्मोनल असंतुलन
  • बांझपन की समस्या
  • वजन बढ़ना
  • लगातार थकान
  • नींद से जुड़ी परेशानियां
  • इंसुलिन रेजिस्टेंस
  • टाइप-2 डायबिटीज

जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं। कुछ विशेषज्ञ स्तन, प्रोस्टेट और थायरॉइड कैंसर के खतरे में भी वृद्धि की आशंका जताते हैं, हालांकि इस पर और व्यापक मानव अध्ययन की जरूरत बताई जाती है।

रिसर्च क्या संकेत देती है?

वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि गर्म पेय पदार्थों के संपर्क में आने पर प्लास्टिक से माइक्रोप्लास्टिक कण निकल सकते हैं। कुछ शोधों के अनुसार डिस्पोजेबल कप में परोसी गई चाय या कॉफी में हजारों माइक्रोप्लास्टिक कण मौजूद हो सकते हैं। प्रयोगशाला और पशु अध्ययनों में यह भी संकेत मिले हैं कि ऐसे रसायन ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ाकर डीएनए को नुकसान पहुंचा सकते हैं, जो कैंसर जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है। कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा भी किया गया है कि लंबे समय तक सिंगल-यूज़ प्लास्टिक के संपर्क से शरीर में प्लास्टिक कण जमा हो सकते हैं। विदेशों में किए गए कुछ शोधों में मानव मस्तिष्क ऊतकों में भी माइक्रोप्लास्टिक के अंश पाए जाने की बात सामने आई है, जिसने चिंता बढ़ाई है।

देश में नियम क्या कहते हैं?

भारत में खाद्य सुरक्षा से जुड़े नियमों के तहत फूड-ग्रेड प्लास्टिक के उपयोग की अनुमति है। Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) ने सुरक्षित गुणवत्ता वाले प्लास्टिक के उपयोग को मंजूरी दी है। लेकिन जमीनी स्तर पर सस्ता और रिसाइकिल्ड प्लास्टिक भी इस्तेमाल होता है, जिसकी गुणवत्ता संदिग्ध हो सकती है। ऐसे में उपभोक्ताओं को सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।

सुरक्षित विकल्प क्या हैं?

विशेषज्ञों के अनुसार गरम चाय हमेशा:

  • कांच के गिलास
  • स्टील के कप
  • सिरेमिक (चीनी मिट्टी) के कप
  • मिट्टी के कुल्हड़ में पीना अधिक सुरक्षित माना जाता है।

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Content Editor

Mehak

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