Toll Plaza: क्या आप जानते हैं 2 घंटे में कितनी मोटी रकम कमा लेते हैं टोल प्लाजा का मालिक? जानकर चौंक जाएंगे

punjabkesari.in Wednesday, Oct 22, 2025 - 12:01 PM (IST)

नेशनल डेस्क: दिवाली के मौके पर आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के फतेहाबाद टोल प्लाजा पर टोल कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच विवाद सामने आया। कर्मचारियों को मात्र 1,100 रुपये का बोनस मिलने से नाराज होकर उन्होंने टोल गेट खोल दिया। इस वजह से कई घंटे तक हजारों वाहन बिना शुल्क के गुजरते रहे और कंपनी को लाखों रुपये का नुकसान हुआ। इस घटना ने एक बार फिर टोल प्लाजा की आमदनी पर सवाल खड़े कर दिए।

दो घंटे में कितनी होती है आमदनी?
भारत में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के आंकड़ों के मुताबिक, कुछ व्यस्त टोल प्लाजाओं की आमदनी इतनी ज्यादा है कि केवल दो घंटे में मालिक लाखों रुपये कमा सकते हैं। औसतन एक टोल प्लाजा से प्रति दिन 20,000 से 50,000 वाहन गुजरते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए, सिर्फ दो घंटे में ही टोल से 2 लाख से 5 लाख रुपये तक की कमाई संभव है।

टोल की दैनिक आमदनी
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे या यमुना एक्सप्रेसवे जैसे व्यस्त हाईवे पर कारों से 80-120 रुपये, बसों से 250 रुपये और ट्रकों से 400 रुपये तक टोल लिया जाता है। इन हाईवे पर दिनभर गुजरने वाले हजारों वाहनों के चलते कुछ टोल प्लाजाओं की रोजाना की कमाई 50 लाख से 1 करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है।

टोल वसूली का समय और मॉडल
टोल प्लाजाओं की कमाई सीधे मालिक या उस कंपनी के पास जाती है, जिसे NHAI ने संचालन का अधिकार दिया होता है। अधिकतर टोल प्रोजेक्ट पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर चलते हैं। इसका मतलब है कि सरकार सड़क का निर्माण करवाती है और निजी कंपनी को टोल वसूलने का अधिकार देती है, ताकि निवेश की लागत और मुनाफा निकाला जा सके। इस अवधि को आमतौर पर 15 से 30 साल तक तय किया जाता है।

सबसे ज्यादा कमाई करने वाले टोल
NHAI के अनुसार, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे, दिल्ली-गुरुग्राम टोल, होसूर रोड टोल और ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे टोल भारत के सबसे ज्यादा कमाई करने वाले टोल प्लाजाओं में शामिल हैं। इन जगहों पर भारी ट्रैफिक के कारण सिर्फ दो घंटे में ही 10 लाख रुपये तक की आमदनी हो जाती है। यही वजह है कि कई निजी कंपनियां टोल प्रोजेक्ट में निवेश को स्थिर और लंबे समय तक लाभदायक व्यवसाय मानती हैं।

डिजिटल पेमेंट्स और FASTag से बढ़ी आमदनी
डिजिटल पेमेंट्स और FASTag सिस्टम लागू होने के बाद टोल कलेक्शन अधिक तेज और पारदर्शी हो गया है। नकद लेन-देन कम होने से भ्रष्टाचार और समय की बर्बादी में कमी आई है। इससे ट्रैफिक स्मूद फ्लो में चलता है और अधिक वाहन कम समय में गुजरते हैं। नतीजतन, टोल मालिकों की कमाई में भी वृद्धि हुई है।


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Content Editor

Mansa Devi

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