हर दिन 25 लोगों की मौत, दिल्ली में मौत बनकर मंडरा रही जहरीली हवा, रिपोर्ट में चौंकाना वाला खुलासा

punjabkesari.in Thursday, Jan 15, 2026 - 09:16 PM (IST)

नेशनल डेस्क: दिल्ली की हवा अब सिर्फ सांसों को नहीं, बल्कि ज़िंदगी की रफ्तार को भी छोटा कर रही है। राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ती मौतों के आंकड़े एक गंभीर चेतावनी बनकर सामने आए हैं। दिल्ली सरकार के ताज़ा आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, साल 2024 में श्वसन रोगों से होने वाली मौतों में इज़ाफा हुआ है, जबकि दिल से जुड़ी बीमारियां मौत का सबसे बड़ा कारण बनकर उभरी हैं। औसतन देखें तो 2024 में दिल्ली में हर दिन 25 लोगों की मौत सिर्फ सांस से जुड़ी बीमारियों के कारण हुई।

हर दिन बुझ रहीं 25 सांसें

आंकड़ों के अनुसार, 2024 में श्वसन (रेस्पिरेटरी) रोगों से 9,211 मौतें दर्ज की गईं, जबकि 2023 में यह संख्या 8,801 थी। यानी एक साल में साफ बढ़ोतरी। विशेषज्ञों के मुताबिक, अस्थमा, निमोनिया, फेफड़ों का कैंसर और टीबी इसके प्रमुख कारण हैं। प्रदूषण, जहरीली हवा, धूल-धुआं और बिगड़ती जीवनशैली इस संकट को और गहरा रहे हैं। चिंता की बात यह है कि ये बीमारियां अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहीं- युवा और बच्चे भी तेजी से चपेट में आ रहे हैं।

दिल की बीमारियां बनीं सबसे बड़ा कातिल

2024 में मौतों का सबसे बड़ा कारण परिसंचरण तंत्र (सर्कुलेटरी सिस्टम) से जुड़ी बीमारियां रहीं। इस श्रेणी में 21,262 मौतें दर्ज की गईं- जिनमें हार्ट अटैक, स्ट्रोक, धमनियों में रुकावट और हार्ट फेलियर शामिल हैं। 2023 में यही आंकड़ा 15,714 था, यानी एक साल में 5,500 से ज्यादा मौतों की बढ़ोतरी। विशेषज्ञ इसे तनावपूर्ण जीवनशैली, खराब खानपान, शारीरिक गतिविधि की कमी और बढ़ते प्रदूषण से जोड़कर देख रहे हैं।

संक्रामक रोगों का खतरा अभी टला नहीं

2024 में संक्रामक और परजीवी रोग मौतों का दूसरा बड़ा कारण रहे- 16,060 मौतें दर्ज हुईं। हालांकि यह संख्या 2023 के 20,781 से कम है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि दूषित पानी, खराब स्वच्छता और घनी आबादी के चलते खतरा बरकरार है।

कुल मौतें, मृत्यु दर और जन्म के आंकड़े

  • कुल मौतें (2024): 1,39,480
  • कुल मौतें (2023): 1,32,391
  • लिंगवार: 85,391 पुरुष, 54,051 महिलाएं, 38 अन्य
  • मेडिकली प्रमाणित मौतें: 90,883
  • मृत्यु दर: 2023 में 6.16 → 2024 में 6.37 प्रति 1,000 जनसंख्या
  • जीवित जन्म (2024): 3,06,459 (2023 से 8,628 कम)

सबसे ज्यादा पढ़े गए

News Editor

Parveen Kumar

Related News