दिल्ली सरकार की बड़ी पहल- CM रेखा गुप्ता और गृह मंत्री अमित शाह ने 300 नई ई-बसों को हरी झंडी दिखाई
punjabkesari.in Wednesday, Jul 08, 2026 - 12:54 PM (IST)
नेशनल डेस्क: केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को 300 नई ज़ीरो-एमिशन (प्रदूषण-मुक्त) इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाकर दिल्ली परिवहन निगम (DTC) के बेड़े में शामिल किया। इस नए बेड़े में 'DEVI' कैटेगरी की 195 नौ-मीटर लंबी इलेक्ट्रिक बसें और 105 अत्याधुनिक 12-मीटर लंबी इलेक्ट्रिक बसें शामिल हैं। इस कार्यक्रम के दौरान, गृह मंत्री अमित शाह ने वर्चुअल तरीके से नरेला में अत्याधुनिक हाई-सिक्योरिटी जेल की आधारशिला रखी, जिसमें 250 से ज़्यादा कैदियों को रखने की क्षमता होगी। यह प्रोजेक्ट देश की सबसे आधुनिक, टेक्नोलॉजी पर आधारित हाई-सिक्योरिटी जेलों में से एक होगा और राजधानी के सुरक्षा ढांचे को और मजबूत करेगा। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, गृह मंत्रालय इस प्रोजेक्ट के लिए 100 करोड़ रुपये देगा, जबकि बाकी खर्च दिल्ली सरकार उठाएगी। पारंपरिक जेलों के विपरीत, यह हाई-सिक्योरिटी जेल एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और ग्लोबल सिक्योरिटी स्टैंडर्ड्स के आधार पर बनाई जाएगी। इसके रेडियल-एक्सियल डिज़ाइन से एक सेंट्रल कंट्रोल पॉइंट से हर विंग की निगरानी की जा सकेगी, जबकि हर कैदी को अलग सेल में रखा जाएगा, जिससे आपस में बातचीत, गैंग नेटवर्क बनाने और सुरक्षा से जुड़े अन्य जोखिम कम होंगे।
बयान में कहा गया है कि जेल में AI-इनेबल्ड CCTV सर्विलांस, बॉडी-वर्न कैमरे, बायोमेट्रिक एक्सेस कंट्रोल, ऑटोमेटेड लॉकिंग सिस्टम, फुल-बॉडी स्कैनर, X-रे बैगेज स्कैनर, मोबाइल सिग्नल जैमर, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा, इन-हाउस कोर्ट कॉम्प्लेक्स, एंटी-टनलिंग टेक्नोलॉजी और अत्याधुनिक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर जैसी सुविधाएं होंगी। कैदियों की अनावश्यक आवाजाही को कम करने के लिए हर सेल में अलग टॉयलेट और नहाने की सुविधा होगी। बयान में कहा गया है कि यह प्रोजेक्ट सुरक्षा, निगरानी, तेज़ी से कार्रवाई और टेक्नोलॉजी-आधारित जेल प्रबंधन में एक नया बेंचमार्क स्थापित करेगा।
इस मौके पर केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव, केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा, उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और दिल्ली कैबिनेट मंत्री प्रवेश वर्मा, आशीष सूद, मनजिंदर सिंह सिरसा और पंकज कुमार सिंह मौजूद थे। मुख्यमंत्री गुप्ता ने कहा कि नई शामिल की गई बसें लो-फ्लोर और एयर-कंडीशंड हैं। इन्हें यात्रियों, खासकर दिव्यांगों के लिए सुरक्षित, आरामदायक और आसानी से इस्तेमाल होने लायक यात्रा अनुभव देने के लिए डिज़ाइन किया गया है।उन्होंने बताया कि हर बस में CCTV कैमरे, पैनिक बटन, रियल-टाइम GPS ट्रैकिंग, पैसेंजर इन्फॉर्मेशन सिस्टम और दूसरे एडवांस्ड सेफ्टी और स्मार्ट फीचर्स लगे हैं। उन्होंने कहा कि ज़ीरो टेलपाइप एमिशन (धुआं न छोड़ने वाली) वाली ये बसें दिल्ली की हवा की क्वालिटी सुधारने, कार्बन एमिशन कम करने और नागरिकों को शांत, आरामदायक और पर्यावरण के अनुकूल यात्रा का अनुभव देने में अहम भूमिका निभाएंगी। इन बसों के जुड़ने से दिल्ली के पब्लिक बस बेड़े में बसों की संख्या बढ़कर लगभग 6,600 हो गई है, जिसमें 4,845 इलेक्ट्रिक बसें और 1,755 CNG बसें शामिल हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार का लक्ष्य 2028-29 तक लगभग 14,000 बसों का आधुनिक बेड़ा तैयार करना है।

बयान में कहा गया है कि इलेक्ट्रिक बसों को चलाने के लिए ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करने के मकसद से मंगलवार को नरेला सेक्टर A-1 और A-4, रिठाला और कोहाट एन्क्लेव में अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक बस डिपो का भी उद्घाटन किया गया। नरेला सेक्टर A-1 और A-4 में बने इलेक्ट्रिक बस डिपो में 250 इलेक्ट्रिक बसों की पार्किंग क्षमता है। इन्हें आधुनिक पार्किंग बे, अंदरूनी सड़कों और वर्ल्ड-क्लास ऑपरेशनल और मेंटेनेंस सुविधाओं के साथ विकसित किया गया है, जिससे दिल्ली का इलेक्ट्रिक मोबिलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर और मज़बूत होगा। इसी तरह, कोहाट एन्क्लेव इलेक्ट्रिक बस डिपो में 30 इलेक्ट्रिक बसों की पार्किंग क्षमता है और इसमें एक एडमिनिस्ट्रेटिव बिल्डिंग, सर्विस पिट, रिपेयर शॉप, वॉशिंग पिट, स्टोर, सिक्योरिटी रूम और इलेक्ट्रिकल सब-स्टेशन शामिल हैं। यह डिपो फीडर और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को मज़बूत करने में अहम भूमिका निभाएगा। रिठाला इलेक्ट्रिक बस डिपो में 90 इलेक्ट्रिक बसों की पार्किंग क्षमता है। आधुनिक मेंटेनेंस सुविधाओं से लैस यह डिपो दिल्ली में इलेक्ट्रिक बस ऑपरेशन की क्षमता और भरोसेमंदता को और बढ़ाएगा। इस मौके पर सड़क सुरक्षा को और ज़्यादा वैज्ञानिक और पारदर्शी बनाने के लिए नंद नगरी DTC डिपो में विकसित अत्याधुनिक चार-लेन वाले ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन का भी उद्घाटन किया गया।
यह सुविधा भारी, हल्के और दोपहिया वाहनों की पूरी तरह से ऑटोमेटेड फिटनेस टेस्टिंग करेगी। इसमें हर साल 52,000 भारी और हल्के वाहनों और 20,000 दो-पहिया वाहनों का फ़िटनेस टेस्ट करने की क्षमता है। ब्रेक परफ़ॉर्मेंस, सस्पेंशन, हेडलाइट अलाइनमेंट, साइड स्लिप, एमिशन लेवल और अंडरबॉडी इंस्पेक्शन जैसे टेस्ट आधुनिक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के किए जाएंगे। बयान में कहा गया है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, सड़क सुरक्षा मजबूत होगी और DTC के लिए हर साल नॉन-फेयर रेवेन्यू (किराये के अलावा होने वाली कमाई) भी बढ़ेगी।
