इस्तीफे के बाद पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल का भावुक संदेश, बोले- बंगाल मुझे जाने नहीं देगा

punjabkesari.in Wednesday, Mar 11, 2026 - 06:08 PM (IST)

नेशनल डेस्क: पश्चिम बंगाल के राज्यपाल पद से इस्तीफा देने के बाद C. V. Ananda Bose ने राज्य के लोगों के नाम एक भावुक खुला पत्र लिखा है। करीब तीन साल चार महीने तक पद पर रहने के बाद उन्होंने अचानक अपने पद से इस्तीफा दिया और विदाई से पहले बंगाल की जनता के प्रति आभार व्यक्त किया।

नवंबर 2022 में जब उन्होंने West Bengal के राज्यपाल के रूप में कार्यभार संभाला था, तब उन्होंने कहा था कि उन्हें बंगाल से विशेष लगाव है। उन्होंने यह भी बताया था कि उनके उपनाम “बोस” के पीछे महान स्वतंत्रता सेनानी Subhas Chandra Bose का प्रेरक प्रभाव रहा है।

‘बंगाल मेरे दिल के करीब रहेगा’

अपने पत्र की शुरुआत में आनंद बोस ने पश्चिम बंगाल के लोगों को “प्रिय भाई-बहन” कहकर संबोधित किया। उन्होंने राज्य की जनता से मिले स्नेह, सहयोग और समर्थन के लिए धन्यवाद जताया।

उन्होंने लिखा कि भले ही राज्यपाल के रूप में उनकी जिम्मेदारी समाप्त हो गई हो, लेकिन बंगाल के साथ उनका रिश्ता हमेशा बना रहेगा। उनके शब्दों में, यह राज्य अब उनके लिए “दूसरा घर” बन चुका है और वह भविष्य में भी इससे जुड़े रहेंगे।

लोगों से जुड़ी यादें रहेंगी खास

अपने संदेश में उन्होंने बंगाल की जनता के साथ बिताए अनुभवों को याद किया। उन्होंने कहा कि आम लोगों से मुलाकात, बच्चों का उत्साह, युवाओं का आत्मविश्वास और बुजुर्गों का स्नेह उनके लिए हमेशा यादगार रहेगा। उन्होंने कहा कि इन पलों ने उन्हें इस राज्य और यहां के लोगों से गहराई से जोड़ दिया।

गांधी और टैगोर के विचारों का जिक्र

अपने पत्र में आनंद बोस ने राष्ट्रपिता Mahatma Gandhi के एक विचार का उल्लेख करते हुए लिखा कि “मैं बंगाल को छोड़ नहीं सकता और बंगाल मुझे जाने नहीं देगा।” उन्होंने कहा कि यही भावना उनके मन में भी है।

इसके साथ ही उन्होंने महान कवि और नोबेल पुरस्कार विजेता Rabindranath Tagore के विचारों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मेहनतकश लोगों के बीच ही ईश्वर का असली वास होता है, और बंगाल के गांवों में जाकर उन्होंने इस भावना को करीब से महसूस किया।

जिलों का दौरा और लोगों से जुड़ाव

पूर्व राज्यपाल ने बताया कि पिछले तीन वर्षों के दौरान उन्होंने राज्य के कई जिलों का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने गांवों में लोगों के घरों में भोजन किया, छात्रों के साथ समय बिताया और विभिन्न क्षेत्रों के लोगों से बातचीत की। उनके अनुसार इन अनुभवों ने उन्हें बंगाल की संस्कृति, सामाजिक मूल्यों और जीवनशैली को समझने का अवसर दिया।

विदाई के समय भावुक संदेश

पत्र के अंत में आनंद बोस ने बंगाल की तरक्की और खुशहाली की कामना की। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में यह राज्य विकास और प्रतिष्ठा की नई ऊंचाइयों को छुएगा। उन्होंने लोगों के अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करते हुए लिखा, “मां दुर्गा मेरे लोगों की रक्षा करें।”

कोलकाता से विदा लेते समय उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी जिम्मेदारी को निभाते समय एक सही समय पर विदाई भी जरूरी होती है और उन्हें लगता है कि उन्हें वह समय आ गया।


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Content Writer

SHUKDEV PRASAD

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