CU ने स्थापित की भारत की पहली ‘डॉ. नरिंदर सिंह कपानी रिसर्च चेयर’; वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए ₹1 करोड़ वार्षिक ग्रांट की घोषणा
punjabkesari.in Saturday, Oct 31, 2026 - 08:11 PM (IST)
मोहाली : 'फाइबर ऑप्टिक्स के जनक' के रूप में मशहूर महान भारतीय वैज्ञानिक डॉ. नरेंदर सिंह कपानी की 100वीं जयंती के अवसर पर, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने भारत की पहली 'डॉ. नरिंदर सिंह कपानी रिसर्च चेयर फॉर एक्सीलेंस इन साइंसेज एंड इनोवेशन' की स्थापना की घोषणा की है। इसके साथ ही, साइंटिफिक रिसर्च और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए 1 करोड़ रुपये की वार्षिक रिसर्च ग्रांट भी दी जाएगी। डॉ. कपानी ने ऑप्टिकल फाइबर तकनीक में ऐसी क्रांतिकारी रिसर्च की थी, जिसने वैश्विक दूरसंचार को बदल दिया जिसने आज की डिजिटल क्रांति की नींव रखी।
एक अनूठी पहल के तहत, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में डॉ. नरिंदर सिंह कपानी के अद्वितीय योगदान को सम्मान देते हुए, उनके नाम पर भारत की पहली 'रिसर्च चेयर' स्थापित करने की घोषणा की है। चूँकि भारत में डॉ. कपानी के नाम पर पहले से कोई अन्य 'रिसर्च चेयर' मौजूद नहीं है, इसलिए यह पहल इस महान वैज्ञानिक को एक महत्वपूर्ण संस्थागत श्रद्धांजलि है। इसका उद्देश्य साइंटिफिक रिसर्च और इनोवेशन में निरंतर निवेश करके, तथा युवा वैज्ञानिकों को उनकी विरासत को आगे बढ़ाना है। यह 'रिसर्च चेयर' उभरते वैज्ञानिकों को मेंटरशिप, मार्गदर्शन और शोध सहायता प्रदान करेगी, जिससे वे नए विचारों पर काम कर सकें, उन्नत शोध कर सकें और वैज्ञानिक खोजों को प्रभावशाली तकनीकों में बदल सकें।

चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी कैंपस में डॉ. नरिंदर सिंह कपानी की जन्मशताब्दी समारोह में शामिल होने वाली प्रमुख हस्तियों में मुख्य अतिथि के तौर पर सीएसआईआर-सीएसआईओ (चंडीगढ़) के ऑप्टिक्स एंड फोटोनिक्स इंस्ट्रूमेंटेशन विभाग के वैज्ञानिक-जी, प्रो. (डॉ.) समीर के. मंडल; विशिष्ट अतिथि के तौर पर नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के प्रो. (डॉ.) आरोन डैनर; प्रख्यात शोधकर्ता और आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर एमेरिटस डॉ. अजय घटक (वर्चुअली); और चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. सतबीर सिंह सहगल सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे।
इस अवसर पर बोलते हुए, सीएसआइआर-सीएसआईओ, चंडीगढ़ के ऑप्टिक्स एंड फोटोनिक्स इंस्ट्रूमेंटेशन डिपार्टमेंट के वैज्ञानिक-जी, प्रो. (डॉ.) समीर के. मंडल ने कहा, “ऑप्टिकल विज्ञान में प्रोफेसर कपानी का योगदान पतले और लचीले ग्लास फाइबर पर उनके शुरुआती काम से शुरू हुआ। उन्होंने पहली बार यह दिखाया कि ऑप्टिकल फाइबर का इस्तेमाल करके एक सिरे से दूसरे सिरे तक तस्वीरें भेजी जा सकती हैं। प्रोफेसर कपानी ने पतले और लचीले ग्लास फाइबर विकसित किए और उनके ज़रिए सफलतापूर्वक तस्वीरें भेजीं, जिससे आधुनिक फाइबर ऑप्टिक्स की नींव पड़ी। उन्होंने ही ‘ऑप्टिकल फाइबर’ शब्द दिया और ‘फाइबर स्कोप’ विकसित किया, जो आगे चलकर एंडोस्कोपी जैसी तकनीकों में बदला। उनके काम से साबित हुआ कि ऑप्टिकल फाइबर जानकारी,तस्वीरें भेजने के अलावा, आवाज़ और डेटा संचार जैसी कई नई संभावनाओं के रास्ते खुले।”

प्रो. मंडल ने आगे कहा, “भारतीय वैज्ञानिकों को हमेशा वह पहचान नहीं मिल पाती जिसके वे हकदार होते हैं, और नोबेल पुरस्कार का मामला काफी जटिल है। उदाहरणस्वरुप एस.एन. बोस के काम का भौतिक विज्ञान पर गहरा प्रभाव पड़ा और जो नोबेल पुरस्कार जीतने वाली कई खोजों से जुड़े रहे, फिर भी उन्हें कभी नोबेल पुरस्कार नहीं मिला। इसी तरह, ऑप्टिकल फाइबर तकनीक में प्रोफेसर कपानी के योगदान को याद रखा जाना चाहिए। हम दुनिया की एक-छठी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं,ऐसे दूरदर्शी लोगों की वैज्ञानिक विरासत को आगे बढ़ाना, नोबेल पुरस्कार पाने से कम महत्वपूर्ण नहीं है। हमें अपने युवा शोधकर्ताओं को प्रोत्साहित करना चाहिए ताकि वे विज्ञान तथा तकनीक के नए आयामों की खोज करें।”
नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ सिंगापुर के प्रो. (डॉ.) आरोन डैनर ने कहा, "डॉ. नरिंदर सिंह कपानी के कार्यों ने दिखाया कि कैसे पूर्ण आंतरिक परावर्तन के सिद्धांत का उपयोग करके पतले कांच के रेशों (ग्लास फाइबर) के जरिए प्रकाश को निर्देशित किया जा सकता है, जिससे धात्विक ट्रांसमिशन की कमियों को दूर किया जा सका। फाइबर बंडल, इमेज ट्रांसमिशन और एंडोस्कोपी पर उनके काम ने इमेजिंग और ऑप्टिकल विज्ञान में नई संभावनाएं खोलीं। आज, उसी बुनियादी तकनीक जिसकी शुरुआत डॉ. कपानी ने कांच के रेशों के साथ की थी का उपयोग सिलिकॉन और लिथियम निओबेट वेफर्स पर किया जा रहा है, ताकि उन्नत फोटोनिक उपकरण विकसित किए जा सकें। संचार की गति को और अधिक बढ़ाया जा सके। भले ही आज का आधुनिक शोध लेजर स्रोतों, ऑप्टिकल मॉड्यूलेटर और हाई-स्पीड डेटा ट्रांसमिशन से जुड़ी नई इंजीनियरिंग चुनौतियों पर काम कर रहा है, लेकिन यह डॉ. कपानी के शुरुआती योगदानों की नींव पर ही टिका है। हम डॉ. कपानी को एक महान भारतीय या पंजाबी वैज्ञानिक के रूप में देख सकते हैं, लेकिन मैं उन्हें एक महान अमेरिकी वैज्ञानिक के रूप में भी देखता हूँ और उनका योगदान अंततः पूरी मानवता के काम आता है।"
आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर एमेरिटस और जाने-माने शोधकर्ता डॉ. अजय घटक ने कहा, "फाइबर ऑप्टिक्स के अग्रदूतों में से एक, डॉ. नरिंदर सिंह कपानी के नाम पर यह पुरस्कार मिलना वास्तव में बहुत सम्मान की बात है। क्लैडेड ऑप्टिकल फाइबर और फाइबर बंडलों के ज़रिए इमेज ट्रांसमिशन पर उनके शुरुआती काम ने मेडिकल एंडोस्कोपी की नींव रखी। कम नुकसान (लो-लॉस) वाले ऑप्टिकल फाइबर के विकास ने संचार के क्षेत्र में क्रांति ला दी। अपनी भारी डेटा ले जाने की क्षमता के कारण, इन्होंने वैश्विक कनेक्टिविटी और वीडियो संचार को संभव बनाया है। चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी द्वारा 'डॉ. नरिंदर सिंह कपानी रिसर्च चेयर' की स्थापना एक सराहनीय पहल है, जो उनके वैज्ञानिक योगदान को आगे बढ़ाएगी और शोधकर्ताओं की आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगी। यह सम्मान विज्ञान के क्षेत्र में डॉ. कपानी के असाधारण योगदान के प्रति एक श्रद्धांजलि भी है।"

चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर डॉ. सतबीर सिंह सहगल ने कहा, "डॉ. नरिंदर सिंह कपानी ने ऑप्टिकल फाइबर तकनीक में अपने अग्रणी शोध के ज़रिए भारत और पंजाब को बहुत गौरवान्वित किया। इसी तकनीक की बदौलत हाई-स्पीड इंटरनेट और आधुनिक डिजिटल संचार संभव हो पाया है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर और निर्बाध ग्लोबल कनेक्टिविटी जैसी तकनीकें, ऑप्टिकल फाइबर तकनीक की नींव पर ही टिकी हैं। उनके योगदान ने मानवता को डिजिटल युग में प्रवेश करने में मदद की और दुनिया भर में तकनीकी प्रगति को तेज़ किया। भारत की पहली 'डॉ. नरिंदर सिंह कपानी रिसर्च चेयर' की स्थापना तथा इसके तहत मिलने वाली सालाना ग्रांट और प्रतिष्ठित पुरस्कार, चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की उस प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं जिसका उद्देश्य उनके वैज्ञानिक योगदान को आगे बढ़ाने, उत्कृष्टता को सम्मान और भारतीय शोधकर्ताओं की अगली पीढ़ी को प्रेरित करना है।"इसके तहत यूनिवर्सिटी हर साल 1 करोड़ रुपये की रिसर्च ग्रांट देगी। इसके तहत 'नरिंदर सिंह कपानी अवार्ड फॉर एक्सीलेंस इन फिजिक्स', 'सीयू फिजिक्स एक्सीलेंस अवार्ड फॉर बेस्ट रिसर्च पब्लिकेशन'’ तथा 'सीयू फिजिक्स एक्सीलेंस अवार्ड फॉर बेस्ट पेटेंट’ जैसे तीन विशेष पुरस्कार दिए जाएंगे।
इन पुरस्कारों का पहला संस्करण जन्म शताब्दी समारोह के दौरान प्रदान किया गया, जिसमें आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर एमेरिटस और प्रख्यात शोधकर्ता डॉ. अजय घटक को फिजिक्स के क्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए 'नरेंद्र सिंह कपानी लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड' से सम्मानित किया गया। प्रोफेसर अजय के. घटक एक अंतरराष्ट्रीय स्तरीय प्रशंसित भौतिक विज्ञानी जिन्होंने फाइबर ऑप्टिक्स, इंटीग्रेटेड ऑप्टिक्स और फोटोनिक्स में प्रकाश की समझ और इसके अनुप्रयोगों को आगे बढ़ाने में मदद की है। रिसर्च, प्रभावशाली पुब्लिकेशन्स और पाठ्यपुस्तकों के माध्यम से, प्रोफेसर घटक ने फाइबर ऑप्टिक्स और फोटोनिक्स के क्षेत्र तथा डॉ. नरेंद्र सिंह कपानी की वैज्ञानिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए कई पीढ़ियों को प्रेरित किया।
इस अवसर पर डॉ. रितु गुप्ता और डॉ. संदीप कौर को 'पैरेलल एफएसओ- वीएलसी कम्युनिकेशन और नैनो-बायोसिंगनल मॉनिटरिंग के लिए मल्टी-फंक्शनल ऑप्टिकल एंटीना सिस्टम'; शोनक बंसल और अनुपमा को 'नैनोवायर फोटोडिटेक्टर का उपयोग करके सेल्फ-पावर्ड रियल-टाइम हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम'; आदित्य भटनागर और डॉ. संजीव सैनी को 'मल्टीफंक्शनल ऑर्गेनिक-इनऑर्गेनिक हाइब्रिड ल्यूमिनसेंट नैनोमटेरियल और इसे बनाने की विधि'; महिमा पुरोहित और डॉ. रुचि भारती को 'फ्लोरोसेंस-आधारित खाद्य खराब होने का पता लगाने के लिए बायोडिग्रेडेबल, वाटर-रेसिस्टेंट स्मार्ट पैकेजिंग फिल्म' तथा अशित त्रिपाठी, सचितानंद सिंह, इकरा जमाल खान, संस्कृति सिंह, आलोक गौतम, महक को 'हैंडहेल्ड वायरलेस ओसीटी और फंडस इमेजिंग डिवाइस' के लिए 'सीयू फिजिक्स एक्सीलेंस अवार्ड फॉर बेस्ट पेटेंट' प्रदान किए गए।
'सीयू फिजिक्स एक्सीलेंस अवार्ड्स फॉर बेस्ट रिसर्च पब्लिकेशन' से सम्मानित होने वाले विजेताओं में फिजिक्स डिपार्टमेंट के रविकांत शामिल है जिन्हे 'कंपोजिट्स कम्युनिकेशंस' में प्रकाशित उनके रिसर्च पेपर "रिड्यूस्ड ग्राफीन ऑक्साइड (rGO) आधारित नैनोकंपोजिट्स के डाइइलेक्ट्रिक गुणों को बेहतर बनाने के लिए नाइट्रोजन-डोप्ड जिंक ऑक्साइड" के लिए सम्मानित किया गया। उनके अलावा, अन्य पुरस्कार विजेताओं में शिवानी सिंगला (फिजिक्स डिपार्टमेंट) को - 'सिरामिक्स इंटरनेशनल (क्यू 1)' में प्रकाशित शोध "ऑप्टिमाइजिंग द नियोडिमियम कंसंट्रेशन इन सोडियम बोरेट ग्लास फॉर एनहांस्ड फोटोल्यूमिनिसेंट एंड मैकेनिकल बिहेवियर" के लिए; सुमित भारद्वाज (फिजिक्स डिपार्टमेंट) को 'सिरामिक्स इंटरनेशनल (क्यू 1)' में "स्ट्रक्चरल, ऑप्टिकल एंड फोटोकैटलिटिक प्रॉपर्टीज ऑफ सीई -डोप्ड एनआई-ज़े एन फेराइट नैनोपार्टिकल्स" के लिए; रूबी प्रिया (फिजिक्स डिपार्टमेंट) को 'मटेरियल्स टुडे कम्युनिकेशंस (क्यू 1)' में प्रकाशित शोध "डिकनवोल्यूटिंग कैपेसिटिव एंड डिफ्यूसिव कंट्रीब्यूशन्स इन Cu-डोप्ड SnO₂ नैनोपार्टिकल्स फॉर एनहांस्ड डबल-लेयर कैपेसिटेंस एंड ऑक्सीजन इवोल्यूशन रिएक्शन" के लिए; अखिल सक्सेना (रसायन विज्ञान) - 'साउथ अफ्रीकन जर्नल ऑफ केमिकल इंजीनियरिंग' में प्रकाशित शोध "मैकेनिस्टिक इलुसिडेशन ऑफ पर्सिकारिया मैकुलोसा ग्रे एक्सट्रैक्ट एज ए कोरोजन इनहिबिटर: एडसॉर्प्शन, इलेक्ट्रोकेमिकल बिहेवियर, एंड DFT वैलिडेशन" के लिए; हरविंदर सिंह सोहल (रसायन विज्ञान विभाग) - 'इंटरनेशनल जर्नल ऑफ बायोलॉजिकल मैक्रोमोलेक्यूल्स (क्यू 1)' में प्रकाशित शोध "सिनर्जिस्टिक एडसॉर्प्टिव-फोटोकैटलिटिक डिग्रेडेशन ऑफ टार्ट्राजीन यूजिंग Mn-मॉडिफाइड Fe₃O₄/लिग्नोसेलुलोज मैग्नेटिक नैनोकंपोजिट्स" के लिए; सुरजीत चहल - 'जर्नल ऑफ मैटेरियल्स साइंस: मैटेरियल्स इन इलेक्ट्रॉनिक्स (क्यू 2)' में प्रकाशित शोध "सरफेस प्लास्मोन रेजोनेंस सेंसर फॉर डोपामाइन डिटेक्शन बेस्ड ऑन CeO₂ नैनोरोड एंड ZnO नैनोशीट" के लिए; और भौतिकी विभाग के डॉ. संजीव कुमार - 'जर्नल ऑफ एनवायर्नमेंटल केमिकल इंजीनियरिंग (क्यू 1)' में प्रकाशित शोध "1 मोनोलिनोलेओयलग्लीसेरोल एंड 3,4-डाइहाइड्रॉक्सीमंडेलिक एसिड्स-मीडिएटेड ZnO फॉर एंटीबायोटिक डिग्रेडेशन एंड एंटीकैंसर एक्टिविटी" शामिल हैं।
जन्मशताब्दी समारोह के दौरान, डॉ. नरिंदर कपानी की बेटी किरण कौर कपानी का एक संदेश भी पढ़कर सुनाया गया जिसमें उन्होंने कहा कि पंजाब के एक छोटे से शहर से निकलकर फाइबर ऑप्टिक्स के ज़रिए दुनिया को बदलने तक का उनके पिता का सफ़र दर्शाता है कोई बड़ा विचार कहीं से भी शुरू हो सकता है। हमेशा जिज्ञासु बनें, सवाल पूछें और आप जो हैं, उस पर गर्व करें। मेरे पिता और परिवार को सम्मानित करने के लिए मैं चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी का तहे दिल से शुक्रिया अदा करती हूँ।
'बेस्ट पेटेंट एक्सीलेंस अवार्ड' के तहत, हर साल दिए गए पाँच बेहतरीन पेटेंट्स को रिसर्च ग्रांट (अनुसंधान अनुदान) के लिए चुना जाएगा। इसका उद्देश्य प्रोडक्ट डेवलपमेंट में मदद करना और पेटेंट किए गए नवाचारों को व्यावहारिक उपयोग में बदलना है। इसी तरह, 'बेस्ट रिसर्च पेपर अवार्ड' के ज़रिए चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के छात्रों और फैकल्टी सदस्यों द्वारा हर साल प्रकाशित किए गए शीर्ष 10 रिसर्च पेपर्स को सम्मानित किया जाएगा। इनका चयन उनकी गुणवत्ता, मौलिकता और रिसर्च के प्रभाव के आधार पर किया जाएगा।
