दिल्ली में प्रदूषण पर लगाम लगाने की तैयारी, 1 नवंबर से लागू होगा विंटर एक्शन प्लान
punjabkesari.in Tuesday, Oct 20, 2026 - 06:10 PM (IST)
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली सरकार ने विंटर एक्शन प्लान तैयार किया है। यह योजना 1 नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक लागू रहेगी। इसके तहत वाहनों से होने वाले प्रदूषण, निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल और सड़कों पर बढ़ते यातायात को नियंत्रित करने के लिए कई कदम उठाए जाएंगे। सरकार का लक्ष्य वायु गुणवत्ता में सुधार करना और लोगों को स्वच्छ हवा उपलब्ध कराना है।
पीयूसी प्रमाणपत्र के बिना नहीं मिलेगा ईंधन
विंटर एक्शन प्लान के तहत 'नो पीयूसी, नो फ्यूल' नीति को सख्ती से लागू करने का प्रस्ताव है। इसके अनुसार, वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसी) के बिना वाहनों को ईंधन नहीं देने का प्रावधान होगा। इसके अलावा, बीएस-6 उत्सर्जन मानकों से नीचे के बाहरी वाहनों के दिल्ली में प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। निर्माण स्थलों पर धूल से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए निगरानी बढ़ाई जाएगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों की पहचान करने और कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित कैमरों का इस्तेमाल भी किया जाएगा।
वर्क फ्रॉम होम को दिया जाएगा बढ़ावा
प्रदूषण कम करने के लिए सरकार ने कर्मचारियों के घर से काम करने की व्यवस्था को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। इसके तहत 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम को प्रोत्साहित करने की योजना है। इससे सड़कों पर निजी वाहनों की संख्या कम करने और यातायात का दबाव घटाने में मदद मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही सार्वजनिक परिवहन को अधिक सुविधाजनक बनाने पर भी ध्यान दिया जाएगा। बस और मेट्रो सेवाओं को मजबूत करने के प्रयास किए जाएंगे, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें।
लास्ट-माइल कनेक्टिविटी पर भी जोर
योजना में लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने पर भी ध्यान दिया गया है। इसका उद्देश्य लोगों को उनके घरों और गंतव्य से बस स्टॉप तथा मेट्रो स्टेशनों तक आसानी से पहुंचने की सुविधा देना है। इससे निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए कई स्तरों पर तैयारी
दिल्ली में सर्दियों के दौरान हवा की गुणवत्ता अक्सर खराब हो जाती है। ऐसे में सरकार की इस योजना के तहत वाहनों से निकलने वाले धुएं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और यातायात से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए कदम उठाए जाएंगे। योजना की सफलता प्रभावी निगरानी, नियमों के पालन और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर निर्भर करेगी।
