भ्रष्टाचार या चूहों का आतंक? आखिर 7 करोड़ का धान दीमक कैसे खा गए, सामने आया हैरान करने वाला मामला
punjabkesari.in Thursday, Jan 08, 2026 - 11:24 AM (IST)
नेशनल डेस्क: छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले से सामने आया धान घोटाले जैसा मामला न केवल चौंकाता है, बल्कि सरकारी दावों की विश्वसनीयता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। जिले के धान संग्रहण केंद्रों से करीब 7 करोड़ रुपये मूल्य का धान गायब बताया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह धान न तो चोरी हुआ और न ही बेचा गया, बल्कि चूहे, दीमक और कीड़ों की भेंट चढ़ गया।
चूहों के खाते में 26 हजार क्विंटल धान?
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2024–25 में समर्थन मूल्य पर खरीदे गए लगभग 7 लाख 99 हजार क्विंटल धान में से 26 हजार क्विंटल धान की कमी पाई गई है। यह कमी कवर्धा जिले के बाज़ार चारभाठा और बघर्रा संग्रहण केंद्रों में सामने आई। सबसे ज्यादा चौंकाने वाला मामला बाज़ार चारभाठा केंद्र का है, जहाँ से 22 हजार क्विंटल धान गायब पाया गया। इस धान की अनुमानित कीमत करीब 7 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
अधिकारियों की सफाई: मौसम और कीट जिम्मेदार
मामले पर जिला विपणन अधिकारी अभिषेक मिश्रा का कहना है कि धान की कमी मौसम के प्रभाव और चूहों, दीमक व अन्य कीड़ों द्वारा नुकसान के कारण हुई है। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि प्रदेश के अन्य जिलों की तुलना में कवर्धा की स्थिति बेहतर है और राज्य के कई संग्रहण केंद्रों में हालात इससे भी खराब हैं। यह बयान प्रशासन की जिम्मेदारी से बचने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि हालात बेहतर हैं, तो इतनी बड़ी मात्रा में धान आखिर नष्ट कैसे हो गया?
फर्जी बिल और रिकॉर्ड से छेड़छाड़ का आरोप
धान को चूहों और दीमक द्वारा खाए जाने की दलील के बीच एक और गंभीर तथ्य सामने आया है। बाज़ार चारभाठा संग्रहण केंद्र के प्रभारी पर फर्जीवाड़े के आरोप दर्ज किए गए हैं।
आरोप है कि प्रभारी ने—
दूसरे केंद्रों पर अधिकारियों ने बनवाएं फर्जी बिल
कवर्धा में जहां धान के चूहे और दीमक के खाए जाने की बात कही जा रही है। वहीं दूसरे संग्रहण केंद्र बाजार चारभाठा के प्रभारी पर फर्जी आवक-जावक दिखाने के लिए डैमेज धान खरीदी के फर्जी बिल बनाने, मजदूरों की फर्जी हाजिरी लगाने और CCTV कैमरों से छेड़छाड़ जैसे गंभीर आरोप दर्ज कराए गए हैं। प्रारंभिक जांच में शिकायत सही पाए जाने की बात भी सामने आई है और उन्हें हटा भी दिया गया है।
जबकि विभाग के आदेश अनुसार 2 प्रतिशत धान कम पाया गया तो पहले निलंबन कर जांच किया जाना है और फिर एफआईआर कराना है। अब सवाल यह खड़ा होता है कि अगर धान चूहे-दीमक ने खाया, तो फिर फर्जी बिल किसने बनाए? फर्जी एंट्री किसने की? CCTV से छेड़छाड़ किसने की? और यदि सब कुछ ठीक था तो कर्मचारी को हटाया क्यो गया।
