कांग्रेस ने बढ़ते प्रदूषण को लेकर सरकार पर साधा निशाना, NAAQS की समीक्षा पर दिया जोर

punjabkesari.in Sunday, Mar 08, 2026 - 03:20 PM (IST)

नेशनल डेस्क: कांग्रेस ने बढ़ते प्रदूषण पर चिंता व्यक्त करते हुए 2009 के 'नेशनल एम्बिएंट एयर क्वालिटी स्टैंडर्ड्स' (NAAQS) की तत्काल समीक्षा और उन्नयन किए जाने की रविवार को मांग की और जोर देकर कहा कि इन्हें अधिक प्रभावी तरीके से लागू करना चाहिए। कांग्रेस के संचार मामलों के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर तंज कसते हुए कहा, "पीएम 56 इंच का पर्दाफाश हो गया है, पीएम 2.5 अब सच है।"
 

रमेश ने 'एक्स' पर लिखा, "पीएम2.5, यानी 2.5 माइक्रोमीटर या उससे कम व्यास वाला कण पदार्थ पूरे देश में गंभीर पर्यावरण-स्वास्थ्य संकट का कारण बन चुका है।'' उन्होंने दिसंबर 2024 में 'द लैंसेट प्लेनेटरी हेल्थ' में प्रकाशित एक अध्ययन का हवाला दिया, जिसमें 2009-2019 के बीच 655 जिलों के आंकड़ों के आधार पर यह पाया गया कि पीएम2.5 सांद्रता में हर 10 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के इजाफे से मृत्युदर में 8.6 प्रतिशत की वृद्धि होती है।

उन्होंने कहा कि 2025 के 'लैंसेट काउंटडाउन' के अनुमान के अनुसार, हर साल लगभग 17.2 लाख भारतीयों की पीएम 2.5 के संपर्क में आने से मौत हो जाती है, जो 2010 की तुलना में 38 प्रतिशत अधिक है। रमेश ने यह भी कहा कि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 2024, 2025 और 2026 में संसद को यह बताया था कि वायु प्रदूषण के कारण होने वाली मौतों का कोई सटीक आंकड़ा प्राप्त नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि ऊर्जा और स्वच्छ वायु अनुसंधान केंद्र (CREA) ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा संचालित परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों से प्राप्त आंकड़ों का विस्तृत विश्लेषण किया है और इस विश्लेषण के अनुसार, 238 में से कोई भी शहर डब्ल्यूएचओ के पीएम2.5 के सुरक्षित मानकों का पालन नहीं कर रहा है।

कांग्रेस महासचिव ने कहा, "238 में से 204 शहरों में पीएम2.5 सांद्रता 2009 में एनएएक्यूएस द्वारा निर्धारित स्तरों से ऊपर है। इसके बाद, डब्ल्यूएचओ ने सितंबर 2021 में अपने अद्यतन सुरक्षित मानक की घोषणा की।" उन्होंने कहा, " 'नेशनल एम्बिएंट एयर क्वालिटी स्टैंडर्ड्स, 2009' की तत्काल समीक्षा और उन्नयन की आवश्यकता है। इन्हें हर जगह प्रभावी ढंग से लागू करने के बाद निगरानी की जानी चाहिए। इसके अलावा, एनसीएपी को खुद पीएम2.5 पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित करना चाहिए।" 

 


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Content Editor

Mansa Devi

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