कांग्रेस–शशि थरूर के रिश्तों में बढ़ी खटास? अहम बैठक से फिर रहे नदारद, सियासी अटकलें तेज
punjabkesari.in Tuesday, Jan 27, 2026 - 08:16 PM (IST)
नेशनल डेस्क: कांग्रेस पार्टी के भीतर अंदरूनी मतभेदों की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है। वजह बनी है वरिष्ठ सांसद शशि थरूर की एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बैठक से अनुपस्थिति, जो संसद के बजट सत्र से पहले पार्टी की रणनीति तय करने के लिए बुलाई गई थी। यह बैठक कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के दिल्ली स्थित आवास पर आयोजित हुई, जिसमें पार्टी के लगभग सभी प्रमुख नेता मौजूद रहे, लेकिन शशि थरूर इसमें शामिल नहीं हुए।
नेतृत्व मौजूद, थरूर रहे दूर
इस अहम बैठक में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल, जयराम रमेश, पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। ऐसे में थरूर की गैरमौजूदगी ने पार्टी के भीतर चल रही असहजता की अटकलों को और हवा दे दी।
यात्रा का हवाला, लेकिन सवाल कायम
शशि थरूर ने अपनी अनुपस्थिति को लेकर सफाई देते हुए कहा कि वे उस समय दुबई से दिल्ली की फ्लाइट में थे और शाम करीब 8 बजे दिल्ली पहुंचने वाले थे। उनके अनुसार, इस बारे में पार्टी कार्यालय को पहले ही सूचित कर दिया गया था। हालांकि, कांग्रेस के अंदरूनी हलकों में इस दलील को लेकर संदेह जताया जा रहा है, क्योंकि बीते कुछ समय में थरूर कई अहम बैठकों से इसी तरह दूरी बनाए हुए नजर आए हैं।
क्या गहराते जा रहे हैं मतभेद?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बार-बार की गैरहाजिरी महज संयोग नहीं हो सकती। खासकर ऐसे वक्त में, जब बजट सत्र के दौरान विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी में जुटा है, तब एक वरिष्ठ और मुखर नेता की अनुपस्थिति कई सवाल खड़े करती है। पिछले कुछ महीनों से यह चर्चा चल रही है कि शशि थरूर और कांग्रेस हाईकमान के बीच तालमेल सहज नहीं है। माना जा रहा है कि पार्टी के भीतर अपनी भूमिका और विचारों को लेकर थरूर असंतुष्ट हैं और कई मुद्दों पर उनकी राय पार्टी की आधिकारिक लाइन से अलग रही है।
केरल की राजनीति पर भी असर?
थरूर की यह दूरी सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं मानी जा रही। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि इसका असर आने वाले केरल विधानसभा चुनावों की रणनीति पर पड़ सकता है। हालांकि, थरूर ने सार्वजनिक रूप से पार्टी छोड़ने या अलग राह अपनाने को लेकर कोई बयान नहीं दिया है। उनके करीबी सूत्रों का कहना है कि वे कांग्रेस के साथ जुड़े रहना चाहते हैं, लेकिन आंतरिक संवाद और संतुलन की जरूरत महसूस कर रहे हैं।
आगे क्या संकेत देती है यह स्थिति
फिलहाल, शशि थरूर की लगातार बैठकों से गैरमौजूदगी कांग्रेस की एकजुटता पर सवाल खड़े कर रही है। बजट सत्र और आगामी राजनीतिक चुनौतियों के बीच यह देखना अहम होगा कि पार्टी नेतृत्व और थरूर के बीच संवाद की स्थिति कैसे आगे बढ़ती है।
