जनता को गुमराह कर रही कांग्रेस और बीआरएस- SIR संवैधानिक प्रक्रिया: एन रामचंदर राव
punjabkesari.in Monday, Jun 15, 2026 - 04:09 PM (IST)
नेशनल डेस्क: तेलंगाना भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष एन रामचंदर राव ने कांग्रेस और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) पर मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया है। राव ने सोमवार को नामपल्ली के राज्य कार्यालय में संवाददाताओं से बात करते हुए कहा कि एसआईआर न तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुरू की थी और न ही भाजपा।
उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने पहले भी 12 बार यह प्रक्रिया अपनायी है ताकि मृत लोगों, घर बदलने वालों और दूसरी गलत एंट्री के नाम हटाए जा सकें तथा मतदाता सूची में जरूरी सुधार भी किए जा सकें। उन्होंने एसआईआर को एक संवैधानिक प्रक्रिया बताते हुए सवाल किया कि कांग्रेस और बीआरएस अब इस प्रक्रिया का विरोध क्यों कर रहे हैं, जबकि कांग्रेस सरकारों के दौरान इसे बिना किसी एतराज के कई बार कराया गया था। राव ने उच्चतम न्यायालय द्वारा एसआईआर प्रक्रिया की कानूनी मान्यता को सही ठहराने की बात कही और चुनाव कानूनों के अनुसार मतदाता सूची से अयोग्य नामों को हटाने के लिए चुनाव आयोग के अधिकार की पुष्टि की।
उन्होंने असली मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए निर्वाचक नामावली को साफ करने पर जोर दिया। राव ने बांग्लादेश, म्यांमार और पाकिस्तान से अवैध घुसपैठ पर चिंता जताते हुए दावा किया कि कुछ घुसपैठिए पहचान के दस्तावेज हासिल कर रहे थे और राजनीतिक समर्थन से मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज करा रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी ऐसी ही चिंताएं जताई गई थीं और दावा किया कि हैदराबाद में खासकर पुराने शहर के कुछ हिस्सों में, मतदाता पंजीकरण को लेकर भी शक है।
भाजपा नेता ने कांग्रेस के इतिहास को फर्जी मतदान को बढ़ावा देने वाला बताया और पार्टी द्वारा लगाए गए‘वोट चोरी'के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने 1975 में लगाये गये आपातकाल की चर्चा करते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों का हवाला देने के लिए कांग्रेस की भी आलोचना की। राव ने कहा कि चुनावी नतीजें इस तरह की एसआईआर कवायद से प्रभावित नहीं होते हैं और इन्हें जनता ही तय करती है। उन्होंने कहा कि चुनावी हार या जीत को एसआईआर की प्रक्रिया से जोडना लोकतंत्र का अपमान है।
