चीन का नया फरमान: तिब्बती बच्चों की मठों में एंट्री की बैन, छुट्टियों में भी नहीं मिलेगी दर्शन की अनुमति
punjabkesari.in Saturday, Feb 07, 2026 - 07:17 PM (IST)
Bejing: चीन ने तिब्बत में धार्मिक जीवन पर नियंत्रण और सख्त कर दिया है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, 18 साल से कम उम्र के बच्चों के मठों (मोनास्ट्री) में प्रवेश पर पूरी तरह रोक को अब सख्ती से लागू किया जा रहा है। यह जानकारी तिब्बती मामलों पर काम करने वाली वेबसाइट Phayul की रिपोर्ट में सामने आई है। मामला तब उजागर हुआ जब चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म WeChat पर एक वीडियो वायरल हुआ। वीडियो में तिब्बत के खाम क्षेत्र के एक मठ के प्रवेश द्वार पर नोटिस लगा दिखा, जिसमें साफ लिखा था-“18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को मठ में प्रवेश की अनुमति नहीं है।”
यह सख्ती ऐसे समय में बढ़ाई गई है जब तिब्बती इलाकों में जनवरी से फरवरी 2026 तक सर्दियों की छुट्टियां चल रही हैं। परंपरागत रूप से इस दौरान तिब्बती बच्चे अपने माता-पिता के साथ तीर्थयात्रा और मठ दर्शन के लिए जाते रहे हैं। लेकिन अब अधिकारियों ने छुट्टियों के समय भी बच्चों को, परिवार के साथ होने पर भी, मठों में जाने से रोक दिया है। तिब्बत वॉच के शोधकर्ता सोनम टोबग्याल का कहना है कि यह कदम तिब्बती संस्कृति को कमजोर करने की एक व्यवस्थित नीति का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में चीन ने तिब्बती बच्चों के लिए जबरन बोर्डिंग स्कूल, मठों में तिब्बती भाषा पढ़ाने पर रोक, और छुट्टियों में मठ जाने पर पाबंदी जैसे कदम उठाए हैं।
उनका कहना है कि ये नीतियां बच्चों को उनकी संस्कृति और धार्मिक जड़ों से काटने का प्रयास हैं। रिपोर्ट के अनुसार, चीन में तिब्बती बच्चों के स्कूल चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के यूनाइटेड फ्रंट वर्क डिपार्टमेंट की निगरानी में चलते हैं, जहां बच्चों को वैचारिक प्रशिक्षण दिया जाता है और चीनी भाषा व पहचान अपनाने के लिए दबाव बनाया जाता है। मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि इसका असर साफ दिखने लगा है। कई माता-पिता बताते हैं कि छुट्टियों में घर लौटने वाले बच्चे अब आपस में चीनी भाषा में बात करते हैं, मठों में जाने से डरते हैं और तिब्बती धार्मिक जीवन से दूरी महसूस करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल भाषा का नहीं, बल्कि पूरी तिब्बती पहचान के मिटने का खतरा है।
