Cheque Bounce Rules: चेक बाउंस पर जेल और दोगुना जुर्माना, जानें कानून क्या कहता है

punjabkesari.in Thursday, Feb 12, 2026 - 01:52 PM (IST)

नेशनल डेस्क: अक्सर लोग चेक काटते समय उसे महज एक कागज का टुकड़ा समझते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके खाते में कम बैलेंस या गलत हस्ताक्षर की वजह से अगर वह चेक रिजेक्ट हो गया, तो आप सीधे कानूनी पचड़े में फंस सकते हैं? भारत में चेक बाउंस होना कोई मामूली बात नहीं है, बल्कि 'Negotiable Instruments Act 1881' के तहत यह एक दंडनीय अपराध है।

अदालत की चौखट और जेल का डर 
अगर आपने किसी को चेक दिया और वह बैंक से वापस आ गया, तो सबसे पहले बैंक एक 'रिटर्न मेमो' जारी करता है। असली मुसीबत इसके बाद शुरू होती है। चेक पाने वाला व्यक्ति आपको 30 दिनों के अंदर कानूनी नोटिस भेज सकता है। यदि आपने नोटिस मिलने के 15 दिनों के भीतर पैसे का इंतजाम नहीं किया, तो मामला मजिस्ट्रेट की अदालत तक पहुंच जाएगा। कोर्ट में दोष सिद्ध होने पर आपको 2 साल तक की जेल काटनी पड़ सकती है। इतना ही नहीं, जज साहब आप पर चेक की रकम का दोगुना जुर्माना भी ठोक सकते हैं। यानी 5 लाख का चेक बाउंस हुआ, तो 10 लाख भरने पड़ सकते हैं।

बैंकों की 'ब्लैक लिस्ट' में आ सकता है नाम 
सजा और जुर्माने के अलावा भी इसके कई ऐसे नुकसान हैं जो आपकी आर्थिक कमर तोड़ सकते हैं। सबसे बड़ा प्रहार आपके सिबिल (CIBIL) स्कोर पर पड़ता है। एक बार क्रेडिट स्कोर खराब हुआ, तो भविष्य में किसी भी बैंक से होम लोन या कार लोन लेना सपना बन जाएगा। बार-बार ऐसी गलती करने पर बैंक आपका खाता बंद कर सकता है और आपको नई चेकबुक देने से भी इनकार कर सकता है।

मुसीबत से बचने का 'गोल्डन रूल' 
कानूनी कार्रवाई से बचने का सबसे सरल तरीका यह है कि जैसे ही आपको चेक बाउंस होने की खबर मिले, तुरंत सामने वाले पक्ष से संपर्क करें और 15 दिनों की मियाद खत्म होने से पहले भुगतान कर दें। चेक जारी करने से पहले हमेशा अपना बैंक बैलेंस चेक करें और हस्ताक्षर वही करें जो बैंक के रिकॉर्ड में मौजूद हों।  


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Content Editor

Anu Malhotra

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