कर्नाटक के लोगों को लड़खड़ाते हुए नहीं छोड़ा जा सकता: उच्चतम न्यायालय

5/7/2021 7:30:53 PM

नेशनल डेस्क: उच्चतम न्यायालय ने केंद्र को कोविड-19 मरीजों के इलाज के वास्ते राज्य के लिए ऑक्सीजन का आवंटन 965 मीट्रिक टन से बढ़ाकर 1200 मीट्रिक टन करने का निर्देश देने वाले कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेश में शुक्रवार को हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। न्यायालय ने कहा कि कर्नाटक के लोगों को लड़खड़ाते हुए नहीं छोड़ा जा सकता है।

न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एम आर शाह की पीठ ने कहा कि पांच मई का उच्च न्यायालय का आदेश जांचा-परखा और शक्ति का विवेकपूर्ण प्रयोग करते हुए दिया गया है। पीठ ने साथ ही कहा कि इस आदेश में केंद्र और राज्य सरकार के बीच परस्पर समाधान को रोका नहीं गया है। शीर्ष अदालत ने कहा, ‘‘उच्च न्यायालय का आदेश राज्य सरकार द्वारा अनुमानित जरूरत को तब तक बनाये रखने की जरूरत पर आधारित है जब तक प्रतिवेदन पर कोई निर्णय नहीं ले लिया जाता और उच्च न्यायालय को अवगत नहीं कराया जाता है।’’ पीठ ने कहा, ‘‘इसलिए, जिन व्यापक मुद्दों को उठाने का अनुरोध किया गया है उन पर गौर किये बिना विशेष अनुमति याचिका की सुनवायी करने का कोई मतलब नहीं है। विशेष अनुमति याचिका का निस्तारण किया जाता है।’’ पीठ ने कहा कि वह व्यापक मुद्दे पर गौर कर रही है और ‘’‘हम कर्नाटक के नागरिकों को अधर में नहीं छोड़ेंगे।’’

शीर्ष अदालत ने केंद्र की उस दलील को स्वीकार करने से इनकार कर दिया कि अगर प्रत्येक उच्च न्यायालय ऑक्सीजन आवंटन करने के लिए आदेश पारित करने लगा तो इससे देश के आपूर्ति नेटवर्क के लिए परेशानी खड़ी हो जाएगी। पीठ ने केंद्र सरकार की तरफ से पेश हुए सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि उसने घटनाक्रम का अध्ययन किया है और वह कह सकती है कि यह ‘‘कोविड-19 के मामलों की संख्या को संज्ञान में लेने के बाद पूरी तरह से परखा हुआ, विचार किया हुआ और शक्ति का विवेकपूर्ण प्रयोग करते हुए लिया गया फैसला है। हम इसमें हस्तक्षेप नहीं करेंगे।’’

पीठ ने कहा, ‘‘30 अप्रैल, 2021 से पहले कर्नाटक राज्य के लिए आवंटन 802 मीट्रिक टन था और एक मई, 2021 से बढ़ाकर 856 मीट्रिक टन और 5 मई, 2021 से 965 मीट्रिक टन हो गया। राज्य सरकार द्वारा 5 मई, 2021 को अनुमानित न्यूनतम जरूरत 1162 मीट्रिक टन बतायी गई थी।’’

 


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Content Editor

Hitesh

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