मेडिकल साइंस का अद्भुत चमत्कार: मृत महिला के दान किए गए गर्भाशय से जन्मा बच्चा
punjabkesari.in Wednesday, Feb 25, 2026 - 08:58 AM (IST)
इंटरनेशनल डेस्क: लंदन से Medical Science की एक ऐसी सुखद और हैरान कर देने वाली खबर सामने आई है, जिसने मातृत्व की आस छोड़ चुकी हजारों महिलाओं के लिए उम्मीद की नई मशाल जला दी है। ब्रिटेन के इतिहास में पहली बार डॉक्टरों ने एक मृत महिला द्वारा दान किए गए गर्भाशय (Uterus) के सफल प्रत्यारोपण के जरिए एक स्वस्थ बच्चे का प्रसव कराया है। यह करिश्मा 30 वर्षीय ग्रेस बेल के जीवन में खुशियां लेकर आया है, जिन्हें महज 16 साल की उम्र में यह कह दिया गया था कि वह कभी मां नहीं बन पाएंगी।
16 साल की उम्र में टूटा था सपना, अब गोद में है 'चमत्कार'
ग्रेस बेल एमआरकेएच (MRKH) सिंड्रोम नाम की एक दुर्लभ जन्मजात बीमारी से पीड़ित थीं। इस स्थिति में लड़कियों का जन्म या तो गर्भाशय के बिना होता है या उनका गर्भाशय बहुत छोटा और अविकसित होता है। ग्रेस के पास मां बनने के लिए केवल सरोगेसी या बेहद जटिल गर्भाशय प्रत्यारोपण का ही विकल्प बचा था।
History made in UK medicine.
— We Amplify! (@Amplifiers01) February 24, 2026
A baby boy named Hugo is the first child in the country born via a womb transplant from a deceased donor. His mother, Grace Bell, was born with MRKH and told at 16 she'd never carry a child. Truly the "gift of life" in action. ❤️… pic.twitter.com/TvTCIjvpma
वैज्ञानिकों की वर्षों की मेहनत तब सफल हुई जब क्रिसमस से ठीक पहले ग्रेस ने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया, जिसका वजन जन्म के समय लगभग 7 पाउंड था। ग्रेस ने अपने बेटे का नाम ह्यूगो रखा है, जो अब 10 सप्ताह का हो चुका है। भावुक ग्रेस ने अपने बेटे को "सचमुच एक चमत्कार" करार दिया है।
क्या है MRKH सिंड्रोम?
यह एक ऐसी स्थिति है जो ब्रिटेन में लगभग 5,000 महिलाओं को प्रभावित करती है। इसमें शरीर का बाहरी विकास सामान्य होता है, लेकिन आंतरिक रूप से गर्भाशय और कभी-कभी योनि पूरी तरह विकसित नहीं हो पाती। चूंकि पीड़ित महिला के अंडाशय (Ovaries) सही तरीके से काम करते हैं, इसलिए आईवीएफ (IVF) और ट्रांसप्लांट के जरिए गर्भधारण की संभावना बनी रहती है। अक्सर पीरियड्स न आने पर 14 से 16 साल की उम्र में इस बीमारी का पता चलता है।
Meet Grace, Steve and their baby boy Hugo. 👋🏼
— Imperial NHS 💙 (@ImperialNHS) February 24, 2026
Grace is the second woman in the UK to give birth following a womb transplant - and the first from a deceased donor, thanks to a pioneering research programme. ➡️ https://t.co/3eotvF8LW1
Huge congratulations to everyone involved! pic.twitter.com/QNzaM7CN4N
10 घंटे की सर्जरी और IVF का साथ
ग्रेस के मां बनने का सफर किसी रोमांचक फिल्म से कम नहीं था। जून 2024 में ऑक्सफोर्ड के चर्चिल अस्पताल में 10 घंटे तक चली एक मैराथन सर्जरी के दौरान एक मृत महिला का गर्भाशय ग्रेस के शरीर में प्रत्यारोपित किया गया। यह पूरी प्रक्रिया ब्रिटेन में चल रहे एक विशेष क्लीनिकल ट्रायल का हिस्सा थी।
सर्जरी की सफलता के बाद डॉक्टरों ने कई महीनों तक ग्रेस की निगरानी की और फिर आईवीएफ तकनीक से तैयार भ्रूण को नए गर्भाशय में रखा गया। डॉक्टरों का मानना है कि यह उपलब्धि न केवल तकनीकी रूप से बड़ी जीत है, बल्कि उन हजारों महिलाओं के लिए एक वरदान है जो जन्मजात शारीरिक कमियों के कारण मातृत्व के सुख से वंचित रह जाती हैं।
