ब्रिक्स को पारदर्शी व्यापार, निवेश की व्यवस्थाएं सुनिश्चित करनी चाहिए : जयशंकर
punjabkesari.in Friday, Sep 11, 2026 - 08:08 PM (IST)
नई दिल्लीः विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को कहा कि ब्रिक्स देशों को व्यापार एवं निवेश संबंधी पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित कर आर्थिक चुनौतियों से निपटने की दिशा में काम करना चाहिए। जयशंकर ने 'ब्रिक्स बिजनेस फोरम' को संबोधित करते हुए भू-राजनीतिक उथल-पुथल का भी जिक्र किया और आपूर्ति शृंखला में आ रही बाधाओं से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन बाधाओं का दुनिया भर के देशों पर आर्थिक असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा, ''हम ऐसे समय में मिल रहे हैं जब वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था में बड़े बदलाव हो रहे हैं। अस्थिरता, अनिश्चितता और जटिलता हमारे आसपास की दुनिया की प्रमुख विशेषताएं बन गई हैं।''
जयशंकर ने कहा, ''हम भू-राजनीतिक संघर्षों, महामारी और जलवायु से जुड़ी बाधाओं के आर्थिक दुष्परिणाम देख रहे हैं।'' विदेश मंत्री ने आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए बाजार तक अधिक पहुंच और आपूर्ति शृंखला को अधिक मजबूत एवं लचीला बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ''इन सभी बातों का मूल उद्देश्य यह है कि हमारे देशों के कारोबारियों के लिए अधिक साझेदार तलाशना, अधिक बाजारों तक पहुंच बनाना, आपूर्ति नेटवर्क को जोड़ना और एक-दूसरे की क्षमताओं को व्यावहारिक कारोबारी साझेदारी में बदलना आसान बनाया जाए।''
जयशंकर ने कहा, ''खासकर ब्रिक्स देशों के लिए आर्थिक गतिविधियों और आर्थिक सुरक्षा में बढ़ोतरी का मतलब आत्मनिर्भरता मजबूत करना है। हमारा लक्ष्य यह है कि हम वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े और प्रतिस्पर्धी बने रहते हुए आर्थिक झटके सहने की अपनी क्षमता बढ़ाएं।'' उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में बाजार के वास्तविक सिद्धांतों के अनुरूप कारोबारी व्यवहार, भरोसेमंद सहायता, विविध व्यापारिक संबंध, पारदर्शी व्यापार और निवेश और ऐसे कारोबारी माहौल की आवश्यकता है जिसका पूर्वानुमान लगाया जा सके।
जयशंकर ने कहा कि लचीलापन ब्रिक्स समुदाय का एक प्रमुख घटक बन गया है। उन्होंने वास्तविक बाजार आधारित व्यवस्थाओं, भरोसेमंद रसद और विविध कारोबारी संबंधों के जरिए आपस में जुड़े और प्रतिस्पर्धी बने रहते हुए आत्मनिर्भरता बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), फिनटेक और उन्नत विनिर्माण को प्रमुख अवसरों के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने इन क्षेत्रों में पहुंच, मानकों, सुरक्षा और भरोसे से जुड़े सवालों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत की ब्रिक्स की अध्यक्षता में 'ब्रिक्स इनक्यूबेटर नेटवर्क' और 'ब्रिक्स स्टार्टअप इनोवेशन फंड' के माध्यम से नवाचार और उद्यमिता के पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के प्रयास किए गए हैं।
उन्होंने जोर दिया कि इसके लाभ सभी व्यापारिक समुदायों तक पहुंचने चाहिए। जयशंकर ने कहा कि भारत का अनुभव उसे एक स्वाभाविक साझेदार बनाता है। उन्होंने कहा कि भारत में बड़ा और लगातार बढ़ता बाजार, विस्तार करती विनिर्माण क्षमताएं, प्रतिभाओं का बढ़ता आधार, डिजिटल क्षेत्र में अनुभव तथा नवाचार और उद्यमिता का मजबूत एवं गतिशील आधार है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स के नेता जब बैठक की तैयारी कर रहे हैं, ऐसे में इस मंच का सबसे उपयोगी योगदान ब्रिक्स सहयोग के अगले चरण में व्यापार जगत का स्पष्ट दृष्टिकोण सामने रखना होगा। विदेश मंत्री ने कहा कि इसमें कारोबार के अवसरों, व्यवसायों के सामने आने वाली चुनौतियों और उनसे निपटने के लिए सरकारें क्या कदम उठा सकती हैं, पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए।
