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कुवैत लागू करने जा रहा ऐसा कानून, 8 लाख भारतीयों पर मंडराया संकट

2020-07-06T16:54:58.977

नेशनल डेस्कः कोरोना वायरस संकट के बीच कुवैत एक ऐसा कानून लागू करने जा रहा है जिससे वहां काम कर रहे भारतीयों पर बुरा असर पड़ेगा। गल्फ न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, कुवैत की नेशनल एसेंबली की कानूनी और विधायी समिति ने प्रवासी कोटा बिल के मसौदे को मंजूरी दे दी है जिससे 8 लाख भारतीय कामगारों को कुवैत छोड़ना पड़ सकता है। नेशनल एसेंबली की कानूनी और विधायी समिति ने तय किया है कि प्रवासी कोटा बिल का मसौदा संवैधानिक है। इस बिल के मुताबिक, प्रवासी भारतीयों (किसी भी एक देश के प्रवासियों की संख्या) की संख्या कुवैत की आबादी के 15 फीसदी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। अभी इस बिल को संबंधित समिति के पास विचार के लिए भेजा जाएगा। अब बिल पास हो जाता है तो करीब आठ लाख भारतीयों को कुवैत छोड़ना पड़ सकता है।

 

यहां के प्रवासी समुदाय में सबसे ज्यादा संख्या भारतीयों की है। कुवैत की कुल आबादी 43 लाख है जिसमें से 30 लाख प्रवासी हैं यानि कि कुल प्रवासियों में 14.5 लाख भारतीय हैं। बिल पास होने पर भारतीयों की संख्या 6.5-7 लाख तक सीमित कर दी जाएगी। वहीं भारत सरकार को रेमिटेंस के रूप में बड़ा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। कुवैत के प्रवासी भारतीयों से भारत को अच्छा खासा रेमिटेंस (वहां के प्रवासी जो पैसा अपने घर भेजते हैं) मिलता है। 2018 में कुवैत से भारत को 4.8 अरब डॉलर का रेमिटेंस हासिल हुआ था। यह कानून सिर्फ भारतीयों पर ही नहीं बल्कि सभी प्रवासियों पर लागू होगा।

 

कोरोना के कारण कुवैत की अर्थव्यवस्था काफी चरमरा गई है जिस कारण कई महीनों से कुवैत में प्रवासियों को लेकर बहस छिड़ी हुई थी। सांसद और सरकारी अधिकारी विदेशी नागरिकों की संख्या कम करने की मांग कर रहे थे। आखिरकार अब कुवैत सरकार प्रवासियों की संख्या घटाने पर विचार कर रहा है। हालांकि भारत सरकार की तरफ से अभी इस पर कोई बयान नहीं आया है।


Seema Sharma

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