मतदाता होना केवल संवैधानिक विशेषाधिकार नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण कर्तव्य है: प्रधानमंत्री मोदी

punjabkesari.in Sunday, Jan 25, 2026 - 11:09 AM (IST)

नेशनल डेस्क: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोगों से लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भाग लेने का आग्रह करते हुए रविवार को कहा कि मतदाता होना केवल संवैधानिक विशेषाधिकार नहीं, बल्कि एक ऐसा महत्वपूर्ण कर्तव्य है जो प्रत्येक नागरिक को भारत के भविष्य को आकार देने में अपना मत रखने का अधिकार देता है। राष्ट्रीय मतदाता दिवस पर ‘माय-भारत' के स्वयंसेवकों को लिखे एक पत्र में उन्होंने मतदाताओं को भारत की विकास यात्रा का भाग्य विधाता बताया। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘लोकतंत्र में मतदाता होना विशेषाधिकार के साथ-साथ एक बड़ी जिम्मेदारी भी है। मतदान एक संवैधानिक अधिकार है और भारत के भविष्य में उसके नागरिकों की भागीदारी का प्रतीक है।''

उन्होंने कहा, ‘‘मतदाता हमारी विकास यात्रा का भाग्य विधाता है। मतदान के अवसर पर उंगली पर लगने वाली अमिट स्याही बताती है कि हमारा लोकतंत्र बहुत जीवंत है और इसका उद्देश्य काफी बड़ा है।'' भारत में राष्ट्रीय मतदाता दिवस हर वर्ष 25 जनवरी को भारत निर्वाचन आयोग के स्थापना दिवस के अवसर पर मनाया जाता है। मोदी ने कहा, ‘‘आपके मित्रों या रिश्तेदारों में कई ऐसे युवा हो सकते हैं जो पहली बार मतदाता बन रहे हैं। उनके जीवन के लिए यह अत्यंत महत्वूपर्ण क्षण है। पहली बार मतदाता बनने वालों का लोकतंत्र में इसलिए भरपूर स्वागत होना चाहिए क्योंकि उनके पास देश के भाग्य को बदलने की क्षमता है।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘माय-भारत' के स्वयंसेवक उस पीढ़ी से है, जो किसी भी कार्य को समय के भरोसे नहीं छोड़ती बल्कि ‘कैन डू' (कर सकती हूं) की भावना से उन्हें साकार करके दिखाती है।

उन्होंने कहा, ‘‘आप मतदाता बनने के महत्व के बारे में जागरूकता फैला सकते हैं।'' उन्होंने लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को मजबूत करने के प्रयासों के लिए भारत निर्वाचन आयोग से जुड़े सभी लोगों की सराहना की। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘मतदाता होना केवल संवैधानिक विशेषाधिकार नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण कर्तव्य है, जो प्रत्येक नागरिक को भारत के भविष्य को आकार देने में अपना मत रखने का अधिकार देता है।'' उन्होंने कहा, ‘‘आइए, हमेशा लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भाग लेकर अपने लोकतंत्र की भावना का सम्मान करें और इस तरह विकसित भारत की नींव को मजबूत करें।'' उन्होंने कहा कि भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहा जाता है और साथ ही यह लोकतंत्र की जननी भी है, जिसके लोकतांत्रिक मूल्यों का इतिहास सदियों पुराना है।

प्रधानमंत्री ने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपने या आसपास के लोगों के पहली बार मतदाता बनने का जश्न मनाएं। उन्होंने कहा, ‘‘घर पर और अपनी रिहायशी सोसायटी में मिठाई बांटकर इसका जश्न मना सकते हैं। हमारे स्कूल और कॉलेज लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त बनाने में एक नर्सरी की तरह अहम भूमिका निभाते हैं।'' मोदी ने कहा, ‘‘मेरा आग्रह है कि वे अपने छात्रों के पहली बार मतदाता बनने के अहम पड़ाव का जश्न जरूर मनाएं। इसके लिए ऐसे समारोह आयोजित किए जा सकते हैं जहां नए मतदाता को सम्मानित किया जाए। इससे उन्हें यह अहसास होगा कि उनकी यह नयी जिम्मेदारी कितनी महत्वपूर्ण है।''

उन्होंने कहा कि लोगों की मतदान के लिए प्रतिबद्धता इतनी गहरी है कि चाहे वे हिमालय पर रहते हों, अंडमान और निकोबार के द्वीपों में हों, रेगिस्तान में या फिर घने जंगलों में हों, वे मतदान करके यह सुनिश्चित करते हैं कि उनकी आवाज जरूर सुनी जाए। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘लोकतांत्रिक आदर्शों के प्रति मतदाताओं की यह प्रतिबद्धता आने वाले समय के लिए भी बड़ी प्रेरणा होगी।'' मोदी ने कहा, ‘‘समावेशी लोकतंत्र के लिए हमारी नारी शक्ति, विशेषकर युवा महिलाओं की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनकी जागरूकता और सक्रिय हिस्सेदारी ने भारत के लोकतंत्र की नींव को और मजबूत किया है।'' 


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Content Editor

Mansa Devi

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