बांग्लादेश में कपड़ा मजदूरों का हिंसक प्रदर्शन; कारखानों में तोड़फोड़ और सड़कें जाम, पुलिस चौकियां फूंकीं (Video)
punjabkesari.in Sunday, Nov 01, 2026 - 04:57 PM (IST)
Dhaka: बांग्लादेश में कपड़ा उद्योग के मजदूरों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर शुरू हुआ प्रदर्शन रविवार को हिंसक हो गया। राजधानी ढाका के मीरपुर और गाजीपुर के कोनाबाड़ी औद्योगिक क्षेत्र में मजदूरों ने सड़कों पर उतरकर विरोध जताया। कई जगह पुलिस के साथ झड़प हुई और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया।प्रदर्शनकारियों ने कई कपड़ा कारखानों में तोड़फोड़ की और पुलिस चौकियों पर पत्थर बरसाए। कुछ जगह पुलिस वाहनों को आग के हवाले किए जाने की खबर है। प्रदर्शनकारियों ने प्रमुख सड़कों पर अवरोधक लगाकर यातायात भी रोक दिया। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस और कुछ स्थानों पर तेज आवाज वाले ग्रेनेड का इस्तेमाल किया। स्थिति बिगड़ने के बाद सरकार ने औद्योगिक क्षेत्रों में पुलिस के साथ सीमा रक्षक बल बांग्लादेश (बीजीबी) की टुकड़ियां भी तैनात कर दी हैं।
Violent confrontations have reportedly erupted between garment workers and police in Dhaka, leaving several people injured. The clashes have raised fresh concerns over worker protests and the escalating tensions on the streets of Bangladesh. #Bangladesh #Dhaka #BreakingNews https://t.co/vOFOV7rCSQ
— TiyariHaduk (@TiyariHaduk1) November 1, 2026
बांग्लादेश में कपड़ा मजदूरों का मौजूदा न्यूनतम मासिक वेतन 12,500 टका है। मजदूर इसे बढ़ाकर 30,000 टका करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि महंगाई और रोजमर्रा के खर्चों में बढ़ोतरी के बीच मौजूदा वेतन में गुजारा करना मुश्किल हो गया है। दरअसल, बांग्लादेश सरकार ने हाल ही में सरकारी कर्मचारियों के लिए नए वेतनमान की घोषणा की है। इसके तहत उनके वेतन और भत्तों में करीब दोगुनी बढ़ोतरी की बात कही गई है। इसके बाद कपड़ा मजदूर भी अपने वेतन में बड़ी वृद्धि की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर, कपड़ा कारखानों के मालिक मजदूरों की मांग पूरी करने में मुश्किलें बता रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें मिलने वाले नए ऑर्डर कम हुए हैं और तैयार कपड़ों की कीमतों में भी बढ़ोतरी नहीं हुई है। इसके अलावा कच्चे माल के आयात की लागत लगातार अधिक बनी हुई है। कारखाना मालिकों का तर्क है कि इन परिस्थितियों में मजदूरों का न्यूनतम वेतन एकमुश्त बढ़ाकर 30,000 टका करना उनके लिए मुश्किल है।
@grok what's going on in bangladesh?
— Rax (@Raxinsax) November 1, 2026
मजदूरों की मांगों पर विचार करने के लिए बांग्लादेश सरकार ने वेतन बोर्ड का गठन किया है। इस बोर्ड को कपड़ा उद्योग के कर्मचारियों के लिए नए वेतनमान तय करने की जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि, बोर्ड के गठन के बावजूद मजदूरों का विरोध थमा नहीं है और वे लगातार सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। गौरतलब है कि बांग्लादेश का कपड़ा उद्योग 1970 के दशक के आखिरी वर्षों और 1980 के दशक की शुरुआत में तेजी से विकसित हुआ। आज यह देश की अर्थव्यवस्था और निर्यात का सबसे बड़ा आधार बन चुका है। इस क्षेत्र से देश की कुल निर्यात आय का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आता है। कपड़ा उद्योग में करीब 40 लाख लोग सीधे काम करते हैं। इनमें महिलाओं की हिस्सेदारी लगभग 60 से 70 प्रतिशत है। ऐसे में मजदूरों का आंदोलन केवल वेतन विवाद नहीं, बल्कि बांग्लादेश के प्रमुख निर्यात उद्योग और उसकी अर्थव्यवस्था के लिए भी बड़ी चुनौती बन सकता है।
