बांग्लादेश में  हिंसक आंदोलन; सड़कों पर आगजनी-तोड़फोड़, संकट में तारिक रहमान सरकार

punjabkesari.in Monday, Nov 02, 2026 - 07:26 PM (IST)

Dhaka: बांग्लादेश में गारमेंट उद्योग के मजदूरों का प्रदर्शन लगातार हिंसक होता जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने राजमार्गों को जाम कर दिया और पुलिस की कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। सार्वजनिक संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचाया गया है। सोशल मीडिया पर पुलिस की गोली से 10 साल के बच्चे की मौत का दावा किया जा रहा है, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इस दावे को लेकर अभी सावधानी बरतने की जरूरत है। मजदूर वेतन बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। इस आंदोलन का असर देश के गारमेंट उद्योग पर पड़ रहा है, जो बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। देश के कुल निर्यात में कपड़ा उद्योग की हिस्सेदारी करीब 80 फीसदी है।

 

इस क्षेत्र में लगभग 40 लाख लोग काम करते हैं और जीडीपी में इसका योगदान करीब 10 फीसदी है। श्रम मंत्री आरिफुल हक चौधरी ने एक नवंबर को छह सदस्यीय न्यूनतम वेतन बोर्ड बनाने की घोषणा की थी। उन्होंने मजदूरों से काम पर लौटने की अपील भी की, लेकिन प्रदर्शन थमे नहीं हैं। गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने आरोप लगाया है कि शेख हसीना और सीमा पार बैठे कुछ लोग मजदूरों को उकसाकर देश में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसका मकसद गारमेंट उत्पादन और निर्यात को प्रभावित करना है।

 

श्रम मंत्री ने भी हिंसा के पीछे अवामी लीग समर्थकों का हाथ होने का आरोप लगाया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद से बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों से जूझ रही है। महंगाई बढ़ रही है और विकास की रफ्तार धीमी हुई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक ने भी देश की विकास दर को लेकर कमजोर अनुमान जताए हैं। ऐसे में गारमेंट उद्योग में लंबे समय तक जारी रहने वाला आंदोलन बांग्लादेश के निर्यात, रोजगार और अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर डाल सकता है।


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Content Writer

Tanuja

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