अजय आलोक का बड़ा बयान- ममता बनर्जी खुद को एक्सपोज कर रही हैं
punjabkesari.in Saturday, May 02, 2026 - 04:43 PM (IST)
नेशनल डेस्क: पश्चिम बंगाल चुनाव के नतीजों से पहले सियासी पारा सातवें आसमान पर है। मतगणना केंद्रों पर केंद्र सरकार के कर्मचारियों की तैनाती को लेकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भाजपा के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय आलोक ने टीएमसी की सुप्रीम कोर्ट में याचिका को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर कड़ा प्रहार किया है।
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अजय आलोक ने उठाए सवाल
ANI से बात करते हुए अजय आलोक ने कहा कि टीएमसी हर कदम पर अपनी हताशा दिखा रही है। उन्होंने सवाल उठाया, "हाई कोर्ट से झटका लगने के बाद वह सुप्रीम कोर्ट गईं। वह क्या सोच रही हैं? क्या वह पहले मतगणना में हेराफेरी करती थीं? वे हर कदम पर खुद को बेनकाब कर रही हैं।" अजय आलोक ने यहाँ तक अंदेशा जताया कि टीएमसी शायद मतगणना का बहिष्कार (Boycott) भी कर सकती है। उन्होंने कहा, "अगर वे ऐसा करते हैं, तो यह भारतीय राजनीति के इतिहास में पहली बार होगा और यह उनकी कमजोरी का सबसे बड़ा संकेत होगा।"

कपिल सिब्बल ने मीडिया की खबरों का किया खंडन
दूसरी ओर, टीएमसी की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने उन खबरों का खंडन किया जिनमें कहा जा रहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी की याचिका को खारिज कर दिया है। सिब्बल ने स्पष्ट किया कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग के सर्कुलर को चुनौती नहीं दी थी, बल्कि उसे पूरी तरह लागू करने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि सर्कुलर कहता है कि राज्य और केंद्र दोनों कर्मचारियों का डेटाबेस से रैंडम चयन होना चाहिए। हमारी मांग सिर्फ इतनी थी कि अगर आप केंद्र का कर्मचारी तैनात कर रहे हैं, तो राज्य सरकार का कर्मचारी भी तैनात करें। अदालत ने हमारी बात मानते हुए चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि सर्कुलर को उसके मूल अर्थ और भावना (Letter and Spirit) के साथ लागू किया जाए।
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क्या है असली विवाद
विवाद चुनाव आयोग के उस निर्देश पर है जिसमें हर काउंटिंग टेबल पर एक केंद्रीय या पीएसयू (PSU) कर्मचारी की मौजूदगी अनिवार्य की गई है। टीएमसी का तर्क है कि जब पहले से ही माइक्रो ऑब्जर्वर मौजूद हैं, तो अतिरिक्त केंद्रीय बल की जरूरत पारदर्शिता पर सवाल उठाती है।
