पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने से गाड़ी में खराबी की कोई समस्या सामने नहीं आई, संसद में बोले गडकरी

punjabkesari.in Thursday, Jul 23, 2026 - 09:28 PM (IST)

नेशनल डेस्कः सरकार ने बृहस्पतिवार को लोकसभा को बताया कि 'सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्यूफेक्चरर्स' (सायम) से मिली जानकारी के अनुसार, पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की वजह से बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने या गाड़ी के बंद हो जाने की कोई समस्या सामने नहीं आई है। लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में, केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने यह बात कही। 

उन्होंने कहा, ''इंजन के काम करने, गाड़ी के माइलेज से जुड़ी कुछ चिंताएं अधिकतर सार्वजनिक टिप्पणियों और सोशल मीडिया पर चर्चा के जरिए सामने आ रही हैं।'' गडकरी ने कहा कि ई15+ ब्लेंडेड पेट्रोल साढ़े तीन साल से ज्यादा समय से और ई19-ई20 मिश्रित ईंधन ढाई साल से ज्यादा समय से देश भर में बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है। 

गडकरी ने कहा कि सरकार ने, हितधारकों के साथ सलाह-मशविरा करके, परीक्षण करके और इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने के हर चरण पर विशेषज्ञ एजेंसियों से अधिमान्य कराके पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय में, इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम शुरू किया है। मंत्री ने बताया कि ईबीपी कार्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से, वैज्ञानिक रूप से मान्यता प्रदान करते हुए और परामर्श करने के तरीके से लागू किया गया है। 

उन्होंने कहा कि इसका इस्तेमाल दुनिया भर में एक सदी से भी ज्यादा समय से किया जा रहा है, जिसमें ब्राजील जैसे देश दशकों से अधिक इथेनॉल मिश्रित ईंधन का इस्तेमाल कर रहे हैं। एक अन्य प्रश्न के लिखित उत्तर में गडकरी ने कहा कि देश में औसतन हर घंटे 59 सड़क हादसे होते हैं। वर्ष 2025 तक भारत में सड़क हादसों की संख्या 5.30 प्रतिशत बढ़कर 5.13 लाख से ज्यादा हो गई, जिनमें हर घंटे 21 लोगों की मौत होती है। गडकरी ने कहा कि कैलेंडर वर्ष 2025 के दौरान देश में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस विभागों ने कुल 5,13,563 सड़क हादसों की रिपोर्ट दी है, जिनमें 1,83,382 लोगों की जान गई है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025 में राज्यों में, तमिलनाडु में सबसे ज्यादा 71,387 दुर्घटनाएं हुईं, जबकि उत्तर प्रदेश में दुर्घटनाओं में सबसे अधिक लोगों ने जान गंवाई, जिनकी संख्या 27,550 थी। उन्होंने कहा कि सरकार ने 4 ई यानी शिक्षा (एजुकेशन), इंजीनियरिंग (सड़क और गाड़ी दोनों की), प्रवर्तन (एनफोर्समेंट) और आपातकालीन देखभाल (इमरजेंसी केयर) के आधार पर सड़क सुरक्षा के मुद्दे को सुलझाने के लिए एक बहुआयामी रणनीति बनाई गई है।


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Content Writer

Pardeep

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