18,000 से सीधे 34,560! केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में होगा बंपर उछाल, फिटमेंट फैक्टर और न्यूनतम वेतन पर आया बड़ा अपडेट
punjabkesari.in Thursday, Mar 12, 2026 - 03:54 PM (IST)
8th Pay Commission: देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। साल 2026 की शुरुआत के साथ ही सरकारी गलियारों में वेतन संशोधन की चर्चाएं गर्म हैं। माना जा रहा है कि नया वेतन आयोग न केवल कर्मचारियों की बेसिक सैलरी में भारी बढ़ोतरी करेगा, बल्कि महंगाई से निपटने के लिए भत्तों के ढांचे में भी आमूलचूल परिवर्तन लाएगा। विशेष रूप से लेवल-1 से लेवल-6 तक के कर्मचारियों के लिए यह बदलाव 'गेम-चेंजर' साबित हो सकता है।
कब लागू होगा 8वां वेतन आयोग?
नियमों के अनुसार, हर 10 साल में नया वेतन आयोग लागू होता है। इस लिहाज से 1 जनवरी 2026 से 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें प्रभावी होने की संभावना है। हालांकि, पैनल की अंतिम रिपोर्ट और कैबिनेट की मंजूरी में 2027 तक का समय लग सकता है, लेकिन कर्मचारियों को इसका लाभ एरियर (Arrear) के साथ 1 जनवरी 2026 से ही मिलने की उम्मीद है।
फिटमेंट फैक्टर और न्यूनतम वेतन का गणित
7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 रखा गया था, जिससे न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपए तय हुई थी। 8वें वेतन आयोग में विशेषज्ञों का अनुमान है कि फिटमेंट फैक्टर 1.92 से 2.08 के बीच रह सकता है। यदि 1.92 का फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो न्यूनतम वेतन 18,000 रुपए से बढ़कर 34,560 रुपए हो सकता है। वहीं कुल वेतन में 18% से 24% तक की वृद्धि देखने को मिल सकती है।
भत्तों में होगा बड़ा बदलाव
नया वेतन आयोग लागू होते ही महंगाई भत्ता (DA) शून्य (0%) से शुरू होगा, क्योंकि वर्तमान DA को बेसिक पे में समाहित कर दिया जाएगा।
| मद (Category) | वर्तमान स्थिति (7th CPC) | अनुमानित स्थिति (8th CPC) |
| न्यूनतम बेसिक पे | ₹18,000 | ₹34,560 - ₹36,000 |
| न्यूनतम पेंशन | ₹9,000 | ₹15,000 - ₹20,000 |
| भत्ते (DA, HRA, TA) | वर्तमान दरों पर | संशोधित बेसिक पर आधारित |
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पेंशनभोगियों और रिटायरमेंट बेनिफिट्स पर असर
8वें वेतन आयोग का पैनल फिलहाल संगठनों से सुझाव मांग रहा है (30 अप्रैल तक की समय सीमा)। रिपोर्ट के अनुसार:
ग्रेच्युटी और PF: बेसिक पे बढ़ने से रिटायरमेंट ग्रेच्युटी और पीएफ योगदान में सुधार होगा, जिससे वित्तीय सुरक्षा मजबूत होगी।
पेंशन रिवीजन: पेंशनर्स को रिवाइज्ड रेट्स के आधार पर बेहतर मासिक भुगतान मिलेगा।
