चीन के ‘नो-एंट्री जोन’ में पहुंचे अमेरिकी फाइटर जेट्स, ड्रैगन ने तुरंत उतारी एयर फोर्स
punjabkesari.in Saturday, Feb 21, 2026 - 06:07 PM (IST)
International Desk: कोरियाई प्रायद्वीप के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में इस सप्ताह अमेरिका और चीन के लड़ाकू विमानों का आमना-सामना हुआ। दोनों महाशक्तियों के बीच इस तरह की सीधी सैन्य सक्रियता को बेहद दुर्लभ माना जा रहा है। दक्षिण कोरिया की समाचार एजेंसी Yonhap News Agency की रिपोर्ट के मुताबिक, बुधवार को करीब 10 अमेरिकी लड़ाकू विमान प्योंगटेक एयरबेस से उड़ान भरकर दक्षिण कोरिया के पश्चिमी तट से दूर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में सैन्य अभ्यास के लिए पहुंचे। हालांकि अमेरिकी विमानों ने चीन के वायु रक्षा पहचान क्षेत्र (ADIZ) में औपचारिक रूप से प्रवेश नहीं किया, लेकिन जैसे ही वे उसके करीब पहुंचे, बीजिंग ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अपने लड़ाकू विमान तैनात कर दिए।
ADIZ क्या है?
वायु रक्षा पहचान क्षेत्र (ADIZ) किसी देश की संप्रभु हवाई सीमा से अलग होता है। यह वह क्षेत्र होता है जहां सीमा के नजदीक आने वाले विमानों को अपनी पहचान स्पष्ट करनी होती है। चीन इस क्षेत्र को अपनी सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील मानता है।चीन के सरकार समर्थित अखबार Global Times ने अज्ञात सूत्रों के हवाले से कहा कि People's Liberation Army (PLA) ने कानूनों और नियमों के तहत पूरी गतिविधि की निगरानी की और नौसेना व वायुसेना को तैनात कर “प्रभावी प्रतिक्रिया” दी।हालांकि चीनी विदेश मंत्रालय ने इस मामले पर तुरंत कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की।
अमेरिका और दक्षिण कोरिया का रुख
दक्षिण कोरिया में तैनात लगभग 28,500 अमेरिकी सैनिकों की कमान संभालने वाली United States Forces Korea ने भी तत्काल कोई बयान जारी नहीं किया।दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि वह अमेरिकी सैन्य अभियानों की पुष्टि करने में असमर्थ है, लेकिन यूएस फोर्सेज कोरिया के साथ एक मजबूत संयुक्त रक्षा प्रणाली कायम है। रिपोर्ट के अनुसार, इस अभ्यास में दक्षिण कोरियाई सेना शामिल नहीं थी और उसे उड़ान की पूर्व जानकारी भी नहीं थी। सियोल की भागीदारी के बिना चीन के ADIZ के इतने करीब अमेरिकी प्रशिक्षण को असामान्य माना जा रहा है।
इंडो-पैसिफिक तनाव
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब चीन इंडो-पैसिफिक क्षेत्र, खासकर दक्षिण चीन सागर और ताइवान को लेकर अपनी सैन्य सक्रियता बढ़ा रहा है। हाल के महीनों में जापान के साथ भी तनाव बढ़ा है। जापानी प्रधानमंत्री Sanae Takaichi के उस बयान के बाद स्थिति और संवेदनशील हो गई थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर चीन ताइवान पर हमला करता है तो टोक्यो के लिए सेना तैनात करना कानूनी रूप से उचित हो सकता है।दिसंबर में टोक्यो ने एक चीनी जेट पर जापानी विमानों पर ‘हथियार-लक्ष्यीकरण रडार’ इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था, जबकि बीजिंग ने पलटवार करते हुए कहा कि जापानी विमान उसके प्रशिक्षण में बाधा डाल रहे थे।
उत्तर कोरिया का परमाणु एजेंडा
इस सैन्य तनाव के बीच उत्तर कोरिया के नेता Kim Jong Un ने पांच वर्षों में पहली बार एक महत्वपूर्ण पार्टी कांग्रेस की शुरुआत की है। उन्होंने संकेत दिया है कि इस बैठक में देश के परमाणु युद्ध निवारक कार्यक्रम को और मजबूत करने की आगामी योजनाएं स्पष्ट की जाएंगी।विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-चीन टकराव और उत्तर कोरिया की परमाणु सक्रियता मिलकर क्षेत्रीय अस्थिरता को और बढ़ा सकती है।
कोरियाई प्रायद्वीप के ऊपर अमेरिकी और चीनी विमानों की यह आमने-सामने की स्थिति संकेत देती है कि इंडो-पैसिफिक में शक्ति संतुलन को लेकर तनाव लगातार गहराता जा रहा है। कूटनीतिक सतर्कता और सैन्य संयम दोनों ही पक्षों के लिए अहम होंगे, वरना छोटी चिंगारी भी बड़े टकराव का रूप ले सकती है।
