वार्ता विफल होने बाद ट्रंप का आखिरी दांवः ईरान को भेजा “फाइनल और बेस्ट ऑफर”, अगर ये ठुकराया तो...
punjabkesari.in Sunday, Apr 12, 2026 - 01:14 PM (IST)
International Desk: अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर Islamabad में हुई महत्वपूर्ण बातचीत आखिरकार किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। यह वार्ता करीब 21 घंटे तक लगातार चली, जिसमें दोनों पक्षों ने कई अहम मुद्दों पर चर्चा की, लेकिन अंतिम सहमति नहीं बन पाई। J. D. Vance ने बताया कि इस पूरी प्रक्रिया में Donald Trump की सीधी भूमिका रही। बातचीत के दौरान अमेरिकी टीम लगातार व्हाइट हाउस के संपर्क में थी और कई बार ट्रंप से सलाह ली गई। ट्रंप ने पहले ही निर्देश दिया था कि बातचीत पूरी ईमानदारी से की जाए, लेकिन अमेरिका की सीमाएं (red lines) स्पष्ट रहें।
अमेरिका का “फाइनल ऑफर”
अमेरिका ने ईरान के सामने एक “फाइनल और बेस्ट ऑफर” रखा। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि ईरान भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार विकसित न करे। ईरान स्पष्ट और लिखित रूप में वादा करे कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। वह ऐसी तकनीक या संसाधन भी विकसित नहीं करेगा जिससे जल्दी हथियार बनाया जा सके। यह प्रतिबद्धता अस्थायी नहीं, बल्कि लंबे समय के लिए हो।
अगर ईरान इसे ठुकराता है तो
अगर ईरान इसे ठुकराता है, तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। मध्य-पूर्व में पहले से ही तनाव बना हुआ है, और ऐसे में यह असफल बातचीत हालात को और जटिल बना सकती है। ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु मुद्दे पर भरोसे की कमी साफ दिखाई दे रही है। हालांकि बातचीत का दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, लेकिन फिलहाल दोनों देशों के बीच दूरी बनी हुई है। अगर ईरान फाइनल ऑफर को ठुकराता है, तो
- अमेरिका नए प्रतिबंध लगा सकता है।
- क्षेत्रीय तनाव बढ़ सकता है।
- कूटनीतिक टकराव और गहरा सकता है।
Islamabad बातचीत क्यों फेल हुई?
वेंस के अनुसार, Islamabad बातचीत में कुछ सकारात्मक पहलू भी रहे, दोनों पक्षों के बीच गहन चर्चा हुई। लेकिन सबसे बड़ा विवाद इस बात पर रहा कि ईरान अमेरिका की शर्तों को मानने के लिए तैयार नहीं हुआ। अमेरिका को लगा कि ईरान की तरफ से “मजबूत और स्थायी प्रतिबद्धता” नहीं मिल रही है। यही वजह रही कि 21 घंटे की कोशिशों के बावजूद कोई समझौता नहीं हो सका। वेंस ने दावा किया कि अमेरिकी पक्ष ने बातचीत में लचीलापन दिखाया और कई मामलों में समझौता करने की कोशिश की। इसके बावजूद दोनों पक्षों के बीच विश्वास और शर्तों को लेकर अंतर बना रहा। अब अमेरिका ने साफ कर दिया है कि उसने अपना “फाइनल ऑफर” दे दिया है। अब फैसला ईरान को करना है कि वह इस प्रस्ताव को स्वीकार करता है या नहीं।
