UN महासचिव की दौड़ में कड़ा मुकाबला, उम्मीदवारों से पूछे गए तीखे सवाल
punjabkesari.in Sunday, Apr 26, 2026 - 04:10 PM (IST)
International Desk: संयुक्त राष्ट्र का अगला महासचिव बनने की दौड़ में शामिल चार उम्मीदवारों ने इस सप्ताह दुनिया में शांति बहाल करने, बढ़ती गरीबी रोकने और वैश्विक संकटों से निपटने जैसे मुद्दों पर कड़े सवालों का सामना किया। संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष एनालेना बेयरबॉक ने इसे नौकरी के लिए दुनिया के सबसे कठिन साक्षात्कारों में से एक बताया। इन उम्मीदवारों में चिली की पूर्व राष्ट्रपति मिशेल बाचेलेत, अर्जेंटीना के राफेल ग्रोसी, कोस्टा रिका की रेबेका ग्रिन्सपैन और सेनेगल के पूर्व राष्ट्रपति मैकी साल शामिल हैं। इसके अलावा, अन्य उम्मीदवार भी बाद में इस दौड़ में शामिल हो सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र के वर्तमान महासचिव एंतोनियो गुतारेस का कार्यकाल एक जनवरी को समाप्त होगा। चारों उम्मीदवारों ने कहा कि वे संयुक्त राष्ट्र के तीन मुख्य स्तंभों शांति, विकास और मानवाधिकार को प्राथमिकता देंगे।
उन्होंने ईरान, गाजा, यूक्रेन और सूडान जैसे संकटग्रस्त क्षेत्रों में संयुक्त राष्ट्र की सीमित भूमिका पर चिंता जताई और संस्था में सुधार की जरूरत बताई। मिशेल बाचेलेत (74) ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को संकट आने से पहले उन्हें रोकने की क्षमता विकसित करनी होगी। उन्होंने संवाद, एकजुटता और सक्रिय नेतृत्व पर जोर दिया। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के प्रमुख 65 वर्षीय राफेल ग्रोसी ने कहा कि दुनिया में बढ़ते ध्रुवीकरण के कारण संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि मजबूत नेतृत्व के बिना संस्था अपनी प्रभावी भूमिका नहीं निभा सकेगी। रेबेका ग्रिन्सपैन (65) ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र जरूरत से ज्यादा जोखिम से बचने वाली संस्था बन गया है। उन्होंने कहा कि संगठन को नए प्रयोग करने होंगे और असफलता के डर से बाहर निकलना होगा।
मैकी साल (64) ने कहा कि यदि उन्हें चुना गया तो वह देशों के बीच सेतु का काम करेंगे, तनाव कम करेंगे और वैश्विक सहयोग में नयी उम्मीद जगाएंगे। कुछ उम्मीदवारों को विरोध का भी सामना करना पड़ा। बाचेलेत को अमेरिकी रिपब्लिकन सांसदों ने गर्भपात समर्थक बताते हुए उनका विरोध किया, जबकि मैकी साल पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे, जिन्हें उन्होंने खारिज किया। अब अंतिम फैसला 15 सदस्यीय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद करेगी, खासकर वीटो का अधिकार रखने वाले उसके पांच स्थायी सदस्य अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस। इसके बाद 193 सदस्यीय महासभा अंतिम मंजूरी देगी। कई विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार ऐसे महासचिव की तलाश है जो ज्यादा सक्रिय, साहसी और प्रभावशाली नेतृत्व दे सके।
