न नौकरी और न ऑफिस…; चीन में बेरोजगार युवा कर रहे काम पर जाने का नाटक, जानें क्यों बढ़ रहा ये ट्रेंड

punjabkesari.in Wednesday, Oct 21, 2026 - 07:57 PM (IST)

Bejing: चीन में बेरोजगारी के बीच एक ऐसा चलन सामने आया है, जिसने लोगों को हैरान कर दिया है। नौकरी छूटने या काम न मिलने के बावजूद कुछ युवा हर सुबह तैयार होकर घर से ऐसे निकलते हैं, मानो उन्हें रोज की तरह दफ्तर जाना हो। लेकिन हकीकत में उनका कोई कार्यालय नहीं होता। कोई पुस्तकालय में समय बिताता है, तो कोई पार्क, कैफे या शॉपिंग मॉल में दिन गुजारता है। मकसद सिर्फ समय बिताना नहीं, बल्कि परिवार और रिश्तेदारों से अपनी बेरोजगारी छिपाना भी है। सोशल मीडिया पर चर्चा में आए इस चलन ने चीन में रोजगार के दबाव और युवाओं की मानसिक परेशानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में कुछ बेरोजगार लोग अपने माता-पिता और रिश्तेदारों के सवालों से बचने के लिए नौकरी पर जाने का नाटक कर रहे हैं। वे सुबह घर से निकलते हैं और शाम को इस तरह लौटते हैं, जैसे दिनभर काम करके आए हों। 32 वर्षीय कोको ली इसका एक उदाहरण हैं। वह चीन की एक सरकारी स्वामित्व वाली रियल एस्टेट कंपनी में काम करती थीं। काम के अत्यधिक दबाव और अपनी मेहनत के अनुरूप पहचान नहीं मिलने से परेशान होकर उन्होंने छह महीने से अधिक समय पहले नौकरी छोड़ दी। हालांकि, उन्होंने परिवार को इसके बारे में नहीं बताया। एक बार वह घर पर बने खाने की तस्वीर परिवार के समूह में साझा करने वाली थीं, लेकिन उन्हें डर लगा कि उनकी मां पूछ सकती हैं कि काम के समय वह घर पर क्यों हैं। आखिरकार उन्होंने तस्वीर साझा करने का विचार छोड़ दिया।

 

ली का मानना है कि बेरोजगारी को लेकर मां की चिंता उनकी अपनी परेशानी बढ़ा सकती है, जबकि इससे नई नौकरी मिलने की समस्या हल नहीं होगी। इसी वजह से वह अपनी स्थिति परिवार से छिपाकर रख रही हैं। चीन के सामाजिक माध्यमों पर इस चलन को लेकर काफी चर्चा हो रही है। बेरोजगारी के दौरान दिन कैसे बिताएं, रिश्तेदारों के सवालों से कैसे बचें और नौकरी जाने की बात परिवार को कैसे न बताएं, इस तरह के विषयों पर लोग अपने अनुभव साझा कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, रेडनोट पर इससे जुड़ी पोस्ट को 7 करोड़ से अधिक बार देखा गया, जबकि डोयिन पर इनकी संख्या 61 करोड़ से ज्यादा रही। वीबो पर संबंधित हैशटैग को 32 करोड़ बार देखे जाने का उल्लेख किया गया है।

 

36 वर्षीय झांग पहले दृश्य प्रभाव निर्माण के क्षेत्र में काम करती थीं। अगस्त में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI से जुड़ी छंटनी के दौरान उनकी नौकरी चली गई। इसके बाद जब वह एक पुस्तकालय पहुंचीं, तो उन्हें हैरानी हुई कि कामकाजी दिन होने के बावजूद वहां काफी भीड़ थी।  कुछ लोग बेरोजगारी के दौरान नौकरी तलाशने की अपनी कोशिशों का हिसाब भी साझा कर रहे हैं। एक उपयोगकर्ता ने बताया कि उसने बिना नौकरी के 30 दिन बिताए और इस दौरान 80 नौकरियों के लिए आवेदन किया। यह दिखाता है कि लगातार प्रयास करने के बाद भी काम न मिलना कई लोगों के लिए कितनी बड़ी चुनौती बन गया है। इस चलन के पीछे आर्थिक परेशानी के साथ सामाजिक दबाव भी एक बड़ी वजह है। कई परिवारों में नौकरी को सफलता, आत्मनिर्भरता और आर्थिक सुरक्षा से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में नौकरी छूटने के बाद व्यक्ति को सिर्फ आमदनी की चिंता नहीं होती, बल्कि उसे माता-पिता की चिंता, रिश्तेदारों के सवालों और भविष्य को लेकर मिलने वाली सलाह का भी सामना करना पड़ता है।

 


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Content Writer

Tanuja

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