कांगो में इस खतरनाक वायरस का कहर: इटुरी प्रांत में 80 मौतें, WHO ने बढ़ाया मदद का हाथ
punjabkesari.in Saturday, May 16, 2026 - 11:59 PM (IST)
किन्शासा/जिनेवा: कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) के उत्तर-पूर्वी इटुरी प्रांत में इबोला वायरस की घातक प्रजाति 'बुंडिबुग्यो' के प्रकोप की पुष्टि के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता की लहर दौड़ गई है। राजधानी किन्शासा स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोमेडिकल रिसर्च (INRB) की रिपोर्ट के अनुसार, इटुरी के मोंगबवालू और रवाम्पारा स्वास्थ्य क्षेत्रों से लिए गए 13 संदिग्ध नमूनों में से 8 में इस वायरस की पुष्टि हुई है।
80 लोगों की संदिग्ध मौत, 2007 जैसा खतरा
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, कांगो में अब तक कुल 80 लोगों की मौत होने का संदेह है, जो इस खतरनाक वायरस की चपेट में आए थे। बुंडिबुग्यो प्रजाति की पहचान सबसे पहले 2007 में पश्चिमी युगांडा में हुई थी, जहां 131 मामले सामने आए थे और 32 प्रतिशत की मृत्यु दर दर्ज की गई थी। वर्तमान में भी कई मरीजों की हालत तेजी से बिगड़ रही है, जिससे समुदायों में संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ गई है।
बीमारी के प्रमुख लक्षण: इस वायरस की चपेट में आने वाले लोगों में ये लक्षण देखे जा रहे हैं:
- तेज बुखार और शरीर में बहुत अधिक कमजोरी।
- पूरे शरीर में दर्द और उल्टी होना।
- कुछ गंभीर मामलों में शरीर के अंगों से रक्तस्राव (Bleeding)।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) हुआ सक्रिय
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कांगो सरकार को दी जाने वाली सहायता को युद्ध स्तर पर बढ़ा दिया है। WHO के प्रतिनिधि और आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम को पहले ही इटुरी में तैनात कर दिया गया है। राष्ट्रीय अधिकारियों ने भी आपातकालीन समन्वय तंत्र को सक्रिय कर प्रभावित क्षेत्रों में अतिरिक्त बहु-विषयक त्वरित प्रतिक्रिया टीमें भेजी हैं।
विशेषज्ञों का बयान
WHO के अफ्रीका क्षेत्रीय निदेशक डॉ. मोहम्मद जनाबी ने कहा कि कांगो के पास इबोला के प्रकोपों से निपटने का व्यापक अनुभव है। उन्होंने आश्वासन दिया कि वायरस के प्रसार को रोकने और लोगों के जीवन की रक्षा के लिए अतिरिक्त संसाधन और विशेषज्ञता तैनात की जा रही है। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय और स्थानीय स्वास्थ्य विभाग मिलकर वायरस की कड़ी को तोड़ने में जुटे हैं।
