Petrol-Diesel Price Hike : तेल की आग में ‘ड्रैगन’ भी झुलसा! 15 दिन में दूसरी बार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम

punjabkesari.in Tuesday, Apr 07, 2026 - 09:03 PM (IST)

इंटरनेशनल डेस्कः चीन ने मंगलवार को करीब दो हफ्तों में दूसरी बार पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान किया। इसकी बड़ी वजह पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के चलते अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में हो रही तेजी है।

चीन की शीर्ष आर्थिक योजना संस्था National Development and Reform Commission (NDRC) ने घोषणा की कि नई कीमतें बुधवार से लागू होंगी। इससे पहले 23 मार्च को भी पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए गए थे। यह कदम United States-Israel-Iran युद्ध को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच ईंधन संकट से निपटने की तैयारी के तौर पर उठाया गया।

15 दिन में दूसरी बार महंगा हुआ ईंधन
NDRC ने बताया कि मार्च के अंत में कीमतों में बदलाव के बाद से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है।

नए फैसले के तहत पेट्रोल की कीमत में 420 युआन (लगभग 61 डॉलर) प्रति टन बढ़ोतरी और डीजल की कीमत में 400 युआन (लगभग 58 डॉलर) प्रति टन बढ़ोतरी होगी।

तेल कंपनियों को मिला बड़ा निर्देश
NDRC ने देश की तीन बड़ी तेल कंपनियों चाइना नेशनल पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन, चाइना पेट्रोकेमिकल कॉर्पोरेशन और चाइना नेशनल ऑफ़शोर ऑयल कॉर्पोरेशन के साथ अन्य रिफाइनरियों को भी उत्पादन जारी रखने और सप्लाई सुचारु बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, अधिकारियों से बाजार पर कड़ी निगरानी रखने और निरीक्षण तेज करने को कहा गया है।

 

होर्मुज पर टिकी है चीन की बड़ी निर्भरता
सरकारी एजेंसी Xinhua News Agency के मुताबिक, चीन अपनी जरूरत का लगभग 70% कच्चा तेल आयात करता है। इसमें से करीब 45% सप्लाई स्ट्रेट ऑफ होमुर्ज से जुड़ी है। यानी कुल तेल आपूर्ति का लगभग 30% इस मार्ग पर निर्भर है। ऐसे में होर्मुज में किसी भी तरह की बाधा चीन की ऊर्जा सप्लाई को प्रभावित कर सकती है।

 4 महीने का स्टॉक, फिर भी चिंता बरकरार
रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन के पास करीब चार महीने का आपातकालीन तेल भंडार मौजूद है। साथ ही, सरकार ने बाजार में व्यवस्था बनाए रखने और नेशनल प्राइसिंग पॉलिसी का उल्लंघन करने वालों पर सख्ती करने के निर्देश दिए हैं।

चीन पर असर कम पड़ने की उम्मीद
विश्लेषकों का मानना है कि चीन के ऊर्जा मिश्रण और बिजली उत्पादन प्रणाली को देखते हुए, होर्मुज में बाधा का असर अन्य देशों के मुकाबले कम हो सकता है। चीन के पास रूस के साथ गैस पाइपलाइन कनेक्शन हैं और मॉस्को के साथ दीर्घकालिक ऊर्जा समझौते भी हैं, जो उसे अतिरिक्त सहारा देते हैं।


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Content Writer

Pardeep

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