पाकिस्तान में भूख से बेहाल लाखों लोग, दुनिया के 10 सबसे बड़े खाद्य संकट वाले देशों में शामिल

punjabkesari.in Saturday, Oct 17, 2026 - 06:52 PM (IST)

Islamabad:  पाकिस्तान में महंगाई, गरीबी और जलवायु संबंधी आपदाओं के कारण खाद्य संकट गंभीर बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय मानवीय सहायता संगठन एक्शन अगेंस्ट हंगर की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान दुनिया के उन 10 देशों में शामिल है, जहां भूख और खाद्य असुरक्षा की समस्या सबसे ज्यादा केंद्रित है।
‘डॉन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, विश्व खाद्य दिवस से पहले जारी ‘टेन लार्जेस्ट ग्लोबल फूड क्राइसिस’ रिपोर्ट में पाकिस्तान की स्थिति पर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 में देश के लगभग 1.06 करोड़ लोगों को मानवीय सहायता की जरूरत पड़ सकती है। यह स्थिति ऐसे समय में है, जब पाकिस्तान आर्थिक सुधार की कोशिशों में जुटा है और कुछ आर्थिक संकेतकों में सुधार के दावे किए जा रहे हैं। हालांकि, इसका लाभ समाज के कमजोर वर्गों तक पर्याप्त रूप से नहीं पहुंच पा रहा है।


दुनिया के 10 सबसे बड़े खाद्य संकट वाले देश
रिपोर्ट में उन 10 देशों की सूची दी गई है, जहां खाद्य संकट सबसे ज्यादा गंभीर है। इनमें एशिया, अफ्रीका और पश्चिम एशिया के देश शामिल हैं।
1. नाइजीरिया
2. कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य
3. सूडान
4. यमन
5. अफगानिस्तान
6. म्यांमार
7. बांग्लादेश
8. पाकिस्तान
9. दक्षिण सूडान
10. सीरिया

 

रिपोर्ट के मुताबिक, इन 10 देशों में करीब 17.7 करोड़ लोग रहते हैं। पिछले एक दशक में गंभीर भूख से प्रभावित लोगों की संख्या दोगुनी हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया के 47 देशों में लगभग 26.6 करोड़ लोग गंभीर भूख का सामना कर रहे हैं। इनमें ऐसे लोग भी शामिल हैं, जिन्हें पर्याप्त भोजन और जरूरी पोषण उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। खाद्य संकट का सबसे ज्यादा असर कम आय वाले परिवारों पर पड़ रहा है। खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों और घटती आमदनी के कारण उनके लिए रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना मुश्किल हो रहा है। मानवीय सहायता में कमी से हालात और चुनौतीपूर्ण बन रहे हैं। पाकिस्तान में खाने-पीने की वस्तुओं की ऊंची कीमतें, बेरोजगारी और परिवारों की घटती क्रय शक्ति खाद्य संकट को बढ़ा रही हैं। आर्थिक अस्थिरता के कारण कई परिवार जरूरी सामान खरीदने में भी कठिनाई महसूस कर रहे हैं।

 

कृषि उत्पादों की प्रतिकूल कीमतों का असर किसानों और उनसे जुड़े लोगों की आजीविका पर भी पड़ रहा है। कम आय वाले परिवारों के लिए भोजन, स्वास्थ्य और शिक्षा पर होने वाले खर्च के बीच संतुलन बनाना लगातार कठिन होता जा रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि मानवीय सहायता के लिए उपलब्ध धनराशि बढ़ती जरूरतों के मुकाबले पर्याप्त नहीं है। ऐसे में कुछ परिवार खर्च चलाने के लिए भोजन कम कर रहे हैं और अपनी आजीविका से जुड़ी संपत्तियां बेचने को मजबूर हो रहे हैं। आर्थिक दबाव के कारण कुछ परिवार बच्चों को स्कूल से निकालने जैसे कदम भी उठा रहे हैं, ताकि घर का खर्च चलाया जा सके। इससे बच्चों के पोषण, शिक्षा और भविष्य पर लंबे समय तक असर पड़ने का खतरा है।


 
‘डॉन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के ग्रामीण और आपदा प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं, पोषण कार्यक्रमों, साफ पेयजल, स्वच्छता और सामाजिक सुरक्षा तक पर्याप्त पहुंच नहीं है। इन सुविधाओं की कमी से लोगों की सेहत और पोषण प्रभावित होते हैं। आजीविका से जुड़ी सहायता और जरूरी सेवाओं में कटौती के कारण प्रभावित समुदायों के लिए खाद्य संकट से उबरना और मुश्किल हो जाता है। जलवायु परिवर्तन भी पाकिस्तान की खाद्य सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है। बार-बार आने वाली बाढ़, सूखा, भीषण गर्मी, ग्लेशियर झीलों के फटने से आने वाली बाढ़ और मानसून की अनिश्चित बारिश ने कृषि तथा बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचाया है। 


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Content Writer

Tanuja

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