अंतरिक्ष में कुछ डरावना हो रहा है? सूर्य जैसे तारे की रोशनी अचानक 40 गुना घटी, वैज्ञानिकों को दिखी रहस्यमय चीज
punjabkesari.in Thursday, Jan 22, 2026 - 10:31 PM (IST)
इंटरनेशनल डेस्कः ब्रह्मांड की गहराइयों से एक बेहद रहस्यमय और चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसने दुनिया भर के वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है। पृथ्वी से लगभग 3,000 प्रकाश वर्ष दूर स्थित JE0705+0612 नाम का एक तारा अचानक अंधेरे में डूब गया। यह तारा आकार और प्रकृति में हमारे सूर्य जैसा ही है, लेकिन सितंबर 2024 से मई 2025 के बीच इसकी चमक करीब 40 गुना तक कम हो गई। कुछ समय के लिए तो ऐसा लगा मानो तारा लगभग गायब ही हो गया हो।
विशाल रहस्यमय बादल ने 9 महीने तक रोकी तारे की रोशनी
जब वैज्ञानिकों ने चिली स्थित जेमिनी साउथ टेलीस्कोप से इस तारे का अध्ययन किया, तो एक हैरान करने वाला सच सामने आया। तारे के सामने एक बेहद बड़ा और घना बादलों का झुंड आकर खड़ा हो गया था। इस बादल ने लगातार 9 महीनों तक तारे की रोशनी को पृथ्वी तक पहुंचने से रोके रखा। नतीजा यह हुआ कि उस पूरे इलाके में गहरा अंधेरा छा गया। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह कोई आम धूल या गैस का बादल नहीं है।
बादलों के अंदर चल रही हैं धातुओं की खतरनाक हवाएं
जब इस बादल की गहराई से जांच की गई, तो वैज्ञानिक और भी ज्यादा चौंक गए। उन्हें बादलों के अंदर लोहे (Iron) और कैल्शियम (Calcium) जैसी भारी धातुएं मिलीं, जो गैसीय रूप में बहुत तेज गति से घूम रही थीं। यह पहली बार है जब अंतरिक्ष में किसी ग्रह या छोटे तारे के आसपास धातुओं से बनी हवाओं को सीधे मापा गया है। जेमिनी टेलीस्कोप के अत्याधुनिक उपकरण ‘GHOST’ ने साफ कर दिया कि यह कोई साधारण धूल नहीं, बल्कि वाष्पीकृत धातुओं का पूरा तूफान है। यह खोज इस बात का सबूत है कि ग्रहों और तारों के बनने के अरबों साल बाद भी उनके आसपास बड़े और विनाशकारी बदलाव हो सकते हैं।
बादल के बीच छिपा है कोई भारी रहस्य
अब वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने विशाल बादल को आखिर कौन संभाले हुए है? भौतिकी के नियमों के मुताबिक, इतना बड़ा बादल बिना किसी ताकतवर गुरुत्वाकर्षण के टूटकर बिखर जाना चाहिए था। इसी वजह से वैज्ञानिकों को शक है कि इस बादल के केंद्र में बृहस्पति से कई गुना बड़ा कोई विशाल ग्रह, या फिर एक ‘ब्राउन ड्वार्फ’ (भूरा बौना) तारा, या संभवतः कोई छोटा लेकिन बेहद भारी सितारा मौजूद हो सकता है। जिसके चारों ओर यह पूरा बादल या डिस्क घूम रही है। अंतरिक्ष में इतनी भारी संरचना का स्थिर कक्षा में बना रहना बेहद दुर्लभ और अपने आप में एक चमत्कार माना जा रहा है।
दो विशाल ग्रहों की भीषण टक्कर से बना हो सकता है यह बादल
प्रोफेसर नादिया और उनकी रिसर्च टीम का मानना है कि यह रहस्यमय बादल किसी भयानक ग्रह-टक्कर का नतीजा हो सकता है। आमतौर पर ऐसे बादल नए तारों के पास देखे जाते हैं, लेकिन यह तारा 2 अरब साल से भी ज्यादा पुराना है। संभावना है कि इस सौर मंडल के बाहरी हिस्से में दो विशाल ग्रह आपस में टकरा गए हों। टक्कर इतनी जबरदस्त रही हो कि चट्टानें पिघल गईं। उनमें मौजूद लोहा और कैल्शियम गैस में बदल गए और अब वही मलबा धातु-भरे बादलों के रूप में अंतरिक्ष में घूम रहा है।
क्या सिखाती है यह घटना?
यह रहस्यमय घटना साबित करती है कि अंतरिक्ष कभी स्थिर नहीं होता। पुराने और शांत माने जाने वाले सौर मंडलों में भी किसी भी समय बड़ी तबाही हो सकती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह खोज भविष्य में ग्रहों के विकास, टकराव और विनाश को समझने में बेहद अहम साबित होगी।
