ईरानी राष्ट्रपति पेजेशकियन का ऐलानः जंग रोकने को तैयार हैं, अमेरिका-इजराइल मान लें सिर्फ 3 शर्तें
punjabkesari.in Thursday, Mar 12, 2026 - 12:29 PM (IST)
International Desk: मध्य पूर्व में Iran, United States और Israel के बीच जारी संघर्ष को लेकर ईरान ने पहली बार साफ तौर पर अपनी शर्तें सामने रख दी हैं। ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने कहा है कि अगर तीन प्रमुख मांगें पूरी कर दी जाएं तो तेहरान युद्ध समाप्त करने के लिए तैयार है। उधर, ईरान की सशस्त्र सेनाओं के प्रवक्ता Abolfazl Shekarchi ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान के बंदरगाहों पर हमला किया गया तो फारस की खाड़ी के किसी भी बंदरगाह या आर्थिक केंद्र को सुरक्षित नहीं माना जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि ईरानी पोर्ट्स को निशाना बनाया गया तो सेना अब तक की तुलना में और भी बड़े सैन्य अभियान चलाएगी।
ईरान की तीन मुख्य शर्तें
- ईरान के “वैध अधिकारों” को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार किया जाए।
- युद्ध में हुए नुकसान के लिए ईरान को मुआवजा दिया जाए।
- भविष्य में किसी भी सैन्य हमले के खिलाफ ठोस अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा गारंटी दी जाए।
- पेजेशकियन ने यह बयान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया।
रूस और पाकिस्तान से बातचीत
ईरानी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने Russia और Pakistan के नेताओं से बातचीत के दौरान क्षेत्र में शांति के लिए ईरान की प्रतिबद्धता दोहराई है। उनका आरोप है कि मौजूदा युद्ध की शुरुआत इजरायल और अमेरिका की कार्रवाई से हुई और जब तक इन मुद्दों पर स्पष्ट समझौता नहीं होता, तब तक संघर्ष खत्म नहीं होगा।
युद्ध जल्द खत्म होने की उम्मीद नहींःइजरायल
रिपोर्टों के अनुसार, इजरायली अधिकारियों का मानना है कि ईरान के खिलाफ चल रहे हमलों से उसके धार्मिक शासन के गिरने की संभावना फिलहाल स्पष्ट नहीं है।हालांकि Donald Trump ने संकेत दिया है कि युद्ध जल्द खत्म हो सकता है, लेकिन इजरायल के रणनीतिक हलकों का मानना है कि वाशिंगटन अभी संघर्ष रोकने के करीब नहीं है।
युद्ध कैसे शुरू हुआ
रिपोर्टों के अनुसार यह संघर्ष 28 फरवरी को उस समय शुरू हुआ जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ संयुक्त एहतियाती हमला किया। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल के कई शहरों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। जॉर्डन, इराक और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इन घटनाओं के बाद पूरे मध्य पूर्व में सैन्य तनाव तेजी से बढ़ गया।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर
- विशेषज्ञों का कहना है कि इस युद्ध का असर केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं है।
- विशेष रूप से Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव के कारण:
- तेल और गैस के टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई
- वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ा
- अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल की कीमतों और महंगाई का खतरा बढ़ गया
- क्योंकि दुनिया के करीब एक-तिहाई समुद्री तेल व्यापार इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है।
