सुलेमानी किलर MQ-9 रीपर ड्रोन की एशिया में बढ़ती तैनाती, चीन के लिए क्यों बन रही बड़ी चुनौती?

punjabkesari.in Monday, Feb 16, 2026 - 11:43 PM (IST)

इंटरनेशनल डेस्कः अमेरिका एशिया, खासकर चीन के आसपास, अपने MQ-9 रीपर ड्रोन की तैनाती तेजी से बढ़ा रहा है। इससे चीन के लिए नई सुरक्षा और रणनीतिक चुनौती खड़ी हो गई है। MQ-9 रीपर एक ऐसा अत्याधुनिक ड्रोन है जो निगरानी (जासूसी) और हमला—दोनों काम कर सकता है। इसका इस्तेमाल 2020 में ईरानी जनरल Qasem Soleimani के खिलाफ किए गए ऑपरेशन में भी किया गया था। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में यह ड्रोन अमेरिका की निगरानी और सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा बन चुका है।

MQ-9 रीपर की ताकत क्या है?

MQ-9 ड्रोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी ऊंची उड़ान और लंबी अवधि तक हवा में बने रहने की क्षमता है। यह करीब 15,240 मीटर (50,000 फीट) की ऊंचाई तक उड़ सकता है। इसकी अधिकतम रफ्तार लगभग 480 किमी प्रति घंटा है। यह करीब 27 घंटे तक लगातार उड़ान भर सकता है।

चीनी सैन्य विशेषज्ञों के मुताबिक, यह ड्रोन चीन की सीमा से दूर रहकर भी उसके आसपास की गतिविधियों पर नजर रख सकता है। इसकी तकनीक ऐसी है कि इसे पकड़ना आसान नहीं होता। इसमें हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे, उन्नत सेंसर और सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम लगे होते हैं, जो रियल टाइम में जानकारी भेज सकते हैं। जरूरत पड़ने पर यह लेजर-गाइडेड बम और मिसाइल से हमला भी कर सकता है।

नया MQ-9B सी गार्डियन मॉडल

जनवरी में इसके नए वैरिएंट MQ-9B सी गार्डियन में एक खास सिस्टम जोड़ा गया है, जो पहले से दोगुने सोनाबॉय गिरा सकता है। सोनाबॉय समुद्र में पनडुब्बियों का पता लगाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। इससे समुद्री निगरानी और पनडुब्बी रोधी अभियानों में इसकी ताकत और बढ़ गई है, जो दक्षिण चीन सागर जैसे संवेदनशील इलाकों में अहम मानी जा रही है।

किन देशों में तैनात हैं ये ड्रोन?

अमेरिका ने जापान के ओकिनावा स्थित Kadena Air Base पर 14 MQ-9 ड्रोन तैनात किए हैं। इसके अलावा दक्षिण कोरिया के कुनसान एयर बेस और फिलीपींस के बासा एयर बेस पर। इन ठिकानों से पूर्वी चीन सागर, ताइवान स्ट्रेट और दक्षिण चीन सागर पर लगातार नजर रखी जा सकती है।

सहयोगी देशों को भी मिल रहे MQ-9

अमेरिका अपने सहयोगी देशों को भी ये ड्रोन उपलब्ध करा रहा है।

  • जापान आने वाले वर्षों में MQ-9B और सी गार्डियन खरीदने की योजना बना रहा है।

  • ताइवान ने 4 MQ-9 ड्रोन मंगवाए हैं।

  • भारत ने 2020 के बाद 2 ड्रोन लिए थे और 2024 में 31 और ड्रोन खरीदने के लिए 3.5 अरब डॉलर का समझौता किया।

  • दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया को भी इस तकनीक की पेशकश की गई है।

इस तरह अमेरिका अपने सहयोगियों के साथ मिलकर एक मजबूत निगरानी नेटवर्क तैयार कर रहा है।

चीन के लिए क्यों चिंता की बात?

विशेषज्ञों का मानना है कि इन ड्रोन की तैनाती से अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को चीन की सैन्य गतिविधियों पर करीबी नजर रखने में मदद मिल रही है। इससे क्षेत्र में शक्ति संतुलन बदल सकता है। हालांकि चीन के पास भी उन्नत एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम, लेजर हथियार और आधुनिक ड्रोन मौजूद हैं। लेकिन शांति के समय बिना सीधे टकराव के इन ड्रोन गतिविधियों का जवाब देना चीन के लिए रणनीतिक रूप से बड़ी चुनौती बन सकता है। 


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Content Writer

Pardeep

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