बांग्लादेश ने हर 1 डॉलर के विदेशी कर्ज के बदले चुकाए 2 डॉलर से ज्यादा
punjabkesari.in Tuesday, Oct 27, 2026 - 01:59 PM (IST)
नई दिल्ली : वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में बांग्लादेश ने विदेशी ऋण के रूप में मिली राशि से दोगुने से भी अधिक का भुगतान किया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि विदेशी ऋण मिलने में कमी आई और कर्ज चुकाने की लागत बढ़ गई जिससे देश की बाहरी वित्तीय स्थिति पर दबाव पड़ा।
सोमवार 26 अक्टूबर को आर्थिक संबंध विभाग (ERD) द्वारा जारी शुरुआती आंकड़ों के अनुसार जुलाई-सितंबर की अवधि में बांग्लादेश को 662.31 मिलियन डॉलर का विदेशी ऋण मिला जबकि इसी दौरान उसने विदेशी ऋण के मूलधन और ब्याज के रूप में 1.35 बिलियन डॉलर का भुगतान किया। इसका मतलब यह है कि इस तिमाही के दौरान बाहरी स्रोतों से मिले हर 1 डॉलर के कर्ज के बदले बांग्लादेश ने कर्ज चुकाने (मूलधन और ब्याज) में 2.04 डॉलर का भुगतान किया।
कर्ज चुकाने की लागत (डेट सर्विसिंग) में पिछले साल (वित्त वर्ष 2026) की इसी अवधि के 1.28 बिलियन डॉलर के मुकाबले 5.6% की वृद्धि हुई। मूलधन का भुगतान 816.99 मिलियन डॉलर से बढ़कर 858.92 मिलियन डॉलर हो गया, जबकि ब्याज का भुगतान 462.96 मिलियन डॉलर से बढ़कर 492.31 मिलियन डॉलर हो गया। वहीं विदेशी ऋण मिलने (डिस्बर्समेंट) में 42.3% की गिरावट आई है। एक साल पहले यह राशि 1.149 बिलियन डॉलर थी। इससे सरकार के पास अपने विकास कार्यों को पूरा करने के लिए बाहरी फंडिंग काफी कम रह गई है।
ERD के आंकड़ों के अनुसार इस तिमाही में मिले 662.31 मिलियन डॉलर में से 541.74 मिलियन डॉलर ऋण के रूप में और 110.57 मिलियन डॉलर अनुदान (ग्रांट) के रूप में प्राप्त हुए। 'इंस्टीट्यूट फॉर इंक्लूसिव फाइनेंस एंड डेवलपमेंट' (InM) के कार्यकारी निदेशक और अर्थशास्त्री मुस्तफा के. मुजेरी ने कहा कि कर्ज चुकाने का बढ़ता बोझ पिछले वर्षों में लिए गए ऋणों की मात्रा और उनसे जुड़ी अनुबंध संबंधी शर्तों को दर्शाता है।
उन्होंने 'द बिजनेस स्टैंडर्ड' से कहा, 'अतीत में विभिन्न विकास साझेदारों के साथ हुए समझौतों के तहत लिए गए ऋणों को अब उन समझौतों की शर्तों के अनुसार चुकाना होगा, जिसमें मूलधन और ब्याज दोनों शामिल हैं। कर्ज चुकाने की इन जिम्मेदारियों को कम या ज्यादा करने की कोई गुंजाइश नहीं है।'
उन्होंने कहा कि अगले दो से तीन वर्षों में कर्ज चुकाने का यह बोझ और भी बढ़ेगा। मुजेरी ने कहा कि कर्ज चुकाने की बढ़ती लागत और कम ऋण मिलने की स्थिति सरकार पर भारी वित्तीय दबाव डाल रही है। इससे राजस्व वसूली और बजट को लागू करने में मुश्किलें आ सकती हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर विदेशी कर्ज और अनुदान अपर्याप्त रहते हैं, तो सरकार को घरेलू कर्ज पर और अधिक निर्भर रहना पड़ सकता है। केंद्रीय बैंक से ज्यादा कर्ज लेने से महंगाई बढ़ सकती है, जबकि कमर्शियल बैंकों से ज्यादा कर्ज लेने पर निजी व्यवसायों के लिए क्रेडिट (ऋण) की उपलब्धता कम हो सकती है जिससे निवेश और रोजगार पर बुरा असर पड़ सकता है।
विश्व बैंक और ADB से सबसे ज्यादा फंड मिला
इस तिमाही के दौरान विदेशी सहायता के सबसे बड़े स्रोत विश्व बैंक की 'इंटरनेशनल डेवलपमेंट एसोसिएशन' (IDA) और 'एशियन डेवलपमेंट बैंक' (ADB) रहे। इन दोनों ने मिलकर कुल सहायता का लगभग 54% यानी 358.62 मिलियन डॉलर जारी किया। IDA ने 196.51 मिलियन डॉलर जारी किए जबकि ADB ने 162.11 मिलियन डॉलर दिए। भारत तीसरा सबसे बड़ा स्रोत रहा, जिसने द्विपक्षीय ऋण समझौतों के तहत 104.99 मिलियन डॉलर की सहायता दी। जापान ने 44.66 मिलियन डॉलर, रूस ने 20.65 मिलियन डॉलर और चीन ने 14.66 मिलियन डॉलर जारी किए। 'एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक' (AIIB) ने इस अवधि में कोई फंड जारी नहीं किया, जबकि अन्य विकास साझेदारों ने कुल मिलाकर 118.73 मिलियन डॉलर दिए।
फंड जारी होने की रफ्तार धीमी
वास्तविक प्राप्ति में कमी के बावजूद जुलाई-सितंबर के दौरान विदेशी कर्ज और अनुदान के लिए किए गए वादे (कमिटमेंट) पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि के 910.67 मिलियन डॉलर से लगभग 40% बढ़कर 1.273 बिलियन डॉलर हो गए। कुल राशि में से 1.148 बिलियन डॉलर कर्ज के रूप में और 125.45 मिलियन डॉलर अनुदान के रूप में थे। ERD के आंकड़ों से पता चलता है कि 'ईस्टर्न रिफाइनरी' परियोजना के आधुनिकीकरण और विस्तार के लिए 'इस्लामिक डेवलपमेंट बैंक' (IsDB) से 1 बिलियन डॉलर के कर्ज का वादा (कमिटमेंट) मिला है। जापान ने 3.51 मिलियन डॉलर के नए वादे किए जबकि इस तिमाही के दौरान IDA, ADB, चीन और AIIB की ओर से कोई नया वादा नहीं किया गया।
हालांकि, मुजेरी ने कहा कि वादों (कमिटमेंट) का मतलब तुरंत नकद राशि मिलना नहीं होता है। नई सरकार बनने के बाद विकास साझेदारों ने सतर्क रुख अपनाया है; वे वित्तपोषण (फंडिंग) से जुड़े फैसले लेने से पहले सरकार की नीतियों और योजनाओं की समीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने देरी के एक कारण के रूप में पिछली सरकार के समय हुए समझौतों और ऋण व्यवस्थाओं में निरंतरता की कमी की ओर भी इशारा किया। मुजेरी ने कहा कि सरकार फिलहाल अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ एक नए कार्यक्रम पर बातचीत कर रही है। एक सफल समझौता महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रमुख विकास साझेदार अक्सर भविष्य में ऋण देने का फैसला लेते समय IMF के साथ हुई बातचीत के नतीजों को ध्यान में रखते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि अगर IMF से फंडिंग नहीं मिल पाती है, तो बांग्लादेश के लिए अन्य बहुपक्षीय ऋणदाताओं से बड़ी धनराशि जुटाना और भी मुश्किल हो सकता है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह IMF के साथ समय रहते समझौता करे और विदेशी सहायता का प्रवाह बढ़ाए, ताकि सरकारी वित्त पर दबाव कम हो सके और घरेलू कर्ज पर निर्भरता घटाई जा सके।
