ईरान युद्ध के साये में ईद! UAE में नमाज पढ़ने की जगह बदली, सरकार ने जारी की नई Guidelines

punjabkesari.in Thursday, Mar 19, 2026 - 09:10 AM (IST)

UAE Eid Al Fitr 2026 Prayer Rules : संयुक्त अरब अमीरात (UAE) सरकार ने ईद-उल-फितर 2026 को लेकर एक बड़ा और चौंकाने वाला सुरक्षा फैसला लिया है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते क्षेत्रीय तनाव और युद्ध की आहट को देखते हुए प्रशासन ने इस साल खुले मैदानों और बड़े ईदगाहों में नमाज पढ़ने पर रोक लगा दी है। 'इस्लामी मामलों की जनरल अथॉरिटी' (Awqaf) ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा कारणों से इस बार ईद की सामूहिक नमाज केवल मस्जिदों के भीतर ही अदा की जाएगी।

क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?

आमतौर पर यूएई में ईद के मौके पर लाखों लोग खुले मैदानों में एक साथ नमाज पढ़ते हैं लेकिन वर्तमान में मिडिल ईस्ट के हालात बेहद संवेदनशील हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बंद जगहों (मस्जिदों) में भीड़ को मैनेज करना और सुरक्षा जांच करना आसान होता है। क्षेत्र में मंडरा रहे ड्रोन और मिसाइल हमलों के खतरों को देखते हुए खुले स्थानों पर बड़े जमावड़े जोखिम भरे साबित हो सकते हैं। किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में मस्जिदों के भीतर से लोगों को सुरक्षित निकालना ज्यादा सुव्यवस्थित हो सकता है।

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मस्जिदों के लिए जारी हुई नई गाइडलाइंस

चूंकि अब सारा दबाव मस्जिदों पर होगा इसलिए प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं:

  • समय का पालन: नमाजियों से अपील की गई है कि वे भीड़ से बचने के लिए तय समय से पहले मस्जिद पहुँचें।

  • नमाज का वक्त: नमाज के समय में कोई बदलाव नहीं है। यह सूर्योदय के बाद सुबह 5:45 से 6:30 के बीच ही पढ़ी जाएगी।

  • अनुशासन: मस्जिदों के भीतर खुत्बा (उपदेश) और दुआएं सुरक्षित माहौल में संपन्न होंगी। लोगों से सुरक्षाकर्मियों का सहयोग करने को कहा गया है।

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नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि

यूएई सरकार का यह कदम स्पष्ट संदेश देता है कि धार्मिक परंपराओं के साथ-साथ नागरिकों की जान की हिफाजत करना उनकी पहली प्राथमिकता है। हालांकि कई परिवारों के लिए खुले मैदानों की रौनक मिस करना थोड़ा भावुक क्षण है लेकिन युद्ध के मौजूदा हालातों में जनता ने भी इस 'सेफ्टी प्रोटोकॉल' का समर्थन किया है।

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क्षेत्रीय अस्थिरता का असर

ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनातनी ने पूरे खाड़ी क्षेत्र को अलर्ट पर रखा है। यूएई अपनी आंतरिक शांति और खुशहाली को बरकरार रखने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता। ईद जैसे बड़े त्यौहार पर किसी भी तरह की अनिश्चितता से बचने के लिए यह 'मस्जिद केंद्रित' नमाज का फैसला एक एहतियाती कदम है।


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Content Editor

Rohini Oberoi

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