क्या बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति को होगी फांसी? सरकार का बड़ा बयान आया सामने, बढ़ी सियासी हलचल

punjabkesari.in Monday, Jul 27, 2026 - 05:08 PM (IST)

International Desk: बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शाहाबुद्दीन की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। उनके खिलाफ इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) में 'मानवता के खिलाफ अपराध' की जांच की मांग करते हुए दो शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। ये शिकायतें बांग्लादेश आजाद पार्टी और राष्ट्रसंलाप फोरम की ओर से दाखिल की गई हैं। आरोप है कि 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई कथित हिंसा में तत्कालीन राष्ट्रपति होने के नाते उनकी भी जिम्मेदारी बनती है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि 2024 के आंदोलन के दौरान छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर हुई कथित कार्रवाई में तत्कालीन सरकार के शीर्ष संवैधानिक पद पर बैठे होने के कारण शाहाबुद्दीन की भूमिका की जांच होनी चाहिए। इन्हीं घटनाओं से जुड़े मामले में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को पहले ही अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई जा चुकी है।

 

फिलहाल बांग्लादेश सरकार ने पूर्व राष्ट्रपति की गिरफ्तारी की संभावना से इनकार किया है। गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने कहा कि सरकार के पास ऐसा कोई ठोस आधार नहीं है, जिसके आधार पर शाहाबुद्दीन को गिरफ्तार किया जाए। उनके अनुसार, राष्ट्रपति के रूप में उन्होंने केवल अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन किया।गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि कानून के अनुसार पूर्व राष्ट्रपति को मिलने वाली सभी सुरक्षा सुविधाएं जारी रहेंगी। शाहाबुद्दीन को अगले छह महीने तक स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स (SSF) और प्रेसिडेंशियल गार्ड रेजिमेंट (PGR) की सुरक्षा मिलेगी। इसके अलावा पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां भी उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करेंगी।

 

बांग्लादेश के कानून मंत्री मोहम्मद असदुज्जमान ने कहा कि शाहाबुद्दीन के खिलाफ लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की भी जांच की जाएगी। हालांकि उन्होंने जांच की समयसीमा या प्रक्रिया के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT) के मुख्य अभियोजक एमडी अमीनुल इस्लाम ने पुष्टि की कि उनके कार्यालय को दो शिकायतें प्राप्त हुई हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल शिकायतों का प्रारंभिक अध्ययन किया जा रहा है और उसके बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी। फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी। अभी केवल शिकायतें दर्ज हुई हैं और जांच की मांग की गई है। यदि ICT जांच के बाद पर्याप्त साक्ष्य पाता है, तभी आरोप तय होंगे और मुकदमा चलेगा। दोष सिद्ध होने पर ही अदालत सजा पर फैसला करती है। इसलिए इस समय यह कहना कि पूर्व राष्ट्रपति को फांसी होगी, तथ्यात्मक रूप से सही नहीं होगा। 


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Content Writer

Tanuja

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