टुकड़े-टुकड़े होगा पाकिस्तानः Pok के बाद बलूचिस्तान में भड़की बगावत की आग, 11 अगस्त को अपना आजादी दिवस  मनाने का ऐलान

punjabkesari.in Tuesday, Aug 04, 2026 - 01:12 PM (IST)

Peshawar: पाकिस्तान के लिए बलूचिस्तान से एक बार फिर चुनौती सामने आती दिख रही है। बलूच स्वतंत्रता समर्थक समूहों ने 11 अगस्त को बलूचिस्तान का स्वतंत्रता दिवस मनाने का आह्वान किया है और दुनिया भर में रह रहे बलूच लोगों से इस दिन अपनी एकजुटता दिखाने की अपील की है।  बलूच स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े नेताओं का दावा है कि 11 अगस्त 1947 को कलात राज्य ने ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता की घोषणा की थी। इसी ऐतिहासिक घटना को आधार बनाकर बलूच राष्ट्रवादी हर साल 11 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के तौर पर मनाने की बात करते हैं।

 

1947 में क्या हुआ था?
इतिहास के इस हिस्से को लेकर अलग-अलग व्याख्याएं हैं। 11 अगस्त 1947 को कलात के खानत ने खुद को स्वतंत्र घोषित किया था। ब्रिटिश शासन खत्म होने के समय कलात का पाकिस्तान के साथ संबंध एक अलग राजनीतिक और संवैधानिक व्यवस्था के तहत था। ब्रिटिश शासन के अंत के बाद कलात और पाकिस्तान के बीच संबंधों को लेकर बातचीत शुरू हुई। ब्रिटिश संसद के रिकॉर्ड में भी दर्ज है कि 11 अगस्त 1947 को कलात को स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में घोषित किया गया था, हालांकि बाद में पाकिस्तान के साथ उसके विलय को लेकर विवाद पैदा हुआ।

 

पाकिस्तान में कैसे शामिल हुआ बलूचिस्तान?
कलात की स्वतंत्र स्थिति ज्यादा समय तक कायम नहीं रही। मार्च 1948 में पाकिस्तान के साथ विलय को लेकर विवाद बढ़ गया और अंततः 27 मार्च 1948 को खान ऑफ कलात ने पाकिस्तान में विलय के दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद कलात पाकिस्तान का हिस्सा बन गया। अमेरिकी कांग्रेस की लाइब्रेरी में उपलब्ध एक ऐतिहासिक दस्तावेज में भी 1947 में कलात की स्वतंत्रता और 1948 में पाकिस्तान में उसके विलय का उल्लेख मिलता है। यही घटनाक्रम आज बलूच स्वतंत्रता समर्थकों के आंदोलन का प्रमुख ऐतिहासिक आधार है।

 

अब 11 अगस्त को लेकर ऐलान 
बलूच स्वतंत्रता समर्थक समूहों की ओर से जारी अपील में लोगों से कहा गया है कि 11 अगस्त को बलूच एकता और स्वतंत्रता की भावना प्रदर्शित की जाए। विदेशों में रहने वाले बलूच लोगों से भी इस दिन कार्यक्रम आयोजित करने और बलूच झंडा फहराने का आह्वान किया गया है। बलूच राष्ट्रवादी संगठनों का कहना है कि यह दिन उनके लिए केवल एक प्रतीकात्मक तारीख नहीं बल्कि 1947 की उस घटना की याद है, जब कलात ने अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की थी। बलूच स्वतंत्रता समर्थक समूह अब इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उठाने की कोशिश कर रहे हैं। उनका दावा है कि बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों और क्षेत्र के विकास से जुड़े फैसलों में स्थानीय लोगों की पर्याप्त भूमिका नहीं है। इन समूहों की मांग है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय बलूच लोगों के राजनीतिक अधिकारों और आत्मनिर्णय के सवाल पर ध्यान दे।

 

 बता दें कि बलूचिस्तान में पाकिस्तान के खिलाफ असंतोष और सशस्त्र विद्रोह का इतिहास कई दशकों पुराना है। क्षेत्र में अलग-अलग समय पर स्वतंत्रता और अधिक स्वायत्तता की मांग को लेकर आंदोलन हुए हैं। ब्रिटिश संसद में 2024 में हुई चर्चा में भी बलूचिस्तान के 1947 के संक्षिप्त स्वतंत्रता काल और उसके बाद पाकिस्तान में विलय के साथ लंबे समय से चले आ रहे स्वतंत्रता संघर्ष का उल्लेख किया गया था। बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध होने के बावजूद वहां लंबे समय से आर्थिक विकास, संसाधनों के नियंत्रण और राजनीतिक अधिकारों को लेकर विवाद बना हुआ है।

  


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Content Writer

Tanuja

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