अमेरिका और खाड़ी देश अब मांग रहे यूक्रेन से मदद, जेलेंस्की बोले- हमारे पास है शाहेद ड्रोन को मार गिराने का फॉर्मूला
punjabkesari.in Friday, Mar 06, 2026 - 04:22 PM (IST)
Zelensky statement on Iranian Shahed Drones : पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी जंग आज अपने सातवें दिन में प्रवेश कर गई है। जहां एक ओर मिसाइलों और ड्रोन के हमलों से समूचा क्षेत्र दहक रहा है वहीं दूसरी ओर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। जेलेंस्की के मुताबिक ईरान के खतरनाक 'शाहेद' (Shahed) ड्रोन से निपटने के लिए अमेरिका सहित खाड़ी के कई देश अब यूक्रेन के अनुभव और तकनीक का सहारा लेना चाहते हैं।
यूक्रेन के पास क्या है खास?
रूस पिछले चार सालों से यूक्रेन पर ईरानी मूल के शाहेद ड्रोन से हमले कर रहा है। इन हमलों को झेलते-झेलते यूक्रेन ने एक ऐसी किफायती तकनीक विकसित कर ली है जिसने दुनिया के बड़े रक्षा विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है। यूक्रेन ने मात्र 1,000 डॉलर की लागत वाले इंटरसेप्टर ड्रोन बनाए हैं जो दुश्मन के महंगे ड्रोन को ढूंढकर हवा में ही नष्ट कर देते हैं। हाल ही में रूस ने एक ही रात में 800 से ज्यादा ड्रोन से यूक्रेन पर हमला किया था। इन हमलों को नाकाम करने के यूक्रेन के अनुभव को अब अमेरिका और मध्य-पूर्व के देश (जैसे कतर, जॉर्डन, यूएई और कुवैत) अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी मान रहे हैं।
जेलेंस्की की शर्त: मदद करेंगे, पर अपनी सुरक्षा पहले
राष्ट्रपति जेलेंस्की ने स्पष्ट किया कि यूक्रेन विशेषज्ञों और उपकरणों की मदद देने के लिए तैयार है लेकिन इसके पीछे कुछ शर्तें हैं:
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यूक्रेन की अपनी सुरक्षा और रूस के खिलाफ जारी युद्ध की कूटनीतिक कोशिशें प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
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यूक्रेन उन्हीं देशों की रक्षा में सहयोग करेगा जो यूक्रेन के लोगों की सुरक्षा में मददगार साबित होते हैं। जेलेंस्की ने बताया कि उन्होंने खाड़ी देशों के नेताओं से इस मुद्दे पर विस्तार से बात की है और अमेरिकी अनुरोध पर विशेषज्ञ भेजने के आदेश भी दिए हैं।
पश्चिम एशिया की जंग ने रोकी रूस-यूक्रेन शांति वार्ता
मिडल ईस्ट में बढ़ते तनाव का सीधा असर रूस-यूक्रेन युद्ध पर पड़ा है। जेलेंस्की ने जानकारी दी कि अमेरिका की मध्यस्थता में रूस के साथ होने वाली वार्ता का अगला दौर फिलहाल टाल दिया गया है। दुनिया का ध्यान अब यूरोप से हटकर पश्चिम एशिया पर केंद्रित हो गया है जिसका फायदा रूस उठा सकता है।
